CM की सख्ती के बाद ट्रैफिक पुलिस में बड़ा फेरबदल; जयपुर में नया ट्रैफिक मॉडल लागू
राजधानी की सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक जाम और बिगड़ती यातायात व्यवस्था को लेकर आखिरकार बड़ा प्रशासनिक एक्शन सामने आया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की उच्चस्तरीय बैठक के बाद ट्रैफिक पुलिस में व्यापक फेरबदल किया गया है,

राजधानी की सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक जाम और बिगड़ती यातायात व्यवस्था को लेकर आखिरकार बड़ा प्रशासनिक एक्शन सामने आया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की उच्चस्तरीय बैठक के बाद ट्रैफिक पुलिस में व्यापक फेरबदल किया गया है, जिसने महकमे में हलचल मचा दी है। आदेश जारी होते ही कई अफसरों की पोस्टिंग बदली गई और पूरे सिस्टम को नए सिरे से व्यवस्थित करने की कोशिश शुरू हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में सीकर रोड पर हुए एक बड़े जाम ने सरकार को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। इस जाम में खुद डीजीपी राजीव शर्मा करीब डेढ़ घंटे तक फंसे रहे थे। यह घटना प्रशासन के लिए चेतावनी बन गई और इसके तुरंत बाद ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर उच्च स्तर पर मंथन शुरू हुआ।
जाम बना टर्निंग पॉइंट, अब बदला पूरा सिस्टम
मुख्यमंत्री की बैठक के बाद जो फैसला सामने आया, वह सिर्फ तबादलों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे ट्रैफिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अब जयपुर के चारों जिलों में 1-1 एडिशनल डीसीपी और 2-2 एसीपी तैनात किए गए हैं, ताकि हर जोन में निगरानी और नियंत्रण बेहतर हो सके।
नई व्यवस्था के तहत ट्रैफिक शाखा में अब एडिशनल कमिश्नर 1, डीसीपी 1, एडिशनल डीसीपी 4, एसीपी 8 और 15 इंस्पेक्टर तैनात किए गए हैं। यह संख्या पहले की तुलना में काफी अधिक है, जिससे स्पष्ट है कि सरकार इस बार कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
अफसरों की नई पोस्टिंग से मचा हलचल
गृह विभाग द्वारा जारी आदेश में कई अहम नामों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। हरि प्रसाद सोमानी को एडीसीपी नॉर्थ, समीर कुमार को वेस्ट और डॉ. हेमंत कुमार जाखड़ को ईस्ट जिले में तैनात किया गया है। ईस्ट में रानू शर्मा पहले से ही अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं।
वहीं, एडीसीपी सरिता बड़गुर्जर को ट्रैफिक से हटाकर नॉर्थ जिले के हैडक्वार्टर भेजा गया है, जिसे लेकर विभाग में कई तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं।
एसीपी स्तर पर भी बड़े बदलाव किए गए हैं। डीएसपी राजेंद्र कुमार रावत को नॉर्थ, कमल नयन मोयल को नॉर्थ सेकंड, रोहित चावला को वेस्ट, राजकुमार मीणा को वेस्ट सेकंड, प्रेम कुमार को साउथ सेकंड और मुकेश चौधरी को ईस्ट सेकंड की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, एसीपी किशोर भदौरिया को ट्रैफिक से हटाकर आरपीए भेजा गया है।
अब हर जिले में मजबूत ग्राउंड फोर्स
इस फेरबदल के साथ ही जमीनी स्तर पर भी बड़ा बदलाव किया गया है। इंस्पेक्टरों की संख्या 15 से बढ़ाकर 20 कर दी गई है और अब हर जिले में 5-5 इंस्पेक्टर तैनात होंगे। इसका मकसद साफ है—हर इलाके में बेहतर मॉनिटरिंग और त्वरित कार्रवाई।
सिर्फ इतना ही नहीं, 72 नई ट्रैफिक बीट बनाई गई हैं, ताकि बीट स्तर पर ट्रैफिक की स्थिति पर नजर रखी जा सके। इससे छोटे-छोटे जाम भी तुरंत कंट्रोल किए जा सकेंगे और समस्या बढ़ने से पहले ही हल निकाला जा सकेगा।
हाईटेक होगी ट्रैफिक मॉनिटरिंग
इस बार सरकार सिर्फ मैनपावर बढ़ाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि टेक्नोलॉजी का भी सहारा लिया जा रहा है। ट्रैफिक और जाम की निगरानी अब ड्रोन के जरिए की जाएगी। इससे रियल टाइम स्थिति का आकलन संभव होगा और जरूरत पड़ने पर तुरंत रूट डायवर्जन जैसे फैसले लिए जा सकेंगे।
इसके अलावा ट्रैफिक इंस्पेक्टरों को 20 विशेष डिजाइन की बाइक दी जाएंगी, जिससे वे तेजी से मौके पर पहुंच सकें। खास बात यह भी है कि ट्रैफिक इंस्पेक्टर्स की वर्दी में भी बदलाव किया जा रहा है, ताकि उनकी अलग पहचान बन सके और वे भीड़ में आसानी से नजर आएं।
क्या बदलेगी राजधानी की तस्वीर?
सरकार के इस बड़े एक्शन के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जयपुर की ट्रैफिक व्यवस्था में वाकई सुधार आएगा? क्योंकि इससे पहले भी कई योजनाएं बनीं, लेकिन जमीनी स्तर पर असर सीमित ही रहा।
हालांकि इस बार जिस तरह से उच्च स्तर पर सख्ती दिखाई गई है और पूरे सिस्टम को एक साथ बदला गया है, उससे उम्मीद जरूर जगी है कि आने वाले दिनों में राजधानी की सड़कों पर जाम से राहत मिल सकती है।
फिलहाल, जयपुर की जनता की नजरें अब इस नए ट्रैफिक मॉडल पर टिकी हैं—क्या यह बदलाव सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगा या सच में सड़कों पर भी नजर आएगा, इसका जवाब आने वाला वक्त ही देगा।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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