एक्सीडेंट से दोतरफा हर्निया, ऑपरेशन में रोबोट ने संभाली कमान; राजस्थान के SMS में बना रिकॉर्ड

Sachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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ऑपरेशन थिएटर में सन्नाटा था। मॉनिटर पर धड़कनों की रफ्तार दर्ज हो रही थी और एक कोने में खड़ा रोबोटिक कंसोल सर्जन के इशारों का इंतजार कर रहा था। जैसे ही कमांड मिली, मशीन के सूक्ष्म औजार हरकत में आए और यहीं से शुरू हुआ 

एक्सीडेंट से दोतरफा हर्निया, ऑपरेशन में रोबोट ने संभाली कमान; राजस्थान के SMS में बना रिकॉर्ड

ऑपरेशन थिएटर में सन्नाटा था। मॉनिटर पर धड़कनों की रफ्तार दर्ज हो रही थी और एक कोने में खड़ा रोबोटिक कंसोल सर्जन के इशारों का इंतजार कर रहा था। जैसे ही कमांड मिली, मशीन के सूक्ष्म औजार हरकत में आए और यहीं से शुरू हुआ राजस्थान के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र का एक नया अध्याय।

जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल (एसएमएस) में रोबोट के जरिए 300वीं सफल सर्जरी पूरी की गई। यह सर्जरी एक ऐसे मरीज की थी, जिसे एक्सीडेंट के बाद दोनों तरफ हर्निया हो गया था—एक दुर्लभ स्थिति, जो ट्रॉमा केस में आमतौर पर देखने को नहीं मिलती।

ट्रक रोकते हुए हुआ हादसा, फिर बढ़ी परेशानी

मरीज रामपाल (50), जो राजस्थान पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल हैं, ने बताया कि पिछले साल 30 नवंबर को राजपार्क इलाके में ड्यूटी के दौरान एक बेकाबू ट्रक को रोकने की कोशिश में उनका एक्सीडेंट हो गया था। हादसे में शरीर पर गंभीर चोट आई। शुरुआत में सामान्य दर्द समझकर इलाज चलता रहा, लेकिन समय के साथ पेट के दोनों हिस्सों में सूजन और तकलीफ बढ़ने लगी।

पिछले महीने जब वे एसएमएस अस्पताल की ओपीडी में पहुंचे, तो जांचों के बाद डॉक्टरों ने दोनों तरफ हर्निया की पुष्टि की। 23 फरवरी को भर्ती करने के बाद 28 फरवरी को ऑपरेशन किया गया और धुलंडी यानी 3 मार्च को उन्हें छुट्टी दे दी गई।

ढाई घंटे चला ऑपरेशन, तीन छोटे छेद से पूरा इलाज

सर्जरी विभाग की एचओडी डॉ. ऋचा जैन के मार्गदर्शन में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नरेन्द्र शर्मा और उनकी टीम ने यह जटिल ऑपरेशन किया। करीब ढाई घंटे तक चले इस ऑपरेशन में मरीज के पेट पर केवल 8-8 एमएम के तीन छोटे छेद किए गए।

डॉ. शर्मा ने बताया कि ट्रॉमा के कारण दोनों तरफ हर्निया होना बेहद कम मामलों में देखने को मिलता है। ऐसे केस में पारंपरिक ओपन सर्जरी के बजाय रोबोटिक तकनीक अधिक सटीक और सुरक्षित विकल्प साबित हुई।

इस सर्जरी में डॉ. दीक्षा मेहता, डॉ. हिमांशु, डॉ. सोनाली, डॉ. सौम्या के साथ एनेस्थीसिया विभाग से सीनियर प्रोफेसर डॉ. सुशील भाटी, डॉ. इन्दु, डॉ. सुनील चौहान, डॉ. मनोज सोनी और डॉ. आकांक्षा की टीम मौजूद रही।

300 सर्जरी का कीर्तिमान, सरकारी अस्पतालों में रिकॉर्ड

एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. मृणाल जोशी ने बताया कि जनरल सर्जरी विभाग में रोबोटिक मशीन लगने के बाद से अब तक 300 सर्जरी पूरी की जा चुकी हैं। यह राजस्थान के किसी भी सरकारी अस्पताल में रोबोट से की गई सर्जरी का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

उन्होंने कहा कि रोबोटिक सर्जरी का सबसे बड़ा फायदा मरीज को होता है—ब्लड लॉस बेहद कम, संक्रमण का खतरा घटा और रिकवरी तेज। कई मामलों में मरीज कुछ ही दिनों में सामान्य दिनचर्या में लौट आता है।

कैसे काम करता है रोबोटिक सिस्टम?

रोबोटिक सर्जरी में सर्जन सीधे मरीज के पास खड़े होकर नहीं, बल्कि कंसोल पर बैठकर ऑपरेशन करते हैं। हाई-डेफिनिशन 3D विजन और सूक्ष्म औजारों की मदद से शरीर के अंदर बेहद सटीक मूवमेंट संभव हो पाता है। यही कारण है कि जटिल मामलों में भी कम से कम कट और कम दर्द के साथ इलाज संभव हो रहा है।

सस्पेंस से सफलता तक की कहानी

राजपार्क की सड़कों पर ड्यूटी निभाते वक्त हुए हादसे से शुरू हुई यह कहानी ऑपरेशन थिएटर में आकर खत्म नहीं हुई, बल्कि एक नई उम्मीद के साथ आगे बढ़ी। जिस चोट ने दोतरफा हर्निया जैसी दुर्लभ समस्या खड़ी की, उसी का समाधान अब आधुनिक तकनीक ने दिया।

ढाई घंटे के भीतर रोबोटिक हाथों ने वह कर दिखाया, जिसके लिए पहले बड़े चीरे और लंबे आराम की जरूरत पड़ती थी। होली के मौके पर जब रामपाल अस्पताल से घर लौटे, तो यह सिर्फ एक मरीज की छुट्टी नहीं थी—यह सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी क्रांति का जश्न भी था।

एसएमएस अस्पताल में 300वीं रोबोटिक सर्जरी का यह आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं, बल्कि संकेत है कि राजस्थान के सरकारी अस्पताल भी अब अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं में निजी संस्थानों से कदम मिला रहे हैं।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

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सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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