मृतक कर्मी की बहू भी अनुकम्पा पर नियुक्ति पाने की हकदार, हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

Apr 18, 2026 09:40 am ISTPramod Praveen भाषा, जयपुर
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HC ने यह भी कहा कि विभाग द्वारा बार-बार उन्हीं आधारों पर आवेदन खारिज करना न्यायिक आदेशों की अवहेलना के समान है। इसके साथ ही अदालत ने विभाग को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता के मामले पर पुनर्विचार करे।

मृतक कर्मी की बहू भी अनुकम्पा पर नियुक्ति पाने की हकदार, हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

राजस्थान हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि मृतक कर्मचारी की बहू भी अनुकंपा पर नियुक्ति पाने की हकदार हो सकती है। हाई कोर्ट ने विभाग की ओर से उठाई गई आपत्तियों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि वही तर्क दोबारा प्रस्तुत किए गए, जिन्हें पूर्व में न्यायालय खारिज कर चुका है। जस्टिस रवि चिरानिया की एकल पीठ ने शुक्रवार को सुनाया।

मामले में याचिकाकर्ता संगीता देवी ने अपने ससुर की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। उनके ससुर राज्य सरकार के एक विभाग में कार्यरत थे और सेवा के दौरान ही उनका निधन हो गया था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण संगीता देवी ने नियमों के तहत नौकरी की मांग की थी। हालांकि, संबंधित विभाग ने उनके आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि बहू को अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार नहीं है। विभाग ने तर्क दिया कि केवल मृतक की पत्नी, पुत्र या पुत्री ही इस श्रेणी में आते हैं। इसके खिलाफ संगीता देवी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

पीड़ित परिवार को त्वरित आर्थिक सहायता प्रदान करना उद्देश्य

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आर सी गौतम ने कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि पूर्व में भी ऐसे मामलों में अदालत स्पष्ट कर चुकी है कि परिवार की वास्तविक निर्भरता को देखते हुए बहू को भी अनुकंपा नियुक्ति दी जा सकती है, विशेषकर तब जब वह मृतक कर्मचारी के परिवार का हिस्सा हो और आर्थिक रूप से उसी पर निर्भर हो। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य केवल नियमों की कठोर व्याख्या करना नहीं, बल्कि पीड़ित परिवार को त्वरित आर्थिक सहायता प्रदान करना है।

न्यायिक आदेशों की अवहेलना के समान

न्यायालय ने यह भी कहा कि विभाग द्वारा बार-बार उन्हीं आधारों पर आवेदन खारिज करना न्यायिक आदेशों की अवहेलना के समान है। इसके साथ ही अदालत ने विभाग को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता के मामले पर पुनर्विचार करे और पूर्व के न्यायिक निर्णयों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय ले। साथ ही यह भी कहा कि याचिकाकर्ता सभी आवश्यक शर्तों को पूरा करती हैं, तो उन्हें अनुकंपा पर नौकरी दी जाए।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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