
प्रिंसिपल ने जब्त किया मोबाइल, देखी छात्रा की व्हाट्सऐप चैट; जोधपुर प्रशासन ने कर दिया सस्पेंड
जोधपुर में एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल ने छात्रा का मोबाइल जब्त किया। मोबाइल जब्त करने के बाद उसकी चैट हिस्ट्री देखी। छात्रा की शिकातय के बाद प्रिंसिपल को सस्पेंड कर दिया गया है।
राजस्थान के जोधपुर में सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल को छात्रा की प्राइवेसी का उल्लंघन करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। प्रिंसिपल पर आरोप है था कि उन्होंने स्कूल की एक छात्रा का मोबाइल पहले जब्त किया और उसको अनलॉक करवाकर उसमें से पर्सनल जानकारी देखी। बाद में बीकानेर डीएसई के अधिकारियों ने आरोपों की जांच की तो आरोप सही साबित हुए। आरोप सच साबित होने के बाद प्रिंसिपल को सस्पेंड कर दिया गया।

यह घटना जोधपुर की एक पीएम श्री महात्मा गांधी सरकारी स्कूल में हुई। स्कूल में 11वीं कक्षा की एक छात्रा पिछले शनिवार को स्कूल में अपना फोन लेकर आ गई थी। इस दौरान प्रिंसिपल शकील अहमद को पता चल गया कि छात्रा स्कूल में मोबाइल फोन लेकर आई है। शकील अहमद ने छात्रा का फोन जब्त किया और उससे अनलॉक करने के लिए भी कहा। प्रिंसपल ने ना सिर्फ फोन को अनलॉक करवाया बल्कि छात्रा की व्हाट्सऐप चैट हिस्ट्री भी देखी। व्हाट्सऐप चैट हिस्ट्री के साथ ही प्रिंसिपल ने इंस्टाग्राम, कॉल लॉग, फोटो गैलरी की भी जांच की। इस घटना की शिकायत छात्रा ने अपने परिजनों से की। परिजनों इसकी शिकायत शिक्षा विभाग के अधिकारियों से की। शिकायत के बाद जांच शुरू हुई तो आरोप सही पाए गए। जिसके बाद प्रिंसिपल शकील अहमद को निलंबित कर दिया गया।
इसके अलावा छात्रा ने प्रिंसपल पर एक और आरोप लगाया। छात्रा ने कहा कि प्रिंसपल ने उसके बगल में बैठे एक लड़के के बारे में भी पूछताछ की। घटना की शिकायत जब छात्रा ने परिजनों से की तो वो स्कूल में इसकी शिकायत लेकर आए और स्कूल प्रशासन से भिड़ गए। इस मामले की शिकायत परिजनों ने शिक्षा विभाग में दर्ज करवाई और आरोप लगाते हुए कहा कि अगर छात्रा के फोन में कोई प्राइवेट कंटेंट पाया गया तो प्रिंसिपल की हरकतों से उसके गलत इस्तेमाल का गंभीर खतरा है।
इस मामले पर बात करते हुए निलंबित प्रिंसिपल शकील अहमद ने कहा कि उन्होंने मोबाइल फोन को चेक किया था। शकील ने इसकी वजह भी बताई है। शकील का कहना है कि एग्जाम के टाइम किसी तरह का वीडियो बनाने की आशंका को देखते हुए छात्रा का फोन उन्होंने चेक किया था।
इस मामले पर बात करते हुए शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि स्कूल में किसी भी छात्र या छात्रा को मोबाइल ले जाने की इजाजत नहीं है, लेकिन जिस तरह से प्रिंसपल ने जांच की वो तरीका गलत था। अधिकारी ने कहा कि प्रिंसपल को फोन जब्त कर लेना चाहिए था और इसकी जानकारी उसके माता-पिता को देनी चाहिए थी।





