जयपुर में गुलाबी हाथी वाला फोटोशूट विवादों में, विदेशी फोटोग्राफर पर भड़के लोग

Sachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान, जयपुर
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राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक विदेशी फोटोग्राफर का फोटोशूट इन दिनों सोशल मीडिया पर तीखी बहस का विषय बन गया है। रूस की फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा (Julia Buruleva) ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया

जयपुर में गुलाबी हाथी वाला फोटोशूट विवादों में, विदेशी फोटोग्राफर पर भड़के लोग

राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक विदेशी फोटोग्राफर का फोटोशूट इन दिनों सोशल मीडिया पर तीखी बहस का विषय बन गया है। रूस की फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा (Julia Buruleva) ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें एक असली हाथी को चमकीले गुलाबी रंग से रंगकर फोटोशूट करते हुए दिखाया गया। इस वीडियो के सामने आने के बाद लोगों ने इसे लेकर कड़ी आपत्ति जताई और इसे पशुओं के साथ अनुचित व्यवहार करार दिया।

हाथी को गुलाबी रंगने पर मचा बवाल

वीडियो में एक मॉडल को जयपुर की पारंपरिक वास्तुकला के बीच गुलाबी रंग से रंगे हाथी के साथ पोज देते हुए देखा जा सकता है। जूलिया ने अपने पोस्ट में बताया कि वह कई हफ्तों तक जयपुर में रहीं और यहां की संस्कृति को समझने के बाद उन्होंने इस कॉन्सेप्ट को तैयार किया। उन्होंने लिखा कि राजस्थान में हाथी एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रतीक है और गुलाबी रंग यहां की पहचान से जुड़ा हुआ है, इसलिए उन्होंने “एक सॉलिड ब्राइट पिंक एलिफेंट” का विचार चुना।

फोटोशूट की तैयारी में लगी कई हफ्तों की मेहनत

फोटोग्राफर ने बताया कि इस शूट के लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी। उन्होंने कई हाथी फार्म्स का दौरा किया और ऐसे लोगों की तलाश की जो इस प्रोजेक्ट में सहयोग करने को तैयार हों। उन्होंने एक फार्म मैनेजर से चार बार मुलाकात की, ताकि भरोसा बनाया जा सके।

लोकेशन ढूंढना भी आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि हेरिटेज साइट्स, परमिशन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। आखिरकार यह फोटोशूट एक परित्यक्त गणेश मंदिर में सुबह-सुबह किया गया, जब सड़कों पर भीड़ नहीं थी।

‘ऑर्गेनिक और सुरक्षित’ रंग का दावा

विवाद बढ़ने के बाद जूलिया ने सफाई देते हुए कहा कि हाथी पर इस्तेमाल किया गया रंग पूरी तरह ऑर्गेनिक, नॉन-टॉक्सिक और वॉशेबल था। उन्होंने दावा किया कि यह वही रंग है जो स्थानीय त्योहारों में भी इस्तेमाल किया जाता है और इससे जानवर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। उनका कहना है कि पूरा फोटोशूट बहुत कम समय में पूरा कर लिया गया था।

सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया

हालांकि, सोशल मीडिया यूजर्स इस दलील से संतुष्ट नहीं दिखे। कई लोगों ने इसे “क्रिएटिविटी के नाम पर गैर-जिम्मेदाराना हरकत” बताया। एक यूजर ने लिखा, “क्रिएटिव फ्रीडम का मतलब यह नहीं कि आप किसी जानवर को प्रॉप बना दें। यह नैतिक और सांस्कृतिक दोनों रूप से गलत है।”

एक अन्य यूजर ने कहा, “अगर इतना ही विजुअल इफेक्ट चाहिए था तो AI का इस्तेमाल कर लेतीं, कम से कम जानवर को तकलीफ तो नहीं होती।”

कुछ यूजर्स ने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह के फोटोशूट से पशुओं के साथ गलत व्यवहार को बढ़ावा मिल सकता है और यह एक खतरनाक ट्रेंड बन सकता है।

संस्कृति की गलत समझ पर भी सवाल

कई लोगों ने फोटोग्राफर पर भारतीय संस्कृति को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का आरोप भी लगाया। खासकर भगवान गणेश से जुड़े स्थल पर इस तरह का प्रयोग करने को लेकर नाराजगी देखने को मिली। यूजर्स का कहना है कि जयपुर जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शहर को “शॉक वैल्यू” के लिए इस तरह पेश करना उचित नहीं है।

फोटोग्राफर ने दी सफाई

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जूलिया बुरुलेवा ने कहा कि वह जानवरों के साथ किसी भी तरह की हिंसा के खिलाफ हैं और उनका उद्देश्य प्रकृति और जीवों के साथ संतुलन बनाकर कला रचना करना है। उन्होंने कहा, “AI और डिजिटल टूल्स इमेज बना सकते हैं, लेकिन असली जीवन के अनुभव और जुड़ाव की जगह नहीं ले सकते। मेरा काम हमेशा सम्मान और संवेदनशीलता के साथ किया जाता है।”

फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ जहां कुछ लोग इसे कला की अभिव्यक्ति मान रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोग इसे पशु अधिकारों और सांस्कृतिक संवेदनशीलता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रहे हैं। यह घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि रचनात्मकता की सीमा क्या होनी चाहिए और क्या इसके लिए किसी जीवित प्राणी को इस तरह इस्तेमाल करना सही है।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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