धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विपक्ष ने बताया युवाओं की जीत; किस नेता ने क्या कहा

लाइव हिन्दुस्तान, जयपुर
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देशभर में NEET समेत विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर छात्रों ने लगातार प्रदर्शन किए। कई राज्यों में धरने, रैलियां और विरोध मार्च निकाले गए।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विपक्ष ने बताया युवाओं की जीत; किस नेता ने क्या कहा
धर्मेंद्र प्रधान में इस्तीफे पर राजस्थान के नेताओं के रिएक्शन

देशभर में पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इसे छात्रों के संघर्ष और लोकतंत्र की जीत बताया है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के संयोजक हनुमान बेनीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह फैसला छात्रों के दबाव और जनआंदोलन का परिणाम है।

देशभर में NEET समेत विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर छात्रों ने लगातार प्रदर्शन किए। कई राज्यों में धरने, रैलियां और विरोध मार्च निकाले गए। इन आंदोलनों के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने इसे सरकार की जवाबदेही तय होने की शुरुआत बताया।

अशोक गहलोत बोले- सरकार को देश की मांग के आगे झुकना पड़ा

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि लाखों विद्यार्थियों के संघर्ष की आखिरकार जीत हुई है और भारी जनदबाव के आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को झुकना पड़ा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता लगातार सवालों के घेरे में रही और पेपर लीक जैसी घटनाओं ने युवाओं का भविष्य प्रभावित किया।

गहलोत ने अपने बयान में कहा कि प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ राहुल गांधी और लाखों विद्यार्थियों द्वारा चलाए गए संघर्ष का यह परिणाम है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने भी धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने की मांग दोहराई थी और अब सरकार को देश की आवाज सुननी पड़ी। गहलोत ने इसे लोकतंत्र की ताकत बताते हुए कहा कि इतिहास में यह भी दर्ज रहेगा कि छात्रों के आंदोलन को दबाने के लिए किस तरह सख्ती की गई और उनकी आवाज उठाने वालों के साथ कैसा व्यवहार हुआ।

सचिन पायलट ने कहा- छात्रों की आवाज आखिरकार सुनी गई

कांग्रेस महासचिव और राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्रों और युवाओं की आवाज की जीत बताया। उन्होंने कहा कि जवाबदेही काफी पहले तय हो जानी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने लंबे समय तक इसे टालने की कोशिश की।

पायलट ने कहा कि जिन छात्रों का भविष्य पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के कारण प्रभावित हुआ है, उन्हें न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके नुकसान की भरपाई कभी नहीं हो सकती। उनके अनुसार यह केवल एक मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि युवाओं के संघर्ष और लोकतांत्रिक दबाव की जीत है।

हनुमान बेनीवाल बोले- मेहनतकश युवाओं की बड़ी जीत

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी शुरू से ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री को बर्खास्त करने की मांग कर रही थी और लगातार छात्रों के आंदोलन का समर्थन कर रही थी।

बेनीवाल ने कहा कि यह देश के मेहनतकश और संघर्षशील युवाओं की बड़ी जीत है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि युवाओं के हितों की बात करनी थी तो शिक्षा मंत्री को पहले ही हटाया जाना चाहिए था। उनके मुताबिक देशभर के छात्रों की एकजुटता ने सरकार को आखिरकार झुकने पर मजबूर कर दिया।

इस्तीफे के बाद सियासी घमासान तेज

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसे अपनी राजनीतिक जीत और छात्र आंदोलन की सफलता के रूप में पेश कर रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि लगातार उठते सवालों, विरोध प्रदर्शनों और छात्रों के दबाव के चलते केंद्र सरकार को यह फैसला लेना पड़ा।

वहीं, आने वाले दिनों में पेपर लीक, परीक्षा सुधार, भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और छात्रों के हितों को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं। विपक्ष सरकार से सिर्फ इस्तीफे तक सीमित न रहकर परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग कर रहा है।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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