
राजस्थान में पत्नी के साथ मिलकर अधिकारी कर रहा था पैसों का खेल, ACB ने भंडाफोड़ कर दर्ज की FIR
इस मामले में दर्ज FIR के अनुसार, दीक्षित और कमलेश पर फर्जी रोजगार रिकॉर्ड बनाने और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग करने के लिए फर्जी कंपनियों के साथ मिलीभगत करने का आरोप है। संबंधित कंपनियों ने दीक्षित के प्रभाव के बदले पांडे के खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर की।
राजस्थान में एंटी करप्शन ब्यूरो ने सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी, उनकी पत्नी और उनके एक सहयोगी के खिलाफ दो निजी कंपनियों के माध्यम से रिश्वत की रकम के लेन-देन से जुड़े भ्रष्टाचार के एक मामले में FIR दर्ज की है। जिसके अनुसार आरोपी अधिकारी ने रिश्वत की रकम सीधे ना लेकर अपनी पत्नी को उन कंपनियों में झूठी नौकरी दिलवाई और ऑफिस जाए बिना सैलरी के जरिए रिश्वत की रकम ली। एसीबी ने बताया कि इस दौरान अधिकारी की पत्नी के खाते में कम से कम 50 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए। इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने 17 अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज की। जिसमें राजकॉम्प इन्फो सर्विसेज लिमिटेड के संयुक्त निदेशक प्रद्युम्न दीक्षित और उप निदेशक राकेश कुमार कमलेश पर फर्जी ठेकों की आड़ में रिश्वत भुगतान कराने का आरोप लगाया गया है।

आरोपी अधिकारी दीक्षित पर आरोप है कि उन्होंने इन कंपनियों की मदद के बदले सीधे रिश्वत ना लेकर अपनी पत्नी के जरिए रिश्वत ली। FIR में बताया गया है कि इन कंपनियों ने प्रद्युम्न दीक्षित से काम निकलवाने के बदले उनकी पत्नी पूनम पांडे को अपनी फर्म में नौकरी पर रखा और बिना कोई काम करवाए मोटी सैलरी दी। यहां तक कि इसके लिए उन्हें ऑफिस भी नहीं जाना पड़ता था। इस दौरान रिश्वत की रकम दो निजी कंपनियों ऑरियन-प्रो और ट्राइजीन सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से उनके बैंक खाते में भेजी गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार दीक्षित ने इसके लिए पांडे के अटेंडेंस रिकॉर्ड में भी हेराफेरी की, जबकि वह कभी इन दोनों कंपनियों के कार्यालय में गईं ही नहीं थीं। दीक्षित पर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए ऑरियन-प्रो से कर्मचारियों की भर्ती करने का आरोप है। उन्होंने कथित तौर पर अपनी पत्नी की नियुक्ति के बदले में कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया। अप्रैल 2019 से ऑरियन-प्रो पांडे के खाते में एक निश्चित राशि ट्रांसफर कर रहा है, जबकि उन्होंने कभी इन कंपनियों के ऑफिस में काम नहीं किया है।
बता दें कि राजकॉम्प इन्फो सर्विसेज लिमिटेड एक सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी है, जो कि सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के अंतर्गत आती है और केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाले NICSI के जरिए कमर्चारी प्राप्त करती है। NICSI निजी कंपनियों के जरिए अपने मैनपॉवर की व्यवस्था करता है, और इसका फैसला राजकॉम्प ही करता है कि किस कंपनी से कर्मचारियों को लिया जाएगा।
राजस्थान उच्च न्यायालय ने अधिवक्ता टीएन शर्मा द्वारा दायर याचिका के बाद जुलाई में इस मामले की प्रारंभिक जांच के आदेश दिए थे। अब तक की जांच में कई अनियमितताएं सामने आई हैं, जिनमें पांडे की संदिग्ध अटेंडेंस और प्रदर्शन रिकॉर्ड, और ऑरियन-प्रो तथा ट्राइजीन सॉफ्टवेयर में उनकी कथित नियुक्तियां शामिल हैं।
ऐसे में प्रारंभिक जांच के आधार पर, एसीबी ने 17 अक्टूबर को दीक्षित, उनकी पत्नी और उनके साथी कमलेश के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया था।





