ACB की रडार पर फरार IAS, 17 दिन से तलाश जारी, जयपुर-दिल्ली एयरपोर्ट के CCTV फुटेज खंगाले

Sachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले में आरोपी रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल की तलाश में जुटी एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को अब तक बड़ी सफलता नहीं मिली है। करीब 17 दिन से फरार अग्रवाल को पकड़ने के लिए एसीबी की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं

ACB की रडार पर फरार IAS, 17 दिन से तलाश जारी, जयपुर-दिल्ली एयरपोर्ट के CCTV फुटेज खंगाले

जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले में आरोपी रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल की तलाश में जुटी एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को अब तक बड़ी सफलता नहीं मिली है। करीब 17 दिन से फरार अग्रवाल को पकड़ने के लिए एसीबी की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं, लेकिन वह अभी भी एजेंसी की पकड़ से बाहर है। हालांकि जांच में एक अहम तथ्य सामने आया है—सुबोध अग्रवाल विदेश नहीं भाग पाया है।

एसीबी ने इस आशंका की जांच के लिए जयपुर और दिल्ली एयरपोर्ट पर लगे सीसीटीवी कैमरों की बारीकी से पड़ताल की। टीमों ने पिछले एक महीने के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, लेकिन इनमें कहीं भी सुबोध अग्रवाल की एंट्री दर्ज नहीं मिली। इसके बाद एसीबी इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि फरार अधिकारी ने एयरपोर्ट के जरिए देश छोड़कर भागने की कोशिश नहीं की।

4 टीमें कर रहीं लगातार तलाश

जेजेएम घोटाले की जांच कर रही एसीबी ने सुबोध अग्रवाल सहित चार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमें गठित की हैं। ये टीमें राजस्थान के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।

गुरुवार को भी एसीबी की टीमों ने कई स्थानों पर छापेमारी की। जांच एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, अग्रवाल की तलाश में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और नोएडा तक दबिश दी गई। इन स्थानों पर उनके रिश्तेदारों, परिचितों और संभावित ठिकानों की गहन तलाशी ली गई, लेकिन अभी तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा।

18 फरवरी को जारी हुआ था लुकआउट नोटिस

एसीबी ने अग्रवाल के देश छोड़कर फरार होने की आशंका को देखते हुए 18 फरवरी को उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कराया था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि अगर वह किसी भी एयरपोर्ट से विदेश जाने की कोशिश करें तो तुरंत उन्हें रोका जा सके।

इसके बाद ही जांच एजेंसी ने जयपुर और दिल्ली एयरपोर्ट के सुरक्षा अधिकारियों के साथ समन्वय कर सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू की। एयरपोर्ट परिसर के प्रवेश द्वार, चेक-इन एरिया और इमिग्रेशन काउंटर तक के फुटेज खंगाले गए, लेकिन कहीं भी अग्रवाल की मौजूदगी दर्ज नहीं मिली।

रिश्तेदारों और करीबियों से पूछताछ तेज

फरार अधिकारी तक पहुंचने के लिए एसीबी ने करीब 50 से अधिक लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया है। इनमें उनके रिश्तेदार, करीबी दोस्त, परिचित, नौकर और ड्राइवर भी शामिल हैं।

एसीबी मुख्यालय में इन लोगों से घंटों पूछताछ की गई, ताकि अग्रवाल की संभावित लोकेशन या संपर्कों के बारे में कोई सुराग मिल सके। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फरारी के दौरान वह किन-किन लोगों के संपर्क में रहा और किस तरह अपनी लोकेशन छिपा रहा है।

ठिकानों के CCTV भी खंगाले

एसीबी ने सिर्फ एयरपोर्ट ही नहीं, बल्कि सुबोध अग्रवाल के रिश्तेदारों और परिचितों के घरों व संभावित ठिकानों के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले हैं। जांच का फोकस इस बात पर है कि कहीं वह गुपचुप तरीके से किसी परिचित के यहां छिपा तो नहीं हुआ है।

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी तकनीकी निगरानी और स्थानीय नेटवर्क दोनों का इस्तेमाल कर रही है। मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल और डिजिटल ट्रेल की भी जांच की जा रही है।

गिरफ्तारी को लेकर बढ़ा दबाव

जेजेएम घोटाला राजस्थान की नौकरशाही से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक बन चुका है। ऐसे में फरार मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर एसीबी पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है।

हालांकि एजेंसी का दावा है कि सुबोध अग्रवाल की तलाश में हर संभव तकनीकी और मानव संसाधन लगाए गए हैं और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। फिलहाल जांच एजेंसी का मानना है कि वह देश के भीतर ही कहीं छिपा हुआ है और उसकी गिरफ्तारी अब सिर्फ समय की बात है।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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