बोलते कुछ मतलब कुछ, राजस्थान विधानसभा में गहलोत पर टिप्पणी से मचा हंगामा;BJP MLA ने कसा तंज
राजस्थान विधानसभा में बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की अनुदान मांगों पर चल रही चर्चा के दौरान अचानक सियासी पारा चढ़ गया। भाजपा विधायक संदीप शर्मा द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर बिना नाम लिए की गई टिप्पणी को लेकर विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।

राजस्थान विधानसभा में बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की अनुदान मांगों पर चल रही चर्चा के दौरान अचानक सियासी पारा चढ़ गया। भाजपा विधायक संदीप शर्मा द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर बिना नाम लिए की गई टिप्पणी को लेकर विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। देखते ही देखते सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई और कुछ समय के लिए हंगामे की स्थिति बन गई।
दरअसल, स्वास्थ्य विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान विधायक संदीप शर्मा ने नेता प्रतिपक्ष की ओर से पूर्व में मुख्यमंत्री को लेकर दिए गए कथित बयानों का जिक्र करते हुए पलटवार किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने कभी विपक्ष के मुख्यमंत्री पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की और राजनीतिक मर्यादा का पालन किया है। हालांकि उनकी टिप्पणी को विपक्ष ने पूर्व मुख्यमंत्री की ओर इशारा मानते हुए आपत्ति जताई।
गहलोत पर टिप्पणी से विपक्ष नाराज
संदीप शर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा, “हमने कभी व्यक्तिगत टिप्पणी की परंपरा नहीं अपनाई। राजनीति में मर्यादा बनी रहनी चाहिए। कुछ नेताओं की भाषा ऐसी होती है जिसे समझना भी मुश्किल हो जाता है, लेकिन इसके बावजूद हमने संयम रखा है।” उनके इस बयान को विपक्ष ने पूर्व मुख्यमंत्री पर परोक्ष टिप्पणी बताया और तुरंत विरोध शुरू कर दिया।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए कहा कि जिस सदस्य के संदर्भ में टिप्पणी की जा रही है, वह सदन में मौजूद नहीं हैं। ऐसे में गैरमौजूद व्यक्ति पर टिप्पणी करना नियमों और परंपराओं के खिलाफ है। जूली ने मांग की कि ऐसी टिप्पणी को कार्यवाही से हटाया जाए।
जूली ने कहा, “यदि किसी को कोई बात कहनी है तो संबंधित व्यक्ति की मौजूदगी में कही जानी चाहिए। गैरहाजिर सदस्य पर टिप्पणी करना सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं है।” उनके बयान के बाद विपक्षी सदस्यों ने मेज थपथपाकर समर्थन जताया।
तीखी बहस में बदला माहौल
आपत्ति के जवाब में संदीप शर्मा ने कहा कि वे कोई गलत या अभद्र टिप्पणी नहीं कर रहे हैं, बल्कि केवल पूर्व में दिए गए बयानों का संदर्भ दे रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पूर्व मुख्यमंत्री का सम्मान करते हैं और व्यक्तिगत टिप्पणी से हमेशा बचते रहे हैं। साथ ही उन्होंने विपक्ष से भी ऐसी ही राजनीतिक मर्यादा की अपेक्षा जताई।
इस दौरान सत्ता पक्ष के कुछ मंत्री और विधायक भी संदीप शर्मा के समर्थन में खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष तीखी भाषा का प्रयोग करेगा तो उसका जवाब भी दिया जाएगा। इससे सदन का माहौल और अधिक गरमा गया। सत्ता और विपक्ष के सदस्य आमने-सामने आ गए और कुछ समय के लिए चर्चा का मूल विषय पीछे छूट गया।
विपक्ष की ओर से लगातार आपत्ति जताए जाने और सत्ता पक्ष की ओर से जवाबी टिप्पणियों के चलते सदन में शोर-शराबा बढ़ गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सभापति को हस्तक्षेप करना पड़ा।
सभापति का हस्तक्षेप, स्थिति सामान्य
सदन में बढ़ती नोकझोंक को देखते हुए सभापति ने दोनों पक्षों को संयम बरतने की नसीहत दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि चर्चा स्वास्थ्य विभाग की अनुदान मांगों पर केंद्रित रहे और व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचा जाए। सभापति ने यह भी कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है।
सभापति के हस्तक्षेप के बाद धीरे-धीरे माहौल शांत हुआ और दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी सीटों पर बैठकर चर्चा को आगे बढ़ाया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग से जुड़े मुद्दों पर बहस दोबारा शुरू हुई।
हालांकि इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि विधानसभा में राजनीतिक तल्खी किस तरह अचानक तेज हो सकती है। व्यक्तिगत टिप्पणियों और भाषा की मर्यादा को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बनना नई बात नहीं है, लेकिन इस तरह की नोकझोंक से सदन की कार्यवाही प्रभावित होती है।
बुधवार की यह घटना भी इसी राजनीतिक तनाव का उदाहरण रही, जहां स्वास्थ्य जैसे अहम विषय पर चर्चा के बीच सियासी तकरार हावी होती दिखी। फिलहाल कार्यवाही आगे बढ़ गई, लेकिन सदन में उठे इस विवाद ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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