हमारी सरकार होटलों में तुम्हारे कुकर्मों से रही थी; BJP बीजेप नेताओं पर जमकर गरजे गहलोत
राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर ‘मानेसर कांड’ सुर्खियों में है, लेकिन इस बार मामला और ज्यादा तीखा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने ताजा बयान में न सिर्फ पुराने घटनाक्रम को याद किया, बल्कि बेहद सख्त शब्दों में भाजपा पर हमला बोला।

राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर ‘मानेसर कांड’ सुर्खियों में है, लेकिन इस बार मामला और ज्यादा तीखा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने ताजा बयान में न सिर्फ पुराने घटनाक्रम को याद किया, बल्कि बेहद सख्त शब्दों में भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने मंच से साफ कहा हमारी सरकार होटलों में तुम्हारे कुकर्मों से रही थी इस एक वाक्य ने पूरे राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है।
मंच से सीधा हमला, बिना लाग-लपेट के आरोप
डीडवाना में अंबेडकर जयंती कार्यक्रम के दौरान गहलोत ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी सरकार गिराने के लिए एक सोची-समझी साजिश रची गई थी।
गहलोत ने कहा कि कांग्रेस के विधायकों को बहकाकर हरियाणा के मानेसर ले जाया गया और सरकार को अस्थिर करने की पूरी कोशिश की गई। उन्होंने इसे लोकतंत्र के खिलाफ साजिश बताते हुए कहा कि उस दौर में राजनीतिक मर्यादाएं पूरी तरह टूट गई थीं।
34 दिन होटल में रहना पड़ा, ये मजबूरी थी
पूर्व मुख्यमंत्री ने उस समय की परिस्थितियों को याद करते हुए कहा कि उनकी सरकार को बचाने के लिए 34 दिनों तक होटलों में रहना पड़ा। उन्होंने साफ किया कि यह कोई राजनीतिक स्टंट नहीं, बल्कि मजबूरी थी।
उन्होंने कहा, आज हमें ‘होटलों की सरकार’ कहा जाता है, लेकिन सच्चाई ये है कि हमें वहां रहने के लिए मजबूर किया गया। अगर हम ऐसा नहीं करते, तो लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार गिरा दी जाती।”
भाजपा पर ‘कुकर्मों’ का आरोप, बयान से बढ़ी तल्खी
गहलोत का सबसे तीखा हमला उस वक्त सामने आया, जब उन्होंने सीधे तौर पर कहा“हमारी सरकार होटलों में तुम्हारे कुकर्मों से रही थी।” इस बयान ने सियासी बयानबाजी को एक नया मोड़ दे दिया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने उनकी सरकार गिराने के लिए बड़े पैमाने पर धनबल और दबाव का इस्तेमाल किया। गहलोत ने अन्य राज्यों का जिक्र करते हुए कहा कि इसी तरह की रणनीति अपनाकर कई जगहों पर सरकारें बदली गईं।
“राजस्थान में नहीं चली चाल”
गहलोत ने दावा किया कि तमाम कोशिशों के बावजूद राजस्थान में भाजपा की रणनीति कामयाब नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि इसकी सबसे बड़ी वजह विधायकों की एकजुटता और जनता का समर्थन था।
उन्होंने खास तौर पर कुछ विधायकों की तारीफ करते हुए कहा कि संकट के समय उन्होंने समझदारी दिखाई और पार्टी के साथ खड़े रहे, जिससे सरकार बच पाई।
सियासी टाइमिंग पर उठे सवाल
गहलोत का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब कांग्रेस के भीतर एकजुटता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट की मौजूदगी के बीच इस तरह का बयान कई राजनीतिक संकेत दे रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान सिर्फ भाजपा पर हमला नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर भी एक संदेश देने की कोशिश हो सकता है।
आगे क्या? बढ़ेगा सियासी घमासान
गहलोत के इस बयान के बाद भाजपा की प्रतिक्रिया आना तय माना जा रहा है। वहीं कांग्रेस के भीतर भी इस बयान को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
फिलहाल इतना तय है कि ‘मानेसर कांड’ का मुद्दा एक बार फिर राजस्थान की राजनीति में गर्मी बढ़ाने वाला है। गहलोत के तीखे तेवर यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में सियासी बयानबाजी और तेज हो सकती है।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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