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बाड़मेर–बालोतरा सीमाओं में फेरबदल पर सियासी संग्राम, कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने; बदलेगा क्या?

बाड़मेर–बालोतरा सीमाओं में फेरबदल पर सियासी संग्राम, कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने; बदलेगा क्या?

संक्षेप:

पश्चिमी राजस्थान में एक बार फिर जिलों की सीमाओं को लेकर सियासत गरमा गई है। बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में किए गए ताजा फेरबदल ने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। 

Jan 05, 2026 03:15 pm ISTSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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पश्चिमी राजस्थान में एक बार फिर जिलों की सीमाओं को लेकर सियासत गरमा गई है। बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में किए गए ताजा फेरबदल ने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस और भाजपा इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं, जबकि स्थानीय स्तर पर विरोध और समर्थन की आवाजें तेज होती जा रही हैं। सवाल यह है कि यह बदलाव केवल प्रशासनिक है या इसके पीछे गहरी राजनीतिक रणनीति छिपी है?

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भजनलाल शर्मा सरकार ने 31 दिसंबर 2025 को एक अहम आदेश जारी करते हुए बाड़मेर और बालोतरा जिलों की तहसीलों में बड़ा बदलाव किया। आदेश के अनुसार, गुड़ामालानी और धोरीमना तहसीलों को बाड़मेर जिले से हटाकर बालोतरा जिले में शामिल किया गया है, जबकि बायतु तहसील को बालोतरा से अलग कर वापस बाड़मेर जिले में जोड़ दिया गया है। इस फैसले को पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के वर्ष 2023 के निर्णय को पलटने के तौर पर देखा जा रहा है।

दरअसल, 2023 में कांग्रेस सरकार ने बालोतरा को नया जिला बनाया था। उस समय बायतु तहसील को बालोतरा में शामिल किया गया था, जबकि गुड़ामालानी और धोरीमना को बाड़मेर जिले में ही रखा गया था। अब नए परिसीमन से क्षेत्रीय संतुलन के साथ-साथ राजनीतिक समीकरणों में भी बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

इस फैसले के बाद कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने धोरीमना उपखंड मुख्यालय पर धरना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यह फैसला स्थानीय लोगों की भावनाओं और सुविधाओं के साथ सीधा खिलवाड़ है। हेमाराम चौधरी के अनुसार, बिना जनभावनाओं को समझे लिया गया यह निर्णय लोगों की रोजमर्रा की परेशानियां बढ़ाएगा।

कांग्रेस के मध्य प्रदेश प्रभारी और बायतु विधायक हरीश चौधरी, सांसद उम्मीद राम बेनीवाल समेत कई वरिष्ठ नेता इस मुद्दे पर एकजुट नजर आ रहे हैं। कांग्रेस का तर्क है कि गुड़ामालानी और धोरीमना को बालोतरा जिले में शामिल किए जाने से आमजन को प्रशासनिक कार्यों के लिए ज्यादा दूरी तय करनी पड़ेगी। पहले से ही संसाधनों की कमी झेल रहे रेगिस्तानी इलाकों में यह फैसला लोगों की समस्याओं को और बढ़ाएगा।

हरीश चौधरी ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो यह पूरी तरह जनविरोधी साबित होगा और आंदोलन को और तेज किया जाएगा। कांग्रेस का आरोप है कि यह बदलाव पूरी तरह राजनीतिक लाभ को ध्यान में रखकर किया गया है।

वहीं भाजपा ने कांग्रेस के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। भाजपा उपाध्यक्ष रमेश सिंह इंदा का कहना है कि यह परिसीमन प्रशासनिक संतुलन और क्षेत्रीय समानता को ध्यान में रखकर किया गया है। उनके अनुसार, आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले सभी क्षेत्रों और वर्गों की समान भागीदारी सुनिश्चित करना सरकार का उद्देश्य है। भाजपा का दावा है कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक हार से बौखलाकर इस फैसले का विरोध कर रही है।

भाजपा नेताओं का यह भी कहना है कि आम जनता इस बदलाव से संतुष्ट है और कांग्रेस के अलावा कोई व्यापक जनविरोध सामने नहीं आया है। पार्टी का तर्क है कि नए परिसीमन से प्रशासनिक कामकाज में सुविधा होगी और विकास योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव हो सकेगा।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिलों की सीमाओं में बदलाव केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं होता, बल्कि इसके साथ जातीय, सामाजिक और राजनीतिक समीकरण भी जुड़े होते हैं। बाड़मेर और बालोतरा जैसे इलाकों में पानी, बिजली और सड़क पहले से ही बड़े मुद्दे हैं। अब जिला मुख्यालय की दूरी बढ़ने या घटने से लोगों की पहुंच पर सीधा असर पड़ेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला 2028 के लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जबकि कांग्रेस इसे अपनी सियासी एकजुटता और जनभावनाओं के साथ खड़े होने का अवसर मान रही है। फिलहाल धरना-प्रदर्शन और बयानबाजी का दौर जारी है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार करती है या बाड़मेर–बालोतरा की यह सियासी जंग आने वाले दिनों में और तेज होती है।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma
इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में पिछले 5 साल का अनुभव है। लाइव हिंदुस्तान से पहले, जी राजस्थान, महानगर टाइम्समें सेवा दे चुके हैं। राजस्थान विश्विद्यालय से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की है। गुलाबी नगरी जयपुर में ही जन्म हुआ। राजस्थान की राजनीति और समृद्ध कला, संस्कृति पर लिखना पसंद है। और पढ़ें

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