
डांगियावास हत्याकांड: 19 साल पहले मिली थी सिर कुचली लाश, तीनों आरोपी सुप्रीम कोर्ट से बरी
19 साल बाद इस हत्याकांड के तीनों आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से बरी कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस केस की नींव को कमजोर बताया है। इस तरह आरोपी हेमलता, उसके पति नरपत चौधरी और भंवरसिंह को दोषमुक्त किया गया है।
राजस्थान के जोधपुर में साल 2006 में सुरेश शर्मा नामक शख्स की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। 19 साल बाद इस हत्याकांड के तीनों आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से बरी कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस केस की नींव को कमजोर बताया है। इस तरह आरोपी हेमलता, उसके पति नरपत चौधरी और भंवरसिंह को दोषमुक्त किया गया है।

सर्वोच्च अदालत के संदीप मेहता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने अपने फैसले में कहा- जिस पुलिस जांच के आधार पर पूरी केस की नींव रखी गई, वह न केवल कमजोर थी, बल्कि सबूतों के अभाव में न्यायिक कसौटी पर भी टिक नहीं सकी। अदालत ने कहा- अभियोजन पक्ष की कहानी सिर्फ अंदाजों और अनुमानों पर आधारित थी। उनके समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं थे, जिसे कोर्ट के सामने पेश किया गया हो।
आपको बताते चलें कि यह घटना साल 2006 में घटी थी। सुरेश शर्मा के बेटे ने अपने पिता की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, छानबीन के बाद सुरश शर्मा का शव क्षत विक्षत हालत में मिला था। लाश के सिर को कुचल दिया गया था। हाथ को लोहे के तार से बांधा गया था और पैर भी बंधे हुए थे।
शव का पोस्टमार्टम हुआ तो पता चला कि सुरेश शर्मा की गला घोंटकर हत्या की गई थी। उनके शरीर पर 20 से ज्यादा जगहों पर चोट के निशान थे। मामला ट्रायल कोर्ट पहुंचा तो सबूतों के आधार पर अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया, लेकिन बाद में हाईकोर्ट ने साल में तीनों को बरी कर दिया गया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो सर्वोच्च अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए तीनों को बरी कर दिया।





