जेजेएम घोटाले में पूर्व IAS कोर्ट में पेश, ACB ने 5 दिन की रिमांड मांगी
जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में बड़ी कार्रवाई के तहत शुक्रवार को पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को एसीबी कोर्ट में पेश किया गया। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने कोर्ट से उनकी 5 दिन की पुलिस रिमांड की मांग करने की तैयारी की है, ताकि मामले में गहन पूछताछ की जा सके।

जेजेएम घोटाले में बड़ा अपडेट, पूर्व IAS कोर्ट में पेश
जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में बड़ी कार्रवाई के तहत शुक्रवार को पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को एसीबी कोर्ट में पेश किया गया। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने कोर्ट से उनकी 5 दिन की पुलिस रिमांड की मांग करने की तैयारी की है, ताकि मामले में गहन पूछताछ की जा सके। इस पूरे मामले की जांच एसीबी डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के सुपरविजन में चल रही है।
गिरफ्तारी के अगले दिन कोर्ट में पेशी
एसीबी अधिकारियों के अनुसार, सुबोध अग्रवाल को एक दिन पहले ही गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ पहले से ही गिरफ्तारी वारंट जारी था। गुरुवार को उन्हें नई दिल्ली से हिरासत में लेकर जयपुर लाया गया, जहां औपचारिक गिरफ्तारी की गई। शुक्रवार को मेडिकल प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया।
टेंडर घोटाले और पद के दुरुपयोग के आरोप
जांच में सामने आया है कि पूर्व आईएएस अधिकारी पर टेंडर प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी और पद के दुरुपयोग के आरोप हैं। एसीबी का दावा है कि फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर टेंडर जारी किए गए और शर्तों में हेरफेर कर करीब 50 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई। इस घोटाले में बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है।
10 गिरफ्तार, 3 आरोपी अभी भी फरार
इस मामले में एसीबी पहले ही 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि तीन अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं। फरार आरोपियों के खिलाफ स्टैंडिंग वारंट जारी किए गए हैं और उनकी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इन आरोपियों को भी गिरफ्तार करने के प्रयास तेज किए जाएंगे।
51 दिन की तलाश, 260 ठिकानों पर छापेमारी
सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी एसीबी के लिए आसान नहीं रही। उन्हें पकड़ने के लिए एजेंसी ने 51 दिनों तक लगातार अभियान चलाया। इस दौरान 18 टीमों का गठन किया गया, जिन्होंने देशभर में 260 ठिकानों पर छापेमारी की। बावजूद इसके, अग्रवाल लगातार एजेंसियों से बचते रहे और फरारी के दौरान 10 से अधिक ठिकाने बदलते रहे।
दिल्ली से मुंबई तक छिपने की कोशिश
जांच के दौरान एसीबी को इनपुट मिले थे कि सुबोध अग्रवाल दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद और मुंबई में छिपते रहे। इन सभी स्थानों पर लगातार दबिश दी गई, लेकिन वे पकड़ में नहीं आए। आखिरकार जब एसीबी ने कोर्ट में संदिग्ध संपत्तियों की सूची पेश की और स्थायी वारंट जारी करवाए, साथ ही कोर्ट ने उन्हें भगोड़ा घोषित किया, तो अगले ही दिन वे सामने आ गए।
भगोड़ा घोषित, संपत्ति कुर्की की तैयारी
एसीबी की कार्रवाई के तहत रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल के साथ एसई मुकेश गोयल, जितेन्द्र शर्मा और निजी व्यक्ति संजीव गुप्ता को भी भगोड़ा घोषित किया गया था। हालांकि, सुबोध अग्रवाल अब गिरफ्त में आ चुके हैं, लेकिन बाकी तीन आरोपी अब भी फरार हैं। कोर्ट के आदेश के बाद इन सभी की संदिग्ध संपत्तियों को चिह्नित कर कुर्क करने की प्रक्रिया जारी है।
रिमांड मिलने पर बड़े खुलासों की उम्मीद
एसीबी अधिकारियों का कहना है कि यदि कोर्ट से रिमांड मिलती है तो पूछताछ के दौरान न केवल जेजेएम घोटाले की परतें खोली जाएंगी, बल्कि यह भी पता लगाया जाएगा कि फरारी के दौरान सुबोध अग्रवाल को किन लोगों ने मदद पहुंचाई। इसके अलावा टेंडर प्रक्रिया में शामिल अन्य अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जाएगी।
लुक आउट नोटिस जारी, विदेश भागने का खतरा
गौरतलब है कि एसीबी ने फरार आरोपियों के विदेश भागने की आशंका को देखते हुए उनके खिलाफ लुक आउट नोटिस भी जारी करवा दिए थे। एजेंसी का मानना है कि इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
कोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें
फिलहाल, सभी की नजरें कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। यदि एसीबी को रिमांड मिलती है, तो आने वाले दिनों में जेजेएम घोटाले से जुड़े कई अहम राज खुलने की संभावना है।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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