
जयपुर SMS ट्रॉमा सेंटर में आग के बाद संकट, ICU बेड की कमी से जूझ रहे गंभीर मरीज
जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल का ट्रॉमा सेंटर, जिसे प्रदेश का सबसे बड़ा और अत्याधुनिक उपचार केंद्र माना जाता है, इन दिनों एक गंभीर संकट से गुजर रहा है।
जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल का ट्रॉमा सेंटर, जिसे प्रदेश का सबसे बड़ा और अत्याधुनिक उपचार केंद्र माना जाता है, इन दिनों एक गंभीर संकट से गुजर रहा है। कुछ दिन पहले ट्रॉमा ICU वार्ड में लगी आग ने न सिर्फ अस्पताल की व्यवस्था को हिला दिया, बल्कि गंभीर मरीजों के लिए जीवनरेखा बने ICU बेड भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

ट्रॉमा सेंटर में फिलहाल केवल चार में से दो ICU वार्ड ही काम कर पा रहे हैं। आग के कारण ट्रॉमा ICU के 11 बेड पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि पास स्थित सेमी ICU में धुआं फैलने से वहां की सेवाएं भी बंद करनी पड़ीं। मरम्मत कार्य शुरू है, लेकिन फिलहाल उसकी बहाली में कुछ समय और लगने की उम्मीद है।
आंकड़ों में संकट
SMS ट्रॉमा सेंटर में कुल 46 ICU बेड की व्यवस्था है — जिनमें इमरजेंसी ICU के 6, ट्रॉमा ICU के 11, पॉली ट्रॉमा वार्ड के 16 और सेमी ICU के 13 बेड शामिल हैं। लेकिन आग की घटना के बाद केवल 22 बेड ही चालू हैं, यानी आधी क्षमता पर अस्पताल को चलाना पड़ रहा है।
प्रतिदिन 200 से 300 गंभीर मरीज यहां पहुंच रहे हैं, जिनमें सड़क हादसों, गिरने, या अन्य गंभीर चोटों से पीड़ित लोग शामिल हैं। ऐसे में सीमित ICU बेड के कारण डॉक्टरों और स्टाफ को मरीजों की प्राथमिकता तय करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई मरीजों को वेटिंग लिस्ट में रखना पड़ रहा है, जबकि कुछ को अन्य अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।
ट्रॉमा सेंटर के गलियारों में अब भी आग की गंध और धुएं के निशान देखे जा सकते हैं। मरम्मत टीम लगातार काम में जुटी है, लेकिन सुरक्षा जांच पूरी हुए बिना ICU को दोबारा शुरू नहीं किया जा सकता। सेमी ICU की दीवारों और वेंटिलेशन सिस्टम को बदलने की जरूरत बताई जा रही है।
ड्यूटी पर तैनात नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ का कहना है कि आग के बाद से मरीजों का दबाव लगातार बढ़ा है। कई मरीजों को बांगड़ परिसर में शिफ्ट किया जा रहा है, जहां सामान्य वार्ड की व्यवस्था की गई है। लेकिन वहां ICU जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिससे डॉक्टरों को उपचार में सीमाएं झेलनी पड़ रही हैं।
डॉक्टर बोले - मरीजों को परेशानी नहीं होने दे रहे”
ट्रॉमा सेंटर इंचार्ज डॉ. बी. एल. यादव ने बताया कि फिलहाल 22 ICU बेड पर इलाज जारी है।
“हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि किसी मरीज को परेशानी न हो। जिन मरीजों की स्थिति स्थिर है, उन्हें बांगड़ परिसर में शिफ्ट किया जा रहा है। वहीं, जिन मरीजों को ICU की जरूरत है, उन्हें अस्पताल के अन्य विभागों में बेड उपलब्ध कराए जा रहे हैं,” — डॉ. यादव ने कहा।
उन्होंने बताया कि ट्रॉमा ICU और सेमी ICU की मरम्मत का कार्य तेजी से चल रहा है और जल्द ही दोनों वार्ड फिर से शुरू कर दिए जाएंगे।
ट्रॉमा सेंटर के बाहर इंतजार कर रहे मरीजों के परिजन बेड की कमी से परेशान हैं। कई लोगों का कहना है कि गंभीर मरीजों को लंबे समय तक स्ट्रेचर या व्हीलचेयर पर रखना पड़ रहा है। “हम सुबह से भर्ती के इंतजार में बैठे हैं, ICU में जगह नहीं है,” एक मरीज के परिजन ने बताया।
SMS ट्रॉमा सेंटर राज्य के सबसे व्यस्त स्वास्थ्य केंद्रों में से एक है, लेकिन आग की इस घटना ने सुरक्षा और रखरखाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन फिलहाल मरीजों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है — ICU बेड की कमी और इलाज में देरी।

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