दोषी हूं तो गिरफ्तार करो...ACB मुख्यालय में जमकर बरसे मंत्री किरोड़ीलाल
डॉक्टर किरोड़ीलाल मीणा का यह कदम राजनीति की उस पुरानी परंपरा की याद दिलाता है जहां नेता अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते थे। उनके तेवरों में एक ऐसी आग है जो बताती है कि वे हार मानने वाले नहीं हैं।

सत्ता के गलियारों में सन्नाटा पसरा था जब राजस्थान के एक कद्दावर मंत्री ने सीधे एसीबी मुख्यालय की दहलीज लांघ ली। यह सामान्य प्रशासनिक औपचारिकता नहीं थी, यह एक ऐसे राजनेता का आत्मसम्मान बचाने का संघर्ष था, जो अपनी साख को लेकर बेहद भावुक है। डॉक्टर किरोड़ीलाल मीणा, जिन्हें उनके समर्थक संघर्ष की मिसाल मानते हैं, शुक्रवार को जब वहां पहुंचे तो उनके चेहरे पर वही पुरानी तल्खी थी, जो वर्षों से राजस्थान की राजनीति का केंद्र रही है। लेकिन इस बार मामला किसी और का नहीं, बल्कि खुद उनका था।
सवाल पहचान और इल्जाम का
सवाल सिर्फ एक एफआईआर का नहीं, बल्कि एक पहचान का है। जब एसीबी की फाइलों में एक डॉक्टर और एक मंत्री का नाम संदिग्धों के रूप में उभरा, तो प्रदेश की राजनीति में जैसे भूचाल आ गया। किरोड़ीलाल मीणा ने ठंडे कमरे में बैठकर अपनी सफाई देने के बजाय सीधे शेर की मांद में जाकर चुनौती दी। उनकी आंखों में वह दर्द साफ पढ़ा जा सकता था, जो एक ईमानदार होने का दावा करने वाले व्यक्ति को तब होता है जब उस पर भ्रष्टाचार का दाग लगाया जाता है। उन्होंने भरी महफिल और मीडिया के कैमरों के सामने कहा कि या तो मुझे सलाखों के पीछे डाल दो या फिर दूध का दूध और पानी का पानी कर दो। उनके शब्द हवा में गूंज रहे थे, क्या मैं दोषी हूं या नहीं, यह राज जनता के सामने साफ होना चाहिए।
राजनीतिक हथियार का दर्द
इस घटना के पीछे का असली पहलू वह मानसिक तनाव है जिससे आज का जन-प्रतिनिधि गुजर रहा है। जब किरोड़ीलाल कहते हैं कि उनके विरोधी उन्हें बदनाम करने के लिए एजेंसियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो यह केवल राजनीतिक आरोप नहीं है, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की पुकार है जो महसूस करता है कि उसे राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है। उनके लहजे में एक चेतावनी थी, उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि एसीबी को अपनी लक्ष्मण रेखा नहीं लांघनी चाहिए। एक ऐसा व्यक्ति जो खुद दशकों से भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करता रहा हो, उसके लिए ऐसे आरोपों का सामना करना अपमानजनक है।
व्यवस्था की खामोशी पर सवाल
कहानी सिर्फ किरोड़ीलाल के आत्मसम्मान तक सीमित नहीं है। इसी घटनाक्रम के साथ एक दूसरा पहलू भी है, जो राजस्थान के उन लाखों लोगों के दर्द से जुड़ा है जिनके नाम पर भ्रष्टाचार होता है। उन्होंने वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के घोटालों और करौली की उस पंचायत की याद दिलाई जहां सत्ता के गलियारों में रसूख रखने वाले सरपंच ने करोड़ों रुपये डकार लिए और सिस्टम आज भी खामोश है। एक तरफ वो अपनी गरिमा की लड़ाई लड़ रहे हैं, दूसरी तरफ वो उस सिस्टम पर सवाल उठा रहे हैं जो बड़े घोटालों पर आंखें मूंदे बैठा है और छोटे मामलों में राजनीति का खेल खेल रहा है।
फाइलों की धूल और आम आदमी की निराशा
शुक्रवार की उस दोपहर को जब वे डीजी के दफ्तर के बाहर इंतजार कर रहे थे, तो वहां मौजूद हर शख्स को महसूस हो रहा था कि यह सिर्फ एक मंत्री की जिद नहीं है। यह उन तमाम लोगों की निराशा का प्रतीक है जो वर्षों से जांच के नाम पर फाइलों के इधर-उधर होने का तमाशा देख रहे हैं। किरोड़ीलाल का वह अंदाज, जिसमें वे कहते हैं कि मैं पूछने आया हूं कि आप गंभीर क्यों नहीं हैं, वास्तव में आम आदमी का वह सवाल है जो फाइलों की धूल में दबकर मर जाता है।
संघर्ष का नया अध्याय
डॉक्टर किरोड़ीलाल मीणा का यह कदम राजनीति की उस पुरानी परंपरा की याद दिलाता है जहां नेता अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते थे। उनके तेवरों में एक ऐसी आग है जो बताती है कि वे हार मानने वाले नहीं हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि सत्ता के नशे में चूर लोग या फिर दबाव में काम करने वाली एजेंसियां उन्हें उस काम के लिए दोषी नहीं ठहरा सकतीं जो उन्होंने किया ही नहीं।
न्याय की प्रतीक्षा में राजस्थान
यह दिन राजस्थान के इतिहास में दर्ज हो गया है। एक मंत्री का अपने ही शासन की एजेंसियों के सामने जा खड़े होना और यह कहना कि मुझे गिरफ्तार करो, यह साबित करता है कि राजनीति का खेल कितना जटिल हो चुका है। अब सबकी निगाहें एसीबी पर टिकी हैं। क्या वे किरोड़ीलाल मीणा के सवालों का जवाब देंगे या फिर यह मामला भी पुरानी फाइलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। एक डॉक्टर, एक मंत्री और एक संघर्षशील नेता के तौर पर, किरोड़ीलाल ने आज वह लकीर खींच दी है जिसे पार करना किसी भी एजेंसी के लिए आसान नहीं होगा। वे केवल अपनी सफाई नहीं दे रहे थे, वे तो उस व्यवस्था के आईने को साफ करने की कोशिश कर रहे थे जिस पर समय के साथ धूल और भ्रष्टाचार की परतें जम गई हैं।


