जयपुरवासी ध्यान दे! PNG है तो LPG छोड़ना होगा; कलेक्टर का सख्त अल्टीमेटम

Apr 04, 2026 02:35 pm ISTSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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जयपुर शहर में एलपीजी की कमी के बीच प्रशासन ने ऐसा कदम उठाया है, जिसने हजारों घरों की रसोई व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार को हुई समीक्षा बैठक में कलेक्टर संदेश नायक ने ‘एक घर-एक गैस कनेक्शन’ नीति को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए।

जयपुरवासी ध्यान दे! PNG है तो LPG छोड़ना होगा; कलेक्टर का सख्त अल्टीमेटम

जयपुर शहर में एलपीजी की कमी के बीच प्रशासन ने ऐसा कदम उठाया है, जिसने हजारों घरों की रसोई व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार को हुई समीक्षा बैठक में कलेक्टर संदेश नायक ने ‘एक घर-एक गैस कनेक्शन’ नीति को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए। इस फैसले के तहत जिन घरों में पाइप नेचुरल गैस (PNG) का कनेक्शन पहले से मौजूद है, उन्हें अगले तीन महीनों के भीतर एलपीजी सिलेंडर कनेक्शन सरेंडर करना होगा।

तीन महीने का अल्टीमेटम, नहीं माने तो क्या होगा?

बैठक में साफ संकेत दिए गए कि यह सिर्फ सलाह नहीं, बल्कि सख्त प्रशासनिक निर्देश है। अधिकारियों के मुताबिक, शहर में एलपीजी की उपलब्धता प्रभावित होने के कारण यह कदम जरूरी हो गया है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जो लोग अभी भी एलपीजी पर निर्भर हैं, क्या वे समय पर PNG में शिफ्ट हो पाएंगे? और अगर नहीं, तो क्या उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ेगा?

PNG बनाम LPG क्या सच में बेहतर विकल्प?

कलेक्टर ने बैठक में कहा कि पाइप नेचुरल गैस एलपीजी के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित, सस्ती और सुलभ है। प्रशासन का दावा है कि यह बदलाव सिर्फ गैस की कमी से निपटने के लिए नहीं, बल्कि शहर को स्वच्छ ऊर्जा की ओर ले जाने के लिए भी जरूरी है। हालांकि, कई इलाकों में अभी PNG की पहुंच सीमित है, जिससे लोगों के मन में संशय बना हुआ है।

पाइपलाइन का काम तेज करने के निर्देश

कलेक्टर ने उन क्षेत्रों पर विशेष फोकस करने को कहा, जहां अभी पाइपलाइन डालने का काम जारी है। निर्देश दिए गए कि इन प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाए, ताकि अधिक से अधिक घरों तक PNG पहुंच सके।

अधिकारियों की मौजूदगी में बनी रणनीति

इस अहम बैठक में एडीएम-दक्षिण युगांतर शर्मा, एसडीएम सिटी राजेश जाखड़, एसडीएम सांगानेर विकास प्रजापत समेत विभिन्न गैस कंपनियों के प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर इस नीति को लागू करने की रणनीति तैयार की।

रसोई में बदलाव या नई परेशानी?

प्रशासन का यह फैसला जहां एक ओर शहर को आधुनिक और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में ले जाने की कोशिश है, वहीं आम लोगों के लिए यह एक बड़ा बदलाव भी साबित हो सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि तीन महीने के भीतर कितने घर एलपीजी छोड़कर PNG अपनाते हैं—और क्या यह बदलाव सच में उतना आसान होगा, जितना कागजों में नजर आ रहा है।

गैस कंपनियों को सख्त आदेश कोई कागजी अड़चन नहीं

बैठक में गैस कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि नए कनेक्शन देने की प्रक्रिया को आसान बनाया जाए। कलेक्टर ने कहा कि उपभोक्ताओं को किसी भी तरह की कागजी जटिलता का सामना नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही कंपनियों को घर-घर जाकर PNG के फायदे और सुरक्षा के बारे में जानकारी देने के निर्देश भी दिए गए हैं।

सोसायटी और अपार्टमेंट्स होंगे टारगेट पर

प्रशासन अब बड़े स्तर पर रेजिडेंशियल वेलफेयर सोसायटियों और मल्टी स्टोरी बिल्डिंग्स को PNG अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। सामूहिक रूप से कनेक्शन लेने की योजना पर जोर दिया जा रहा है, जिससे तेजी से बदलाव लाया जा सके।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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