काम की बात: जयपुर में जल्द AI कंट्रोल सेंटर से रियल-टाइम मॉनिटरिंग, नियम तोड़ा तो सीधे घर आएगा ई-चालान
कंट्रोल सेंटर का मुख्य उद्देश्य रियल-टाइम में शहर के ट्रैफिक की निगरानी करना और उसे सुव्यवस्थित बनाना है। इसके जरिए निगरानी बेहतर होगी, पुलिस अधिकारी मौके पर तुरंत पहुंच सकेंगे जिससे ट्रैफिक जाम और रोड सेफ्टी में सुधार होगा।

जयपुर में ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर बनाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। इससे शहर में रोड सेफ्टी को भी सुधारा जाएगा। इस कंट्रोल सेंटर का मुख्य उद्देश्य रियल-टाइम में शहर के ट्रैफिक की निगरानी करना और उसे सुव्यवस्थित बनाना है। गुरुवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस संबंध में एक रिव्यू मीटिंग भी ली।
इस प्रोजेक्ट के लिए जयपुर ट्रैफिक पुलिस, जयपुर नगर निगम और जयपुर विकास प्राधिकरण एकसाथ मिलकर काम कर रहे हैं। योजना का ब्लू प्रिंट बनाने के लिए डिप्टी कमीशनर ऑफ पुलिस (ट्रैफिक) की अध्यक्षता में एक टीम गठित की गई है।
सेंटर बनाने के लिए जमीन की जरूरत
AI आधारित ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर बनाने के लिए जमीन की जरूरत है और सरकार ने जयपुर विकास प्राधिकरण को जयपुर आयुक्त कार्यालय को जमीन आवंटित करने का निर्देश दिया है, लेकिन अभी तक इसका सीमांकन नहीं हो सका है।
नियम तोड़ने वालों की पहचान कर ई-चालान
अधिकारियों के मुताबिक AI आधारित ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर मौजूदा अभय कमांड सेंटर से ज्यादा एडवांस होगा। यह नियम तोड़ने वालों की पहचान आसानी से कर सकेगा और ऐसे वाहन चालकों को ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) टेक्नॉलजी के जरिए ई-चालान भेजेगा।
निगरानी बेहतर होगी
AI आधारित ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर के जरिए निगरानी बेहतर होगी, पुलिस अधिकारी मौके पर तुरंत पहुंच सकेंगे जिससे ट्रैफिक जाम और रोड सेफ्टी में सुधार होगा। उम्मीद है कि नए कंट्रोल सेंटर से शहर के कुछ सबसे व्यस्त कॉरिडोर जैसे महल रोड, सीकर रोड और न्यू सांगानेर रोड को में ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात मिलेगी।
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