
पार्टी ने छोड़ा, पर दौसा ने थामा हाथ;मंत्री किरोड़ी लाल मीणा का जनता के नाम भावुक संदेश
राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का अपने गृहनगर दौसा के प्रति गहरा भावनात्मक जुड़ाव एक बार फिर मंच से झलक उठा। बुधवार देर शाम आयोजित डेयरी प्रीमियम खेल प्रतियोगिता के समापन समारोह में युवाओं को संबोधित करते हुए मंत्री मीणा भावुक हो उठे।
राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का अपने गृहनगर दौसा के प्रति गहरा भावनात्मक जुड़ाव एक बार फिर मंच से झलक उठा। बुधवार देर शाम आयोजित डेयरी प्रीमियम खेल प्रतियोगिता के समापन समारोह में युवाओं को संबोधित करते हुए मंत्री मीणा भावुक हो उठे। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन के उस दौर का जिक्र किया, जब उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था और उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़कर इतिहास रचा था।

डॉ. मीणा ने कहा, “जब मुझे पार्टी ने निकाला, तब दौसा की जनता ने मुझे संभाला। मेरी नैया डूबने वाली थी, लेकिन जनता ने मुझे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में 1 लाख 46 हजार वोटों से जिताकर संसद भेजा। उस समय राष्ट्रीय पार्टियों के उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। यह जीत मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है, जिसे मैं कभी नहीं भूल सकता।”
मंत्री मीणा ने कहा कि दौसा की जनता ने हर मुश्किल वक्त में उनका साथ दिया है। उन्होंने बताया कि उनके छोटे भाई जगमोहन मीणा के चुनाव हारने के बाद वह पहली बार इतनी बड़ी भीड़ में दौसा की जनता से रूबरू हो रहे हैं।
उन्होंने कहा, “अगर मेरे साथ यह युवा टीम नहीं होती, तो उपचुनाव में जमानत जब्त हो जाती। इस टीम ने भाजपा की इज्जत बचाई। दौसा के युवाओं का मुझ पर सबसे बड़ा हक है और मैं हमेशा उनका ऋणी रहूंगा।”
कृषि मंत्री मीणा ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि उन्हें राजनीति में आने से पहले ईमानदारी और सादगी का मार्ग चुनना चाहिए। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा, “शास्त्री जी की सादगी और ईमानदारी हम सबके लिए प्रेरणा है। प्रधानमंत्री रहते हुए भी उनके निधन के समय जेब में मात्र 220 रुपये थे। उन्होंने एम्बेसडर कार भी बैंक से लोन पर ली थी और उनके निधन के बाद उनकी मां ने वह लोन चुकाया था।”
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि अगर राजनीति में कदम रखें, तो शास्त्री जी की तरह निष्कलंक चरित्र अपनाएं और देश के लिए ईमानदारी से काम करें।
डॉ. मीणा ने आगे कहा कि युवाओं को सरदार वल्लभभाई पटेल से भी प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज भारत एकजुट है तो इसका श्रेय लौहपुरुष पटेल को जाता है।
“आज़ादी के समय देश में 543 रियासतें थीं। अगर पटेल नहीं होते तो भारत का एकीकरण कभी संभव नहीं होता। युवाओं को उनके जैसा मजबूत, निर्णायक और निडर नेता बनने की जरूरत है,” उन्होंने कहा।
मंत्री मीणा ने युवाओं को प्रशासनिक सेवा की ओर भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा, “अगर कोई युवा एसपी बने, तो इलाके के गुंडे-बदमाश उसके नाम से डरें। उसका उद्देश्य समाज में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और मां-बहनों की इज्जत की रक्षा करना होना चाहिए।”
समापन में डॉ. मीणा ने कहा कि दौसा की युवा शक्ति ही उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी ताकत है। “जब पार्टी ने निकाला, तब दौसा ने संभाला — यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि मेरे जीवन का सत्य है। दौसा की मिट्टी ने मुझे बनाया है, और मैं इस क्षेत्र की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहूंगा।”

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Sachin Sharmaलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




