ऐसी मूर्खता...मजाक बना रखा है,2 साल VS 5 साल की बहस बेतुक; विधानसभा में गरजे अशोक गहलोत

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राजस्थान विधानसभा के मौजूदा सत्र में ‘2 साल बनाम 5 साल’ की चर्चा को लेकर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि आजादी के बाद से अब तक किसी भी सरकार ने इस तरह की “मूर्खतापूर्ण” बहस नहीं कराई। 

ऐसी मूर्खता...मजाक बना रखा है,2 साल VS 5 साल की बहस बेतुक; विधानसभा में गरजे अशोक गहलोत

जयपुर। राजस्थान विधानसभा के मौजूदा सत्र में ‘2 साल बनाम 5 साल’ की चर्चा को लेकर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि आजादी के बाद से अब तक किसी भी सरकार ने इस तरह की “मूर्खतापूर्ण” बहस नहीं कराई। उन्होंने कहा कि यह चर्चा न केवल बेतुकी है, बल्कि लोकतांत्रिक परंपराओं के भी खिलाफ है।

सोमवार को विधानसभा में मीडिया से बातचीत करते हुए गहलोत ने कहा कि पहले सरकार ने ‘2 साल बनाम 5 साल’ की चर्चा पर सहमति जताई, लेकिन बाद में कहा कि वह प्रतिवेदन पर चर्चा करेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि न तो केंद्र में और न ही किसी राज्य में इस तरह की तुलना को लेकर सदन में बहस हुई है। उनके मुताबिक, भाजपा सरकार को अपने दो साल के कार्यकाल की वास्तविक स्थिति पर चर्चा करनी चाहिए और जनता के बीच जाकर फीडबैक लेना चाहिए।

“हमारे कार्यों का श्रेय ले रही सरकार”

गहलोत ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार जिन विकास कार्यों और योजनाओं के आंकड़े पेश कर रही है, उनमें से अधिकांश योजनाएं कांग्रेस सरकार के समय स्वीकृत और शुरू की गई थीं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने कई योजनाओं की वित्तीय स्वीकृति जारी की, टेंडर प्रक्रिया पूरी करवाई और काम शुरू करवाया। अब उन्हीं कार्यों को वर्तमान सरकार अपने खाते में जोड़कर पेश कर रही है।

उन्होंने दावा किया कि कई योजनाएं पूरी होकर तैयार हैं, लेकिन उन्हें शुरू नहीं किया जा रहा। वहीं कुछ कार्य अधूरे पड़े हैं, जिनका लाभ जनता और युवाओं को मिल सकता था। गहलोत ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने प्रदेश में कोचिंग हब विकसित किया था, जिसे आगे बढ़ाने की बजाय ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

लोकतंत्र को लेकर जताई चिंता

प्रधानमंत्री Narendra Modi के ‘विपक्ष मुक्त भारत’ वाले बयान पर पलटवार करते हुए गहलोत ने कहा कि देश किस दिशा में जा रहा है, यह चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाएं—चुनाव आयोग, न्यायपालिका और ब्यूरोक्रेसी—दबाव में काम कर रही हैं।

गहलोत ने कहा कि पहले ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ की बात की जाती थी, अब ‘विपक्ष मुक्त भारत’ की। अगर देश में विपक्ष ही नहीं रहेगा तो लोकतंत्र का क्या अर्थ रह जाएगा। उन्होंने संसद में गतिरोध के अपने कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि 18 दिन तक सदन नहीं चला था, लेकिन तब विपक्षी सांसदों को निलंबित नहीं किया गया। संवाद और सहमति से समाधान निकाला गया।

राहुल गांधी पर बयान को बताया खतरनाक

संसदीय कार्य मंत्री रिजिजू द्वारा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को “राष्ट्र के लिए खतरा” बताए जाने पर भी गहलोत ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान समाज में गलत संदेश देते हैं और उकसावे का माहौल बनाते हैं।

गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी के परिवार ने देश के लिए बलिदान दिए हैं। उन्होंने Jawaharlal Nehru, Indira Gandhi और Rajiv Gandhi का उल्लेख करते हुए कहा कि इन नेताओं ने देश के लिए अपना सब कुछ समर्पित किया।

गृह विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा नहीं

पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार पर गृह विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा नहीं कराने का आरोप लगाया। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि प्रतिपक्ष चर्चा चाहता है, लेकिन सरकार इससे बच रही है। गहलोत के अनुसार, प्रदेश में दो साल के भीतर 13 हजार से अधिक दुष्कर्म की घटनाएं दर्ज हुई हैं और कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है।

उन्होंने कहा कि सदन में चर्चा होने से सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से सुझाव मिलते हैं, जिससे सुशासन की दिशा में कदम बढ़ाए जा सकते हैं।

ओम बिरला के व्यवहार पर भी टिप्पणी

लोकसभा अध्यक्ष Om Birla के व्यवहार को लेकर भी गहलोत ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राजस्थान की राजनीति में पक्ष-विपक्ष के बीच संवाद और स्वस्थ परंपरा रही है, जिसे बनाए रखना जरूरी है।

गहलोत ने अंत में कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और जनता की समस्याओं के समाधान के लिए सदन में गंभीर और सार्थक चर्चा होनी चाहिए, न कि राजनीतिक तुलना और बयानबाजी।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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