
जैसलमेर अग्निकांड: मौत का आंकड़ा 25 पहुंचा, एक परिवार के चार सदस्य काल के गाल में समाए
जैसलमेर बस अग्निकांड की दर्दनाक कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। हादसे में मृतकों का आंकड़ा अब 25 तक पहुंच गया है। रविवार देर रात जोधपुर के महात्मा गांधी हॉस्पिटल में 30 वर्षीय इमामत ने दम तोड़ दिया।
जैसलमेर बस अग्निकांड की दर्दनाक कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। हादसे में मृतकों का आंकड़ा अब 25 तक पहुंच गया है। रविवार देर रात जोधपुर के महात्मा गांधी हॉस्पिटल में 30 वर्षीय इमामत ने दम तोड़ दिया। वे 85% झुलस गई थीं और पिछले छह दिनों से जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही थीं। इससे पहले उनके तीन बच्चे—इरफान, यूनुस और हसीना—पहले ही इस भीषण हादसे में जान गंवा चुके थे। एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।

इमामत के पति पीर मोहम्मद भी हादसे में गंभीर रूप से झुलस गए थे। जानकारी के अनुसार, उन्होंने आग लगने के दौरान यात्रियों को बचाने की कोशिश की और बस की खिड़की तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। वर्तमान में वे अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं और वेंटिलेटर पर हैं। चिकित्सकों के अनुसार, उनकी हालत बेहद नाजुक है। परिवार और रिश्तेदारों का कहना है कि वे अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि पीर मोहम्मद मौत से जंग जीतकर लौट आएंगे।
यह दर्दनाक हादसा 14 अक्टूबर की सुबह जैसलमेर-जोधपुर हाइवे पर हुआ था, जब एक स्लीपर बस में अचानक आग लग गई। बस में सवार यात्री नींद में थे और कुछ ही मिनटों में आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। चीख-पुकार और धुएं के बीच कई लोग बाहर निकल नहीं पाए। दमकल कर्मियों ने बड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक कई परिवार उजड़ चुके थे।
महात्मा गांधी हॉस्पिटल जोधपुर के अधीक्षक डॉ. फतेह सिंह ने बताया कि इमामत की हालत बेहद गंभीर थी और उनके शरीर का अधिकांश हिस्सा झुलस गया था। उन्होंने कहा, “वर्तमान में दो मरीज अब भी वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं, जिनकी स्थिति चिंताजनक है। छह अन्य घायलों का इलाज विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में चल रहा है। अस्पताल प्रशासन पूरी कोशिश कर रहा है कि किसी भी मरीज की जान न जाए।”
मृतकों की पहचान डीएनए जांच के जरिए की जा चुकी है। प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने और उपचार की पूरी जिम्मेदारी उठाने का आश्वासन दिया गया है।
हादसे की जांच में बस मालिक तुराब अली और ड्राइवर शौकत की भूमिका सामने आई है। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि बस की बॉडी बेहद खराब हालत में थी और उसका फिटनेस प्रमाणपत्र भी संदिग्ध था। इसके अलावा, बस का परमिट नियमों के अनुसार वैध नहीं था।
चित्तौड़गढ़ के डीटीओ सुरेंद्र सिंह और परिवहन विभाग के अधिकारी चुन्नी लाल को इस लापरवाही के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। साथ ही परिवहन विभाग ने पूरे प्रदेश में स्लीपर बसों की सुरक्षा जांच तेज कर दी है।

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Sachin Sharmaलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




