जयपुर में डॉक्टरों की हड़ताल, निजी अस्पतालों में ओपीडी-इमरजेंसी सेवाएं ठप, मरीज परेशान
राजधानी जयपुर में निजी अस्पतालों के डॉक्टर मंगलवार को सड़कों पर उतर आए और 24 घंटे की सांकेतिक हड़ताल पर चले गए। यह विरोध प्रदर्शन निविक हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. सोमदेव बंसल की गिरफ्तारी के खिलाफ किया जा रहा है।

राजधानी जयपुर में निजी अस्पतालों के डॉक्टर मंगलवार को सड़कों पर उतर आए और 24 घंटे की सांकेतिक हड़ताल पर चले गए। यह विरोध प्रदर्शन निविक हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. सोमदेव बंसल की गिरफ्तारी के खिलाफ किया जा रहा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) राजस्थान के आह्वान पर प्रदेशभर के निजी अस्पतालों में ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं बंद रखी गईं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर देखने को मिला।
अस्पतालों में पसरा सन्नाटा, ओपीडी सेवाएं ठप
सुबह से ही जयपुर के अधिकांश निजी अस्पतालों में सन्नाटा पसरा रहा। डॉक्टर अस्पताल तो पहुंचे, लेकिन ओपीडी कक्षों में नहीं बैठे और नए मरीजों का उपचार नहीं किया। कई अस्पतालों में नोटिस चिपकाकर मरीजों को सेवाएं बंद होने की जानकारी दी गई। हालांकि पहले से भर्ती (आईपीडी) मरीजों का इलाज जारी रखा गया, ताकि गंभीर मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
बड़े अस्पतालों में भी दिखा हड़ताल का असर
सी. के. बिरला, साकेत और फोर्टिस जैसे बड़े निजी अस्पतालों समेत छोटे अस्पतालों में भी यही स्थिति देखने को मिली। अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह हड़ताल पूरी तरह सांकेतिक है, लेकिन डॉक्टरों की मांगें नहीं मानी गईं तो आगे आंदोलन और तेज किया जाएगा। कोटा समेत अन्य शहरों में भी आईएमए के बैनर तले निजी अस्पतालों ने 24 घंटे के लिए सेवाएं बंद रखीं।
मरीजों की बढ़ी मुश्किलें, सरकारी अस्पतालों का सहारा
इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर आम मरीजों पर पड़ा। कई मरीज ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचे, लेकिन सेवाएं बंद मिलने पर उन्हें मायूस लौटना पड़ा। कुछ लोग अस्पतालों के हेल्प डेस्क पर जानकारी लेते नजर आए, जबकि अधिकांश मरीजों को मजबूरी में सरकारी अस्पतालों का रुख करना पड़ा। खास बात यह रही कि आज सरकारी अवकाश होने के कारण सरकारी अस्पतालों में भी ओपीडी सीमित समय के लिए ही संचालित हुई, जिससे मरीजों की परेशानी और बढ़ गई।
सरकारी अस्पतालों में बढ़ाई गई व्यवस्थाएं
स्थिति को देखते हुए सरकारी अस्पतालों में अतिरिक्त व्यवस्थाएं की गईं। स्वास्थ्य विभाग ने इमरजेंसी सेवाओं को सुचारू रखने के निर्देश दिए, ताकि निजी अस्पतालों में सेवाएं बंद होने के बावजूद गंभीर मरीजों को राहत मिल सके।
जालसाजी मामले में हुई गिरफ्तारी
दरअसल, रविवार को जयपुर में जालसाजी के एक मामले में पुलिस ने निविक हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. सोमदेव बंसल को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने मरीजों के दस्तावेजों में हेरफेर कर उन्हें आरजीएचएस (राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) पोर्टल पर अपलोड किया था। इसी मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।
डॉक्टरों ने गिरफ्तारी को बताया गलत
डॉक्टरों और निजी अस्पताल संचालकों का कहना है कि गिरफ्तारी गलत तरीके से की गई है और यह चिकित्सकों के सम्मान के खिलाफ है। प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. विजय कपूर ने कहा कि जब तक डॉ. बंसल को बिना शर्त रिहा नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं आईएमए के सचिव डॉ. एन. के. अग्रवाल ने सरकार से मांग की है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच कर तत्काल रिहाई सुनिश्चित की जाए।
आरजीएचएस योजना पर भी उठे सवाल
डॉक्टरों ने यह भी मांग उठाई है कि आरजीएचएस योजना से जुड़े विवादों के समाधान के लिए सरकार और चिकित्सकों के बीच समन्वय स्थापित किया जाए। उनका कहना है कि योजना के क्रियान्वयन में कई तकनीकी और प्रशासनिक समस्याएं हैं, जिन्हें सुलझाने की जरूरत है।
पुलिस का पक्ष- जांच जारी
मानसरोवर थाना के एसएचओ लखन सिंह खटाना ने बताया कि जालसाजी के मामले में नियमानुसार कार्रवाई की गई है और जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि मामले में साक्ष्यों के आधार पर ही गिरफ्तारी की गई है।
फिलहाल, 24 घंटे की इस हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं और मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। अब सभी की नजर सरकार और डॉक्टरों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी है, जिससे इस गतिरोध का समाधान निकल सके।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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