एग्जिट पोल्स भरोसे के लायक नहीं, कांग्रेस नेताओं ने कहा- इंतजार करते हैं और देखते हैं
पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में विधानसभा की वोटिंग के बाद जारी एग्जिट पोल्स की विश्वसनीयता पर कांग्रेस के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों ने सवाल उठाया है। राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि ये भरोसे के लायक नहीं हैं। वहीं, छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने नतीजे आने तक देखने रहने की बात कही।

पश्चिम बंगाल सहित देश के कई राज्यों में विधानसभा की वोटिंग के बाद जारी हुए एग्जिट पोल्स की विश्वसनीयता पर कांग्रेस के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों ने सवाल उठाया है। राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि ये भरोसे के लायक नहीं हैं। लोग इन पर यकीन नहीं करते। वहीं, छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि जितने भी एग्जिट पोल आए हैं, क्या वे सभी भरोसेमंद हैं। बघेल ने नतीजे आने तक देखने रहने की बात कही।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने शुक्रवार को कई राज्यों में वोटिंग के बाद जारी हुए एग्जिट पोल्स की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये भरोसे लायक नहीं हैं। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी उस समय आई जब कई एग्जिट पोल्स में पश्चिम बंगाल में बीजेपी को टीएमसी पर बढ़त या त्रिशंकु विधानसभा की संभावना जताई गई है। इन पोल्स में केरल में यूडीएफ को आगे बताया गया और तमिलनाडु में एम के स्टालिन और असम में हिमंता बिस्वा सरमा की सरकारों की वापसी का अनुमान लगाया गया है।
श्रमिकों की स्थिति पर चिंता
एग्जिट पोल्स से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए गहलोत ने कहा कि एग्जिट पोल्स पर कोई भरोसा नहीं करता। कभी ये सही साबित होते हैं तो कभी नहीं। इनमें कोई दम नहीं होता। सिंह ने एक मई को अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर श्रमिकों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी भी नहीं दी जा रही है जो कि बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
नोएडा हिंसक प्रदर्शनों का जिक्र
न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि को लेकर नोएडा में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा कि यह स्थिति सरकारों के लिए एक चेतावनी है कि वे इस बात पर आत्म-चिंतन करें कि श्रमिकों की बेहतर देखभाल कैसे की जाए।
राजस्थान में हालात और भी बदतर
उन्होंने कहा कि श्रमिकों का कल्याण सुनिश्चित करना नियोक्ताओं की जिम्मेदारी है। चाहे वह नैतिक रूप से हो या किसी अन्य रूप में। ऐसा न कर पाने पर ही इस तरह की स्थितियां पैदा होती हैं। गहलोत ने दावा किया कि राजस्थान में हालात और भी बदतर हैं। आरोप लगाया कि देश में मजदूरी के स्तर के मामले में यह राज्य सबसे निचले पायदानों में से एक है।
सीएम को पत्र लिखा
उन्होंने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को पत्र लिखकर राज्य में लाखों श्रमिकों की आर्थिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने न्यूनतम मजदूरी में तत्काल संशोधन का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि अन्य प्रगतिशील राज्यों की तुलना में मौजूदा दरें काफी कम हैं।
इंतजार करते हैं और देखते हैं
उधर, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने सवाल उठाया कि क्या सभी एग्जिट पोल भरोसेमंद हैं। बघेल ने कहा कि 4 मई को देखते हैं। इस दिन वोटों की गिनती होनी है। कांग्रेस नेता ने दिल्ली में पत्रकारों से कहा कि एग्जिट पोल के बारे में वोटों की गिनती होने तक चर्चाएं हो सकती हैं। क्या जितने भी एग्जिट पोल आए हैं, वे सभी भरोसेमंद हैं? इंतजार करते हैं और देखते हैं। नतीजे तीन दिनों में आ जाएंगे।
बुधवार को जारी किए गए एग्जिट पोल्स
चार राज्यों में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद बुधवार को एग्जिट पोल्स जारी किए गए। इसमें यह अनुमान लगाया गया कि बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए असम में और कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ केरल में जीत हासिल करने की स्थिति में है। ज्यादातर एग्जिट पोल्स में यह भी कहा गया कि बीजेपी पश्चिम बंगाल में अपनी पहली सरकार बनाने की राह पर है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
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