
एक तो वह फैक्टर भी... अशोक गहलोत ने बिहार चुनाव में हार के लिए किस पर फोड़ा ठीकरा?
संक्षेप: बिहार विधानसभा चुनाव नतीजों में एनडीए 180 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। भाजपा 91 सीटों पर आगे है। राजद 27 तो कांग्रेस 4 सीटों पर आगे चल रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने बिहार चुनाव परिणाम के रुझानों को निराशाजनक करार दिया है।
बिहार विधानसभा चुनाव नतीजों में भाजपा की अगुवाई वाला एनडीए 180 से अधिक सीटों पर बढ़त हासिल किए हुए है। 101 सीटों पर लड़ने वाली भाजपा 91 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है तो जदयू 79 सीटों पर आगे है। चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) 20 से अधिक सीटों पर आगे है। राजद 27 तो कांग्रेस 4 सीटों पर आगे है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने बिहार चुनाव परिणाम के रुझानों को निराशाजनक करार दिया है। गहलोत ने महागठबंधन की हार का ठीकरा निर्वाचन आयोग पर फोड़ा है।

अशोक गहलोत ने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं कि बिहार चुनाव का नतीजा निराशाजनक है। बिहार में आदर्श आचार संहिता लागू होने के बावजूद सब बंट रहे थे। पेंशन बंट रही थी... पैसा बंट रहा था, 10 हजार रुपए बिहार जैसे प्रदेश में महिलाओं को मिल जाएं तो आप सोच सकते हैं क्या हो सकता है। एक तो वह फैक्टर भी था।
अशोक गहलोत ने कहा कि बिहार में आदर्श आचार संहिता लागू होने के बावजूद मतदाताओं को नकदी और अन्य लाभ बांटे गए। पेंशन भुगतान और कैश ट्रांसफर जारी रहे। साल 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव के दौरान एक योजना के तहत मोबाइल फोन वितरण और पेंशन वितरण को चुनाव आचार संहिता लागू होते ही तुरंत रोक दिया गया था। लेकिन बिहार में निर्वाचन आयोग मूकदर्शक बना रहा।
अशोक गहलोत ने सवाल किया कि बिहार में चुनाव आयोग ने नकदी और अन्य लाभ दिया जाना क्यों नहीं रोका? दस-दस हजार रुपए बंट रहे थे जिसे आयोग को रोकना चाहिए था लेकिन उसने नहीं रोका। इसके साथ ही अशोक गहलोत ने आयोग पर बिहार में सत्तारूढ़ दल के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया।
गहलोत ने आरोप लगाया कि जब आप निष्पक्ष चुनाव नहीं कराते। जब बूथ कैप्चरिंग या बेईमानी होती है और आयोग कोई कार्रवाई नहीं करता तो इसे वोट चोरी ही कहेंगे। आयोग की सत्तारूढ़ पार्टी के साथ मिलीभगत थी। भाजपा ने धनबल जमा किया है जिससे लोकतंत्र को खतरा है। देश को कांग्रेस और उसकी विचारधारा की जरूरत है।





