बीकानेर के PBM अस्पताल में तीसरी प्रसूता की मौत, राजस्थान में 19 पहुंचा मातृ मृत्यु का आंकड़ा
राजस्थान में पिछले तीन महीनों के दौरान हुई 19 मातृ मौतों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। इनमें सबसे अधिक 5 मौतें कोटा, 3 बीकानेर, 2 जोधपुर और 9 मौतें भीलवाड़ा व बांसवाड़ा में दर्ज की गई हैं।

राजस्थान में प्रसूताओं की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीकानेर के पीबीएम (PBM) अस्पताल में मंगलवार को 25 वर्षीय प्रसूता कमला मेघवाल की मौत हो गई। वह पिछले एक महीने से अधिक समय से पोस्ट-सीजेरियन (ऑपरेशन के बाद) जटिलताओं से जूझ रही थीं। इस मौत के साथ ही पिछले तीन महीनों में राजस्थान में मातृ मृत्यु का आंकड़ा बढ़कर 19 हो गया है। लगातार सामने आ रहे मामलों ने सरकारी अस्पतालों में प्रसूता महिलाओं की देखभाल, संक्रमण नियंत्रण और ऑपरेशन के बाद निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कमला मेघवाल को 8 जून को बीकानेर के पीबीएम अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। वह डायबिटीज की मरीज थीं और यह उनकी तीसरी गर्भावस्था थी। डॉक्टरों के अनुसार, पहले दो बच्चों का जन्म भी सीजेरियन ऑपरेशन से हुआ था, इसलिए इस बार भी सीजेरियन डिलीवरी करना चिकित्सकीय रूप से जरूरी था। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि ऑपरेशन सफल रहा और शुरुआत में मां और नवजात दोनों की हालत सामान्य थी।
हालांकि ऑपरेशन के अगले ही दिन, 9 जून को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। पेशाब आना बंद हो गया और किडनी से जुड़ी गंभीर समस्या के कारण उन्हें डायलिसिस पर रखना पड़ा। इलाज के दौरान कुछ समय के लिए उनकी हालत में सुधार भी देखा गया। पेशाब फिर से आने लगा और उन्हें वेंटिलेटर से भी हटा दिया गया। लेकिन बाद में सीजेरियन के टांकों से जुड़ी दूसरी सर्जरी करनी पड़ी। इसके बाद उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई और मल्टी ऑर्गन फेल्योर (एक साथ कई अंगों के काम करना बंद कर देने) के कारण मंगलवार को उनकी मौत हो गई। राहत की बात यह है कि उनका नवजात बच्चा पूरी तरह स्वस्थ बताया गया है।
पीबीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बी.सी. घिया ने बताया कि अस्पताल की मेडिकल टीम ने महिला को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। उन्होंने कहा कि डिलीवरी के बाद छह महिलाओं की हालत गंभीर हुई थी। इनमें से तीन महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि तीन अन्य को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
एक ही अस्पताल में तीसरी मौत, बढ़ी चिंता
कमला मेघवाल की मौत से पहले भी पीबीएम अस्पताल में दो प्रसूताओं की जान जा चुकी है। 19 जून को 20 वर्षीय प्रीति की पोस्ट डिलीवरी जटिलताओं के कारण मौत हुई थी। इसके दो दिन बाद 26 वर्षीय शारदा की किडनी फेल होने और कई बार डायलिसिस के बावजूद जान नहीं बचाई जा सकी। अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक तीनों महिलाओं में एक समान लक्षण दिखाई दिए थे। ऑपरेशन के 24 घंटे के भीतर पेशाब बंद होना और उसके बाद तेजी से स्वास्थ्य बिगड़ना सबसे बड़ी समानता रही।
तीन महीने में 19 मातृ मौतें, कई जिलों में चिंता
राजस्थान में पिछले तीन महीनों के दौरान हुई 19 मातृ मौतों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। इनमें सबसे अधिक 5 मौतें कोटा, 3 बीकानेर, 2 जोधपुर और 9 मौतें भीलवाड़ा व बांसवाड़ा में दर्ज की गई हैं। लगातार सामने आ रहे मामलों के कारण सरकारी अस्पतालों में प्रसूता महिलाओं के इलाज की गुणवत्ता, संक्रमण नियंत्रण, डायलिसिस और आईसीयू प्रबंधन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
इन मामलों के बाद राज्य सरकार ने जांच भी शुरू कर दी है। विशेषज्ञ समितियां अलग-अलग अस्पतालों में जाकर इलाज की प्रक्रिया, ऑपरेशन के बाद देखभाल और मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री की समीक्षा कर रही हैं, ताकि मौतों के पीछे की वास्तविक वजह सामने लाई जा सके।
सरकार का बड़ा फैसला, आज से चलेगा विशेष अभियान
लगातार बढ़ती मातृ मृत्यु की घटनाओं के बीच राजस्थान सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने घोषणा की है कि 15 जुलाई से पूरे प्रदेश में पांच दिवसीय विशेष स्क्रीनिंग अभियान शुरू किया जाएगा।
इस अभियान के तहत सभी गर्भवती महिलाओं की व्यापक स्वास्थ्य जांच की जाएगी। उनका ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, हीमोग्लोबिन सहित अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मानकों की जांच होगी। साथ ही प्रत्येक गर्भवती महिला के एंटीनाटल चेकअप (ANC) का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, ताकि समय रहते किसी भी जटिलता की पहचान कर उपचार किया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यदि गर्भावस्था के दौरान जोखिम वाली महिलाओं की समय पर पहचान हो जाए तो मातृ मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। इसी उद्देश्य से यह राज्यव्यापी अभियान शुरू किया जा रहा है।
राजस्थान में लगातार बढ़ रही प्रसूताओं की मौतें अब केवल चिकित्सा व्यवस्था का नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का बड़ा मुद्दा बन चुकी हैं। ऐसे में सरकार की जांच, अस्पतालों की जवाबदेही और स्क्रीनिंग अभियान के नतीजों पर पूरे प्रदेश की नजर रहेगी।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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