अमेरिका-चीन को टक्कर देने की तैयारी, जयपुर में बनेंगे हाईटेक इंडस्ट्रियल रोबोट

हिन्दुस्तान टाइम्स, जयपुर
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रिसर्च सेंटर में विकसित होने वाले रोबोट अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन विजन, 3D मैपिंग, स्मार्ट सेंसर और ऑटोमेटेड नेविगेशन सिस्टम से लैस होंगे।

अमेरिका-चीन को टक्कर देने की तैयारी, जयपुर में बनेंगे हाईटेक इंडस्ट्रियल रोबोट

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमेशन और इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स के क्षेत्र में भारत ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में देश के पहले एडवांस्ड पेट्रोबोट रोबोटिक रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर (RRDC) का उद्घाटन शनिवार को गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने किया। इस सेंटर को ‘राइजिंग राजस्थान’ पहल के तहत स्थापित किया गया है। यहां ऐसे अत्याधुनिक स्वदेशी रोबोट विकसित किए जाएंगे, जो तेल-गैस रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल प्लांट, पावर हाउस और अन्य खतरनाक औद्योगिक क्षेत्रों में इंसानों की जगह काम कर सकेंगे।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है और राजस्थान सरकार भी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में विकसित राजस्थान के विजन को तेजी से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि ‘राइजिंग राजस्थान’ केवल निवेश आकर्षित करने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि नई तकनीक, नवाचार और रोजगार सृजन का मजबूत माध्यम बन रहा है। जयपुर में स्थापित यह रोबोटिक रिसर्च सेंटर उसी सोच का परिणाम है।

बेढ़म ने कहा कि विकसित भारत और विकसित राजस्थान का सपना तभी साकार होगा, जब सरकार, उद्योग और समाज मिलकर काम करेंगे। उन्होंने पेट्रोबोट के संस्थापक सहाब सिंह गुर्जर की सराहना करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति का मूल्य उसके कद से नहीं, बल्कि उसकी सोच और काम से तय होता है। उन्होंने सहाब सिंह को अपने क्षेत्र का “अब्दुल कलाम” बताते हुए कहा कि ऐसे युवा देश को नई तकनीकी ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं।

10-12 करोड़ के निवेश से तैयार हुआ सेंटर

पेट्रोबोट के फाउंडर सहाब सिंह ने बताया कि कंपनी ने ‘राइजिंग राजस्थान’ के तहत राज्य सरकार के साथ एमओयू किया था। इसके तहत करीब 10 से 12 करोड़ रुपये का निवेश और 50 लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया था। अब यह एडवांस्ड रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर पूरी तरह तैयार हो चुका है। उन्होंने बताया कि यह केवल रिसर्च लैब नहीं, बल्कि डिजाइन, डेवलपमेंट, टेस्टिंग और मैन्युफैक्चरिंग का एकीकृत केंद्र होगा, जहां पूरी तरह स्वदेशी इंडस्ट्रियल रोबोट विकसित किए जाएंगे।

खतरनाक जगहों पर इंसानों की जगह करेंगे काम

सहाब सिंह के अनुसार इस सेंटर में विकसित होने वाले रोबोट उन औद्योगिक क्षेत्रों में काम करेंगे, जहां इंसानों के लिए जाना बेहद जोखिम भरा होता है। तेल और गैस के कुओं, बड़ी ऑयल रिफाइनरियों, पेट्रोकेमिकल प्लांट, स्टील फैक्ट्रियों और पावर हाउस के भीतर कई ऐसे टैंक और हिस्से होते हैं, जहां जहरीली गैस, अत्यधिक तापमान, रेडिएशन या ऑक्सीजन की कमी के कारण काम करना जानलेवा साबित हो सकता है।

उन्होंने बताया कि एआई, एडवांस्ड सेंसर और हाई-प्रिसिजन स्कैनिंग तकनीक से लैस ये रोबोट बिना किसी मानवीय जोखिम के ऐसी जगहों की जांच करेंगे। इससे समय रहते तकनीकी खराबियों का पता लगाया जा सकेगा, उत्पादन बाधित होने से बचाया जा सकेगा और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इंजीनियरों और श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

रिफाइनरी में पहले भी साबित कर चुके हैं क्षमता

सहाब सिंह ने बताया कि पेट्रोबोट द्वारा विकसित तकनीक का इस्तेमाल पहले भी किया जा चुका है। हाल ही में राजस्थान की पचपदरा रिफाइनरी में कंपनी के रोबोट ने तकनीकी निरीक्षण और खामियों की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस अनुभव के बाद अत्याधुनिक रिसर्च सेंटर स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम किया गया।

अमेरिका और चीन को टक्कर देने की तैयारी

आईआईटी (बीएचयू) से इंजीनियरिंग करने वाले सहाब सिंह का कहना है कि अब तक वैश्विक रोबोटिक्स बाजार पर अमेरिका, यूरोप, चीन और जापान जैसी बड़ी तकनीकी शक्तियों का दबदबा रहा है। भारत को मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर और आईटी सेवाओं के लिए जाना जाता था, लेकिन अब भारतीय स्टार्टअप्स हार्ड-कोर इंजीनियरिंग और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन में भी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि जयपुर का यह सेंटर रिसर्च से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक का संपूर्ण इकोसिस्टम तैयार करेगा। यहां बनने वाले स्वदेशी रोबोट तकनीक के मामले में अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को चुनौती देंगे, वहीं उनकी लागत भी विदेशी रोबोट्स की तुलना में कम होगी। इससे भारतीय उद्योगों को किफायती और अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध होगी, साथ ही वैश्विक बाजार में भी भारतीय रोबोटिक्स उद्योग की मजबूत पहचान बनेगी।

‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को मिलेगा बल

सहाब सिंह ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन India’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती देगी। इस सेंटर के शुरू होने से युवा इंजीनियरों, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों को विदेश जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्हें जयपुर में ही विश्वस्तरीय तकनीक पर रिसर्च करने, नए उत्पाद विकसित करने और वैश्विक औद्योगिक चुनौतियों का समाधान तैयार करने का अवसर मिलेगा। इससे देश में नई बौद्धिक संपदा (Intellectual Property), पेटेंट और अत्याधुनिक तकनीकों का विकास होगा तथा भारत रोबोटिक्स और औद्योगिक ऑटोमेशन के क्षेत्र में वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में एक मजबूत कदम आगे बढ़ाएगा।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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