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संकट की डोर! जयपुर में पतंगबाजी के दौरान मांझे से 153 लोग घायल, 3 की मौत

संकट की डोर! जयपुर में पतंगबाजी के दौरान मांझे से 153 लोग घायल, 3 की मौत

संक्षेप:

मकर संक्रांति के दिन जयपुर की छतों से आसमान तक रंग-बिरंगी पतंगों की चहल-पहल रही, लेकिन इसी उत्सव की आड़ में मांझे ने ऐसा कहर बरपाया कि खुशियां पल भर में मातम में बदल गईं।

Jan 14, 2026 09:37 pm ISTSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान, जयपुर
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मकर संक्रांति के दिन जयपुर की छतों से आसमान तक रंग-बिरंगी पतंगों की चहल-पहल रही, लेकिन इसी उत्सव की आड़ में मांझे ने ऐसा कहर बरपाया कि खुशियां पल भर में मातम में बदल गईं। बुधवार को राजधानी जयपुर में पतंगबाजी, मांझे से कटने और इससे जुड़े सड़क हादसों में 153 से ज्यादा लोग घायल हो गए। सबसे दर्दनाक घटना एक 10 साल के मासूम धीर कुमार की रही, जिसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। यह हादसा न सिर्फ एक परिवार के लिए, बल्कि पूरे शहर के लिए झकझोर देने वाला साबित हुआ।

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सड़क पर लटकता मांझा बना मौत का फंदा

धीर कुमार अपने परिजनों के साथ राजमहल चौराहे के पास कार से गुजर रहा था। अचानक बीच सड़क पर लटक रहे मांझे ने उसके गले को जकड़ लिया। पल भर में गला कट गया और बच्चा लहूलुहान हो गया। परिजन घबराते हुए उसे तुरंत एसएमएस ट्रोमा सेंटर लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी। मासूम की मौत की खबर फैलते ही इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। खेल-कूद की उम्र में इस तरह जिंदगी का थम जाना हर किसी को भीतर तक झकझोर गया। परिजन बेसुध हैं और सवाल वही— आखिर जानलेवा मांझे पर रोक क्यों नहीं?

ट्रोमा सेंटर में दिनभर अफरा-तफरी

मकर संक्रांति पर एसएमएस अस्पताल का ट्रोमा सेंटर जंग के मैदान जैसा नजर आया। अतिरिक्त अधीक्षक डॉ. प्रदीप शर्मा के अनुसार सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक 42 से ज्यादा घायल ट्रोमा सेंटर पहुंचे। इनमें अधिकांश मामले मांझे से कटने या पतंग उड़ाते समय छत से गिरने के थे।

डॉ. शर्मा ने बताया कि घायलों में नाक, गला, हाथ और पैर पर गंभीर कट के मामले ज्यादा थे। 42 में से 12 मरीजों की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें भर्ती करना पड़ा। चिंता की बात यह रही कि इन गंभीर घायलों में 12 बच्चे ऐसे थे, जिनकी उम्र 14 साल या उससे कम थी।

शहर के अस्पतालों में बंटा इलाज

घायलों का दबाव सिर्फ ट्रोमा सेंटर तक सीमित नहीं रहा। शहर के अलग-अलग अस्पतालों में दिनभर मरीजों का तांता लगा रहा।

जयपुरिया अस्पताल में करीब 50 मरीज पहुंचे।

गणगौरी अस्पताल में 31 घायल भर्ती किए गए।

एसएमएस ट्रोमा सेंटर में 42 मरीज लाए गए।

कांवटिया अस्पताल में 30 घायल पहुंचे।

कांवटिया अस्पताल प्रशासन के अनुसार इनमें से 13 मरीजों की हालत गंभीर थी, जिन्हें भर्ती करना पड़ा, जबकि बाकी को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।

मांझे ने शरीर को किया छलनी

मांझे की मार कितनी खतरनाक हो सकती है, इसका अंदाजा घायलों की हालत देखकर लगाया जा सकता है। 56 साल के राजेश कहीं जा रहे थे, तभी सड़क पर फैले मांझे ने उनके पैर को बुरी तरह काट दिया। कट इतना गहरा था कि पैर लगभग लटकने जैसी स्थिति में आ गया। वहीं एक अन्य घायल के हाथ में मांझे से ऐसा गहरा जख्म लगा कि करीब 25 टांके लगाने पड़े। इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि प्रतिबंध के बावजूद नायलॉन और चाइनीज मांझा आखिर शहर में कैसे बिक रहा है।

पतंगबाजी करते समय जयपुर के मालवीय नगर निवासी बबलू (26) की भी मौत हो गई पड़ोसियों ने बताया कि बबलू अपने घर की छत से पतंगबाजी कर रहा था घर में लिफ्ट की जगह छोड़ रखी थी उसमें बबलू गिरा जिसके बाद उसे ट्रॉमा सेंटर लाया गया जहां डॉक्टर्स ने उसे मृत घोषित किया है।

वहीं अर्पित की भी पतंगबाजी में जान चली गई है। कटी पतंग लूटते समय बड़ा हादसा हो गया। बच्चा अर्पित कटी पतंग पकड़ने के लिए दौड़ते हुए नाले के पास पहुंच गया और संतुलन बिगड़ने से करीब 7 फीट गहरे पानी में गिर गया।

घटना की सूचना मिलते ही खोह नागरियान थाना पुलिस मौके पर पहुंची। बच्चे को बाहर निकालकर जेएनयू हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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