राजस्थान: खेजड़ी संरक्षण बिल अब तक क्यों नहीं? पूर्व मंत्री हरीश चौधरी ने सरकार को घेरा

Mar 07, 2026 08:34 pm ISTSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान, जयपुर
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राजस्थान की पहचान और मरुस्थलीय जीवन की रीढ़ मानी जाने वाली खेजड़ी के पेड़ों को कानूनी संरक्षण देने का मुद्दा एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। बाड़मेर के बायतु विधायक और पूर्व मंत्री हरीश चौधरी ने राज्य सरकार से सवाल किया 

राजस्थान: खेजड़ी संरक्षण बिल अब तक क्यों नहीं? पूर्व मंत्री हरीश चौधरी ने सरकार को घेरा

राजस्थान की पहचान और मरुस्थलीय जीवन की रीढ़ मानी जाने वाली खेजड़ी के पेड़ों को कानूनी संरक्षण देने का मुद्दा एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। बाड़मेर के बायतु विधायक और पूर्व मंत्री हरीश चौधरी ने राज्य सरकार से सवाल करते हुए पूछा है कि जब सरकार ने खेजड़ी संरक्षण के लिए कानून लाने का वादा किया था, तो अब तक वह विधेयक विधानसभा में क्यों नहीं लाया गया?

चौधरी ने कहा कि सरकार की ओर से खेजड़ी के पेड़ों को कानूनी संरक्षण देने के लिए कानून बनाने की घोषणा की गई थी, लेकिन लंबे समय बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर खेजड़ी संरक्षण बिल को लेकर सरकार की मंशा क्या है।

बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में उठा मुद्दा

शुक्रवार शाम हुई बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में कांग्रेस ने इस मुद्दे को औपचारिक रूप से उठाया। कांग्रेस की ओर से प्रस्ताव रखा गया कि जब तक खेजड़ी संरक्षण से जुड़ा विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत नहीं किया जाता, तब तक सदन की कार्यवाही को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।

हरीश चौधरी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि पर्यावरण और प्रदेश की प्राकृतिक विरासत से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि जब सरकार स्वयं खेजड़ी संरक्षण का वादा कर चुकी है, तो फिर इस बिल को लाने में देरी क्यों हो रही है?

मरुस्थलीय जीवन की आधारशिला है खेजड़ी

चौधरी ने कहा कि राजस्थान जैसे मरुस्थलीय प्रदेश में खेजड़ी का पेड़ केवल एक सामान्य पेड़ नहीं है। यह प्रदेश की पारिस्थितिकी, पर्यावरण और ग्रामीण जीवन की आधारशिला माना जाता है। खेजड़ी का पेड़ पशुपालन, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने बताया कि खेजड़ी की पत्तियां पशुओं के चारे के रूप में काम आती हैं, जबकि इसकी मौजूदगी जमीन की उर्वरता बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती है। यही वजह है कि सदियों से राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में खेजड़ी को विशेष सम्मान दिया जाता रहा है।

ऐसे में जब लगातार खेजड़ी के पेड़ों की कटाई की खबरें सामने आ रही हैं, तो यह चिंता का विषय बन गया है।

लगातार कट रहे खेजड़ी के पेड़?

हरीश चौधरी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कई जगहों पर खेजड़ी के पेड़ों की कटाई लगातार हो रही है। यदि इन पेड़ों को कानूनी संरक्षण नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।

उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह जल्द से जल्द खेजड़ी संरक्षण से जुड़ा विधेयक विधानसभा में लाए ताकि इस महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर को बचाया जा सके।

चौधरी ने यह भी कहा कि यदि सरकार पर्यावरण संरक्षण को लेकर सचमुच गंभीर है, तो खेजड़ी जैसे महत्वपूर्ण पेड़ के लिए अलग कानून लाना उसकी प्राथमिकता होनी चाहिए।

कांग्रेस का दबाव जारी रहेगा

कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस दल और वे स्वयं खेजड़ी संरक्षण के लिए हर लोकतांत्रिक मंच पर आवाज उठाएंगे।

उनका कहना है कि यह केवल किसी एक क्षेत्र का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान की पर्यावरणीय सुरक्षा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा सवाल है।

सरकार कब लाएगी बिल?

अब बड़ा सवाल यही है कि जब खेजड़ी संरक्षण को लेकर सरकार पहले ही घोषणा कर चुकी है, तो आखिर यह विधेयक विधानसभा में कब पेश किया जाएगा? क्या सरकार इस प्राकृतिक धरोहर को बचाने के लिए जल्द कदम उठाएगी, या यह मुद्दा केवल घोषणाओं तक ही सीमित रह जाएगा?

फिलहाल, हरीश चौधरी के सवालों ने इस मुद्दे को फिर से राजनीतिक और पर्यावरणीय बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार खेजड़ी संरक्षण को लेकर क्या ठोस कदम उठाती है।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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