दिल्ली में स्वाइन फ्लू, गुजरात में चांदीपुरा… राजस्थान में स्वास्थ्य विभाग कितना अलर्ट?

लाइव हिन्दुस्तान, जयपुर
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स्वास्थ्य विभाग की बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने अधिकारियों से मौसमी बीमारियों की स्थिति और तैयारियों की जानकारी ली, स्वाइन फ्लू और चांदीपुरा वायरस को लेकर प्रदेश में सामने आए मामलों की जानकारी अधिकारियों की ओर से नहीं दिए जाने की बात सामने आई है।

दिल्ली में स्वाइन फ्लू, गुजरात में चांदीपुरा… राजस्थान में स्वास्थ्य विभाग कितना अलर्ट?
स्वास्थ्य विभाग की बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने अधिकारियों से मौसमी बीमारियों की स्थिति और तैयारियों की जानकारी ली। बैठक में डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार की स्थिति पर चर्चा हुई। वहीं, स्वाइन फ्लू और चांदीपुरा वायरस को लेकर प्रदेश में सामने आए मामलों की जानकारी अधिकारियों की ओर से नहीं दिए जाने की बात सामने आई है।

राजस्थान में मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने के बीच स्वाइन फ्लू और चांदीपुरा वायरस को लेकर स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। पड़ोसी राज्यों में वायरस के मामले सामने आने के बावजूद प्रदेश में इनसे जुड़े मामलों और मौतों की जानकारी चिकित्सा मंत्री की समीक्षा बैठक में अधिकारियों की ओर से साझा नहीं किए जाने का मामला सामने आया है। मंत्री ने बैठक में डेंगू, मलेरिया और मौसमी वायरल बुखार की स्थिति की जानकारी ली और अधिकारियों को हाई रिस्क क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए।

जानकारी के मुताबिक, पड़ोसी राज्य दिल्ली में स्वाइन फ्लू के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। मंगलवार को अकेले गौतम बुद्ध नगर में 120 स्वाइन फ्लू केस सामने आने की जानकारी है। राजस्थान में भी जयपुर में पांच, जबकि जोधपुर और उदयपुर में स्वाइन फ्लू के मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में प्रदेश में संक्रमण की निगरानी और रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता पर नजर है।

चांदीपुरा वायरस से राजस्थान में तीन बच्चों की मौत

चांदीपुरा वायरस को लेकर भी राजस्थान में चिंता बढ़ी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार डूंगरपुर के रतनपुरा-चौरासी, बांसवाड़ा और सिरोही में तीन बच्चों की 1 से 20 जुलाई के बीच मौत हुई थी। बताया गया है कि राजस्थान के आठ बच्चे चांदीपुरा वायरस की चपेट में आए, जिनमें तीन की मौत हो गई।

मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों के आठ गांवों से सैंपल लिए थे। सिरोही के सियावर गांव में दो साल की बच्ची की मौत के बाद 21 जुलाई को विभाग की ओर से अलर्ट भी जारी किया गया था। हालांकि, इन मौतों को लेकर विभागीय रिकॉर्ड और समीक्षा में स्थिति स्पष्ट नहीं होने से सवाल खड़े हो रहे हैं।

एक महीने बाद हुई मौसमी बीमारियों की समीक्षा

स्वास्थ्य विभाग की बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने अधिकारियों से मौसमी बीमारियों की स्थिति और तैयारियों की जानकारी ली। बैठक में डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार की स्थिति पर चर्चा हुई। वहीं, स्वाइन फ्लू और चांदीपुरा वायरस को लेकर प्रदेश में सामने आए मामलों की जानकारी अधिकारियों की ओर से नहीं दिए जाने की बात सामने आई है।

मंत्री ने अधिकारियों से पूछा कि मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए हाई रिस्क क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि वायरल, डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, स्क्रब टाइफस और स्वाइन फ्लू जैसे संक्रमणों से बचाव के लिए हाई रिस्क क्षेत्रों में टीमें गठित कर नियमित निगरानी जरूरी है।

मंत्री ने सभी संयुक्त निदेशकों और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) को प्रो-एक्टिव एप्रोच के साथ काम करने और विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।

रामदेवरा मेले में बढ़ेगी मेडिकल निगरानी

जैसलमेर में होने वाले बाबा रामदेव के रामदेवरा मेले को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग को विशेष तैयारी के निर्देश दिए गए हैं। मंत्री ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की मांग के अनुसार मेले में पर्याप्त चिकित्सा स्टाफ और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा है।

पिछले साल रामदेवरा मेले के दौरान जैसलमेर, बाड़मेर और आसपास के इलाकों में मलेरिया के मामले बड़ी संख्या में सामने आए थे। इस बार विभाग मेले के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं और बीमारी की निगरानी को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की तैयारी में है।

एक पद पर दो कर्मचारी होने पर मांगी रिपोर्ट

बैठक में स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों और नर्सेज के खाली पदों के साथ-साथ कर्मचारियों की तैनाती को लेकर भी मंत्री ने अधिकारियों से जवाब मांगा। उन्होंने पूछा कि प्रदेश में ऐसे कितने स्थान हैं, जहां एक ही पद पर दो-दो कर्मचारी कार्यरत हैं।

इस सवाल पर अधिकारियों के जवाब नहीं देने पर मंत्री ने सख्ती दिखाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में एक पद पर एक से अधिक कर्मचारी नहीं होने चाहिए। सभी संयुक्त निदेशकों को अपने-अपने क्षेत्रों की रिपोर्ट तैयार कर तीन दिन में भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

राजस्थान में बारिश के मौसम के बीच डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार के साथ स्वाइन फ्लू तथा चांदीपुरा वायरस की आशंका ने स्वास्थ्य विभाग के सामने चुनौती बढ़ा दी है। ऐसे में अब विभाग की निगरानी व्यवस्था और हाई रिस्क क्षेत्रों में उठाए जाने वाले कदम महत्वपूर्ण होंगे।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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