
B.Sc की फर्जी डिग्री से चयन कैसे हुआ? SOG जांच में फर्जी डिग्री और डमी कैंडिडेट की साजिश बेनकाब
राजस्थान की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा करने वाले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए बीएससी की नकली डिग्री उपलब्ध करवाने वाले आरोपी मांगीलाल मीणा को गिरफ्तार किया है।
राजस्थान की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा करने वाले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए बीएससी की नकली डिग्री उपलब्ध करवाने वाले आरोपी मांगीलाल मीणा को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर पटवारी भर्ती-2021 में डमी कैंडिडेट बैठाकर अभ्यर्थी को परीक्षा पास कराने और बाद में फर्जी डिग्री दिलवाकर नौकरी लगवाने का आरोप है। एसओजी इस पूरे मामले में गहन पूछताछ कर रही है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।
बीते कुछ समय से प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बूंदी जिले में एक आंतरिक कमेटी बनाई गई थी, जो पिछले पांच साल के अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच कर रही है। इसी दौरान समिति को बलराम मीणा नाम के अभ्यर्थी के दस्तावेज संदिग्ध लगे। आवेदन-पत्र पर लगी तस्वीर और वर्तमान में कार्यरत कर्मचारी की तस्वीर-हस्ताक्षर में स्पष्ट असमानता पाई गई। मामले में संदेह गहराने पर रिपोर्ट बनाकर SOG मुख्यालय भेजी गई, जहां वर्ष 2024 में FIR दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई।
एसओजी की जांच में सामने आया कि अभ्यर्थी बलराम मीणा ने पटवारी भर्ती परीक्षा-2021 में खुद की जगह डमी कैंडिडेट को परीक्षा देने के लिए भेजा था। डमी कैंडिडेट के रूप में उमेश कुमार चौधरी ने परीक्षा दी और उसे पास करवाया गया। दोनों को जोड़ने का काम मनफूल सिंह धायल नाम के व्यक्ति ने किया, जो इस पूरे फर्जीवाड़े में मिडलमैन की भूमिका निभा रहा था।
SOG ने कार्रवाई करते हुए डमी कैंडिडेट उमेश चौधरी और मिडिएटर मनफूल सिंह धायल को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। दोनों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि नौकरी का रास्ता साफ करने के लिए फर्जी बीएससी डिग्री का भी इस्तेमाल किया गया था।
दस्तावेज सत्यापन के दौरान बलराम मीणा की बीएससी डिग्री भी संदिग्ध पाई गई। जब उससे सख्ती से पूछताछ की गई तो उसने स्वीकार किया कि यह फर्जी डिग्री उसने मांगीलाल मीणा से प्राप्त की थी। जानकारी मिलने पर SOG ने कोटा जिले के शेरगढ़ खातोली निवासी मांगीलाल मीणा को दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया। मांगीलाल पर आरोप है कि वह फेक डिग्री बनवाने और उपलब्ध कराने के रैकेट से जुड़ा हुआ है, जो कई अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर उन्हें नकली दस्तावेज उपलब्ध करवाता था।
एडीजी (SOG) विशाल बंसल के अनुसार, प्रारंभिक जांच में इस बात की आशंका है कि आरोपी के पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा है, जो फर्जी डिग्री, डमी कैंडिडेट और भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी जैसे अपराधों में संलिप्त है। मांगीलाल मीणा से पूछताछ जारी है और SOG को उम्मीद है कि उससे महत्वपूर्ण सुराग मिलेंगे, जिनके आधार पर नेटवर्क के बाकी सदस्यों तक पहुंचा जा सकेगा।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि अब तक कितने अभ्यर्थियों को फर्जी डिग्री उपलब्ध करवाई गई, कितने लोगों ने डमी कैंडिडेट की मदद से परीक्षाएं पास की, और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन शामिल है। इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नियुक्तियों में फर्जीवाड़ा किस हद तक फैल चुका है और ऐसे रैकेट किस तरह सिस्टम को प्रभावित कर रहे हैं।
SOG की यह कार्रवाई प्रदेश में चल रहे ऐसे फर्जी नेटवर्क के खिलाफ एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होंगी तथा पूरा रैकेट उजागर होगा।

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