हमने 3 बार अनशन तुड़वाया,BJP ने नहीं पूछा; गहलोत को क्यों याद आए पूर्व MLA गुरुशरण छाबड़ा
गुरुशरण छाबड़ा राजस्थान की राजनीति और सामाजिक आंदोलनों का एक चर्चित नाम रहे हैं। वर्ष 1977 में वे जनता पार्टी के टिकट पर बीकानेर जिले की सूरतगढ़ विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए थे।

राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने और विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा विभाग खोलने की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे छात्र नेता शुभम रेवाड़ से मिलने गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एसएमएस अस्पताल पहुंचे। इस दौरान गहलोत ने बातचीत के दौरान शराबबंदी आंदोलन के प्रमुख चेहरा रहे पूर्व विधायक गुरुशरण छाबड़ा को याद करते हुए भाजपा सरकार पर संवेदनहीन होने का आरोप लगाया।
गहलोत ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक सरकार को आंदोलन कर रहे लोगों की बात सुननी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रसंघ चुनाव की मांग केवल शुभम रेवाड़ की नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों छात्रों की मांग है। सरकार को इस विषय पर सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए और छात्रों से संवाद करना चाहिए।
गुरुशरण छाबड़ा का जिक्र कर बीजेपी पर निशाना
अशोक गहलोत ने कहा कि उनके मुख्यमंत्री रहते गुरुशरण छाबड़ा ने नशामुक्ति और शराबबंदी की मांग को लेकर एसएमएस अस्पताल में तीन बार अनशन किया था। उस समय उन्होंने स्वयं फोन कर छाबड़ा से बातचीत की और मंत्रियों को भेजकर समझौता कराया, जिसके बाद उनका अनशन समाप्त हुआ।
उन्होंने कहा कि बाद में जब भाजपा सरकार के दौरान गुरुशरण छाबड़ा फिर आमरण अनशन पर बैठे तो सरकार ने उनकी कोई सुध नहीं ली। गहलोत के मुताबिक, विपक्ष में होने के बावजूद वह उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे और अनशन खत्म करने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने अपनी मांगों से पीछे हटने से इनकार कर दिया। दो दिन बाद उनके निधन की खबर मिली।
कौन थे गुरुशरण छाबड़ा?
गुरुशरण छाबड़ा राजस्थान की राजनीति और सामाजिक आंदोलनों का एक चर्चित नाम रहे हैं। वर्ष 1977 में वे जनता पार्टी के टिकट पर बीकानेर जिले की सूरतगढ़ विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए थे। विधायक रहने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली और समाजसेवा तथा जनआंदोलनों का रास्ता चुना।
उन्होंने वरिष्ठ गांधीवादी नेता गोकुलभाई भट्ट के साथ मिलकर राजस्थान में पूर्ण शराबबंदी लागू करने के लिए लंबा अभियान चलाया। इसके अलावा वे मजबूत लोकायुक्त कानून लागू करने और भ्रष्टाचार के खिलाफ भी लगातार आवाज उठाते रहे। शराबबंदी को लेकर उन्होंने दो दशकों से अधिक समय तक अलग-अलग वर्षों में कई बार अनशन किए और सरकारों पर दबाव बनाने का प्रयास किया।
अधूरी रह गई शराबबंदी की मांग
गुरुशरण छाबड़ा ने 2 अक्टूबर 2015, गांधी जयंती के दिन राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी और प्रभावी लोकायुक्त कानून लागू करने की मांग को लेकर आमरण अनशन शुरू किया था। लगातार एक महीने से अधिक समय तक भोजन त्यागने के कारण उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई।
स्वास्थ्य खराब होने पर उन्हें जयपुर के सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन अस्पताल में भर्ती रहने के बावजूद उन्होंने अपना अनशन समाप्त नहीं किया। अनशन के 33वें दिन, 3 नवंबर 2015 को इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। उस समय उनकी उम्र 69 वर्ष थी। उनकी मौत के बाद प्रदेशभर में शराबबंदी आंदोलन को लेकर व्यापक चर्चा हुई, लेकिन उनकी प्रमुख मांग पूरी नहीं हो सकी।
आंदोलन को लेकर फिर चर्चा में आए छाबड़ा
करीब एक दशक बाद छात्र नेता शुभम रेवाड़ के आमरण अनशन के बीच अशोक गहलोत ने गुरुशरण छाबड़ा का उदाहरण देकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि आंदोलन कर रहे लोगों से संवाद स्थापित करना भी है।
गहलोत ने कहा कि यदि सरकार समय रहते आंदोलनकारियों से बातचीत करे और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे तो ऐसी नौबत नहीं आएगी कि किसी को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़े। उन्होंने सरकार से छात्रसंघ चुनाव और छात्रों की अन्य मांगों पर संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेने की अपील की।
गुरुशरण छाबड़ा का नाम राजस्थान में शराबबंदी आंदोलन के सबसे प्रमुख चेहरों में गिना जाता है। उनका लंबा संघर्ष और आमरण अनशन आज भी प्रदेश के सामाजिक आंदोलनों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है। अब शुभम रेवाड़ के अनशन के बीच अशोक गहलोत द्वारा उनका जिक्र किए जाने से उनका आंदोलन एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।


