पहले गुरुग्राम, फिर नोएडा और अब भिवाड़ी; सैलरी बढ़ाने को लेकर सड़क पर उतरे सैकड़ों वर्कर

Subodh Kumar Mishra लाइव हिन्दुस्तान, अलवर
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पहले गुरुग्राम, फिर नोएडा और अब भिवाड़ी। राजस्थान के अलवर जिले के भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र में वेतन वृद्धि और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग को लेकर श्रमिकों का आंदोलन जारी है। श्रमिक कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए वेतन वृद्धि सहित अपनी अन्य मांगों पर अड़े हुए हैं।

पहले गुरुग्राम, फिर नोएडा और अब भिवाड़ी; सैलरी बढ़ाने को लेकर सड़क पर उतरे सैकड़ों वर्कर

पहले गुरुग्राम, फिर नोएडा और अब भिवाड़ी। राजस्थान के अलवर जिले के भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र में वेतन वृद्धि और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग को लेकर श्रमिकों का आंदोलन जारी है। शुक्रवार को भिवाड़ी के कहरानी औद्योगिक क्षेत्र स्थित नैपिनो कंपनी, खुशखेड़ा की कूमी इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड और भिवाड़ी की फुटवियर बनाने वाली रिलैक्सो कंपनी में श्रमिक धरने पर बैठे हुए हैं। श्रमिक कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए वेतन वृद्धि सहित अपनी अन्य मांगों पर अड़े हुए हैं।

श्रमिकों की मुख्य मांगों में 8 घंटे की ड्यूटी के लिए 20 हजार मासिक वेतन और ओवरटाइम में बढ़ोतरी शामिल है। प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर भिवाड़ी से बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। श्रमिक कंपनी गेट के सामने बैठकर धरना दे रहे हैं और नारेबाजी कर रहे हैं।

नैपिनो कंपनी में धरने पर बैठी महिला श्रमिक संध्या ने अपनी मांगें बताते हुए कहा कि हम 8 घंटे की ड्यूटी के लिए 16 हजार और 12 घंटे की ड्यूटी के लिए 20 हजार की मांग कर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर हमें छुट्टी नहीं मिलती और न ही कोई बोनस दिया जाता है।

बोनस का प्रावधान नहीं

प्रयागराज की महिला श्रमिक मनीषा शर्मा ने बताया कि दूसरी कंपनियों में 8 घंटे की ड्यूटी के लिए 20 हजार वेतन मिलता है, जबकि यहां हमें केवल 7 हजार दिए जाते हैं। होली-दिवाली जैसे त्योहारों पर बोनस का कोई प्रावधान नहीं है। छुट्टी लेने पर दोगुने पैसे काट लिए जाते हैं, जो सरासर गलत है।

20 हजार मंथली सैलरी की मांग

श्रमिक योगेंद्र सेन ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के नए नियमों के अनुसार वेतन बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा 8 घंटे की ड्यूटी के लिए हमें 20 हजार मिलने चाहिए, लेकिन अभी केवल 9 हजार दिए जा रहे हैं। प्रबंधन का रवैया ठीक नहीं है। इसी तरह खुशखेड़ा की कूमी इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड और भिवाड़ी की फुटवियर बनाने वाली रिलैक्सो कंपनी में भी श्रमिक समान मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।

मांगे नहीं मानने तक काम बंद

रिलैक्सो फुटवियर कंपनी में प्रदर्शन कर रहे श्रमिक विशाल कुमार ने बताया कि केंद्र सरकार से जो नियम लागू हुए हैं, उसके हिसाब से सैलरी मिलनी चाहिए। जो श्रमिक 3 से 4 साल पुराने हैं, उनका भी पैसा नहीं बढ़ा है। श्रमिकों को काम के लिए गेट पास नहीं दिया जाता। कंपनी में जीएम सहित कई अधिकारियों से बात की है, लेकिन कोई सॉल्यूशन नहीं निकल रहा है। जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होंगी, तब तक कंपनी में काम बंद रहेगा और धरना-प्रदर्शन चालू रहेगा।

श्रमिकों का कहना है कि लंबे काम के घंटे, कम वेतन, बोनस की कमी और छुट्टियों पर कटौती उनके अधिकारों का हनन है। प्रबंधन की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। प्रशासन मामले की निगरानी कर रहा है, ताकि औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन प्रभावित न हो और कानून-व्यवस्था बनी रहे।

रिपोर्टः हंसराज

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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