छिपाने के लिए कुछ नहीं; प्रसूता मौतों पर स्वास्थ्य मंत्री खींवसर ने दी सफाई
हाल ही में राजस्थान के कई सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत के मामलों ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इन घटनाओं के बाद राज्य सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में हाल के महीनों में प्रसूताओं की मौत के मामलों को लेकर उठे सवालों के बीच राज्य के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने सरकार का पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि पिछले दो महीनों में हुई मौतें बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण हैं, लेकिन यदि राष्ट्रीय और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के आधार पर देखा जाए तो राजस्थान अभी भी तय मानकों के भीतर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी तथ्य को छिपाने की कोशिश नहीं कर रही है और पूरे मामले की गहन जांच कराई जा रही है।
स्वास्थ्य मंत्री ने जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि राष्ट्रीय और WHO के मानकों के अनुसार प्रति एक लाख प्रसव (सामान्य और सिजेरियन दोनों) पर 87 तक मातृ मृत्यु को स्वीकार्य सीमा माना जाता है। राजस्थान का प्रदर्शन इसी दायरे में है। हालांकि उन्होंने माना कि पिछले दो महीनों में एक साथ कई मौतों की घटनाएं सामने आना बेहद गंभीर और चिंताजनक है।
एक महीने का औसत खराब रहा
खींवसर ने कहा कि यदि पूरे साल के आंकड़ों को देखा जाए तो कोटा में मातृ मृत्यु के मामलों में बढ़ोतरी नहीं हुई है, बल्कि पिछले वर्षों की तुलना में कमी आई है। उन्होंने कहा कि समस्या एक विशेष महीने में सामने आई, जब मौतों का औसत सामान्य से अधिक रहा। इसी कारण सरकार ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए समीक्षा शुरू कर दी है।
बांसवाड़ा में हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से समीक्षा
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि बांसवाड़ा में चार से पांच मामलों की जानकारी मिलने के बाद तत्काल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की गई। उन्होंने कहा कि सरकार हर जिले से विस्तृत रिपोर्ट ले रही है और किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी अस्पतालों पर सबसे ज्यादा दबाव
खींवसर ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में सबसे अधिक रेफरल मरीज आते हैं। कई बार निजी अस्पताल गंभीर और जटिल मरीजों को भर्ती करने से इनकार कर देते हैं, जिसके बाद उन्हें सरकारी अस्पतालों में भेजा जाता है। ऐसे मरीजों की स्थिति पहले से बेहद गंभीर होती है और कई बार वे जीवन-मृत्यु की स्थिति में अस्पताल पहुंचते हैं।
भीलवाड़ा और बांसवाड़ा जाएंगे स्वास्थ्य मंत्री
खींवसर ने बताया कि वह मंगलवार को भिलवाड़ा जाएंगे और वहां अधिकारियों तथा डॉक्टरों के साथ विस्तृत बैठक करेंगे। इसके अगले दिन वह बांसवाड़ा का दौरा करेंगे। दोनों जिलों में अस्पतालों की व्यवस्थाओं, इलाज की प्रक्रिया और मौतों के कारणों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम इन जिलों में पहुंच रही है ताकि हर पहलू की गहराई से जांच हो सके और यदि किसी स्तर पर कमी मिलती है तो उसे तत्काल दूर किया जाए।
AIIMS जोधपुर की टीम भी करेगी जांच
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए एम्स जोधपुर की टीम को भी निरीक्षण के लिए बुलाया गया है। उन्होंने बताया कि पहले भी एम्स को आमंत्रित किया गया था और जरूरत पड़ने पर दोबारा भी विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।
उन्होंने कहा, “हमारे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। जो वास्तविक स्थिति है, वही सामने आएगी। सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ जांच करा रही है और तथ्य जनता के सामने रखे जाएंगे।”
हाल ही में राजस्थान के कई सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत के मामलों ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इन घटनाओं के बाद राज्य सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं और अब स्वास्थ्य मंत्री स्वयं प्रभावित जिलों का दौरा कर पूरे मामले की समीक्षा करेंगे। सरकार का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक सुधारात्मक कदम भी उठाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों को हर मरीज का इलाज करना पड़ता है। ऐसे में सबसे कठिन, गंभीर और जटिल मामलों का इलाज भी सरकारी अस्पताल ही करते हैं। यही कारण है कि यहां चुनौती कहीं अधिक रहती है।
समय-समय पर ऐसे क्लस्टर बनते हैं
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कभी-कभी एक ही अवधि में कई मौतों के मामले सामने आ जाते हैं, जिन्हें मेडिकल भाषा में “क्लस्टर” के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार इन घटनाओं को हल्के में नहीं ले रही है और हर मामले की अलग-अलग जांच की जा रही है।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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