
जयपुर की सांसों पर पहरा, अरावली बचाने मशाल लेकर सड़कों पर उतरी Gen-Z; नोट उड़ाकर जताया विरोध
राजस्थान की राजधानी जयपुर की आबोहवा और आने वाली पीढ़ियों के हक को सुरक्षित करने के लिए बुधवार रात गुलाबी नगरी की सड़कों पर युवाओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
राजस्थान की राजधानी जयपुर की आबोहवा और आने वाली पीढ़ियों के हक को सुरक्षित करने के लिए बुधवार रात गुलाबी नगरी की सड़कों पर युवाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। अरावली पर्वतमाला को खनन और अंधाधुंध विकास की भेंट चढ़ने से बचाने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में 'Gen-Z' (युवा पीढ़ी) ने मशाल जुलूस निकाला। यह विरोध प्रदर्शन न केवल सरकार की नीतियों के खिलाफ था, बल्कि उन फैसलों के खिलाफ एक खुली चेतावनी भी थी जो प्रकृति की कीमत पर लिए जा रहे हैं।
बुधवार रात रामबाग सर्किल से शुरू हुआ यह मशाल जुलूस अमर जवान ज्योति तक निकाला गया। हाथों में जलती मशालें और आंखों में भविष्य को लेकर चिंता लिए इन युवाओं ने पूरे रास्ते सरकार विरोधी नारेबाजी की। प्रदर्शन का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा तब दिखा जब युवाओं ने हवा में नकली नोटों की गड्डियां उड़ाईं। युवाओं का यह प्रतीकात्मक विरोध यह संदेश देने के लिए था कि "पैसा और राजस्व" कभी भी इंसानी सांसों और प्रकृति की जगह नहीं ले सकते। इस दौरान युवाओं ने सरकारी आदेशों की प्रतियों को भी आग के हवाले कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे युवा कार्यकर्ता कार्तिकेय भारद्वाज ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जयपुर का युवा अब जागरूक हो चुका है और अपने अधिकारों को पहचानता है। उन्होंने आरोप लगाया कि "ढोल का बाग" जैसे हरित क्षेत्रों को पहले ही उजाड़ा जा चुका है और अब भू-माफियाओं और गलत नीतियों की नजर अरावली पर्वतमाला पर है।
कार्तिकेय ने कड़े शब्दों में कहा, "अरावली सिर्फ पत्थरों का ढेर या पहाड़ नहीं है, यह जयपुर की लाइफलाइन है। प्रदूषण और खनन के नाम पर हमारे परिवारों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अगर अरावली को नुकसान पहुँचा, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। यह हमला सीधे तौर पर हमारे स्वच्छ हवा में सांस लेने के संवैधानिक अधिकार पर है।
जुलूस में शामिल पर्यावरण विशेषज्ञों और छात्रों ने बताया कि अरावली पर्वतमाला जयपुर के लिए एक 'कवच' की तरह काम करती है। यह न केवल थार मरुस्थल के विस्तार को रोकती है, बल्कि शहर के भूजल स्तर (Groundwater level) को बनाए रखने और तापमान को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। विकास के नाम पर पहाड़ियों की कटाई से जयपुर में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुँच सकता है और भविष्य में पानी का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि यह मशाल जुलूस तो महज एक शुरुआत है। यदि सरकार ने अरावली क्षेत्र में खनन गतिविधियों को तुरंत नहीं रोका और इसे 'इको-सेंसिटिव जोन' के रूप में पूरी तरह सुरक्षित नहीं किया, तो यह आंदोलन केवल जयपुर तक सीमित नहीं रहेगा। युवाओं ने संकल्प लिया कि वे अपनी 'सांसों' के लिए इस लड़ाई को गांव-गांव और घर-घर तक लेकर जाएंगे।

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Sachin Sharmaलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




