कौन जीतेगा अंता का ताज? बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने, निर्दलीय ने बढ़ाई टेंशन
राजस्थान के बारा जिले की अंता विधानसभा सीट पर उपचुनाव अब दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। नामांकन वापसी की अंतिम तारीख बीत जाने के बाद अब मैदान में कुल 15 प्रत्याशी डटे हुए हैं।
राजस्थान के बारा जिले की अंता विधानसभा सीट पर उपचुनाव अब दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। नामांकन वापसी की अंतिम तारीख बीत जाने के बाद अब मैदान में कुल 15 प्रत्याशी डटे हुए हैं। इस मुकाबले में बीजेपी, कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा के बीच त्रिकोणीय संघर्ष बनने के आसार हैं।

बीजेपी ने इस बार मोरपाल सुमन पर दांव लगाया है, जबकि कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता प्रमोद जैन भाया को मैदान में उतारा है। वहीं, कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे नरेश मीणा ने मुकाबले को और रोमांचक बना दिया है।
नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होते-होते बीजेपी को बड़ी राहत मिली है। पूर्व विधायक रामपाल मेघवाल, जो पार्टी से नाराज़ होकर निर्दलीय मैदान में उतर गए थे, उन्होंने आखिरकार बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ से मुलाकात के बाद नामांकन वापस ले लिया। रामपाल मेघवाल और संतोष सुमन दोनों ने ही बीजेपी प्रत्याशी मोरपाल सुमन के समर्थन का ऐलान किया है।
इनके अलावा अभय दास जांगीड़, सुनीता मीणा और नरोत्तम पारिक ने भी नामांकन वापस ले लिया है। इस तरह पार्टी के भीतर की नाराज़गी काफी हद तक शांत होती दिख रही है।
अंता उपचुनाव में कुल 15 प्रत्याशी हैं—
1. मोरपाल सुमन – भारतीय जनता पार्टी
2. प्रमोद जैन भाया – कांग्रेस
3. योगेश कुमार शर्मा – राइट टू विकास पार्टी
4. राजपाल सिंह शेखावत – परिवर्तन पार्टी
5. नरेश कुमार मीणा – निर्दलीय
6. जमील अहमद, दिलदार, धरमवीर, नौशाद, पंकज कुमार, पुखराज सोनेल, बंशीलाल, बिलाल खान, मंजूर आलम – सभी निर्दलीय उम्मीदवार
अंता उपचुनाव में इस बार मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच है, लेकिन निर्दलीय नरेश मीणा ने समीकरणों में हलचल मचा दी है। नरेश मीणा पहले कांग्रेस से जुड़े रहे हैं और पार्टी के बागी माने जाते हैं। वे क्षेत्र में मीणा-धाकड़ और युवा मतदाताओं के बीच अच्छी पकड़ रखते हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नरेश मीणा अगर कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगाने में कामयाब हुए, तो इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल सकता है।
कांग्रेस ने इस सीट पर अपने वरिष्ठ नेता प्रमोद जैन भाया को टिकट दिया है। हाड़ौती क्षेत्र में भाया की मजबूत पकड़ और संगठनात्मक अनुभव उन्हें एक सशक्त उम्मीदवार बनाता है। पार्टी को उम्मीद है कि भाया के नेतृत्व और स्थानीय विकास के वादों के दम पर वह यह सीट बरकरार रख पाएगी।
बीजेपी ने इस उपचुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है। प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के अनुसार, “मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पार्टी ने बूथ स्तर तक माइक्रो मैनेजमेंट की रणनीति बना ली है। हर क्षेत्र में निगरानी टीमें तैनात की गई हैं और स्थानीय नेताओं से तालमेल बढ़ाया गया है। पार्टी को भरोसा है कि बागियों की वापसी और संगठन की एकजुटता उसे जीत की राह पर आगे ले जाएगी।
अंता सीट का यह उपचुनाव अब सिर्फ दो दलों की लड़ाई नहीं रह गया है। जहां एक ओर कांग्रेस और बीजेपी अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ मजबूती से डटी हैं, वहीं नरेश मीणा ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता का भरोसा किस पर टिकता है भरोसेमंद भाया, मजबूत मोरपाल, या बागी नरेश मीणा पर।

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Sachin Sharmaलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




