
करीब 8 महीने बाद वापस सलाखों के पीछे पहुंचा आसाराम, जोधपुर जेल में किया आत्मसमर्पण
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि आसाराम ने पिछले 3-4 महीनों में इलाज के लिए कई यात्राएं की हैं और विभिन्न शहरों के विभिन्न अस्पतालों में इलाज करवाया है, लेकिन किसी भी अस्पताल में नियमित रूप से जांच नहीं कराई।
हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम जमानत बढ़ाने से इनकार करने के बाद बलात्कार के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कथित संत आसाराम ने जोधपुर सेंट्रल जेल में शनिवार को आत्मसमर्पण कर दिया। अहमदाबाद के डॉक्टरों की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने बीते बुधवार को आसाराम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। जिसके बाद उसे सरेंडर करना पड़ा।

84 साल के आसाराम को इस साल 7 जनवरी को चिकित्सा कारणों से 12 साल की कैद के दौरान पहली बार जमानत दी गई थी। आसाराम की जमानत अवधि उसकी जमानत अवधि 29 अगस्त को खत्म हो गई थी, जिसके बाद उसने जोधपुर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण कर दिया।
इससे पहले 27 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के जस्टिस दिनेश मेहता और विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इस दौरान अदालत ने अहमदाबाद के सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों की मेडिकल बोर्ड रिपोर्ट का हवाला दिया था। जिसके कहा गया था कि आसाराम की तबीयत स्थिर हालत में है और उन्हें अस्पताल में भर्ती होने या निरंतर चिकित्सा देखभाल की जरूरत नहीं है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि आसाराम ने पिछले 3-4 महीनों में इलाज के लिए कई यात्राएं की हैं और विभिन्न शहरों के विभिन्न अस्पतालों में इलाज करवाया है, लेकिन किसी भी अस्पताल में नियमित रूप से जांच नहीं कराई। जमानत याचिका खारिज करते हुए पीठ ने जेल अधिकारियों को हिरासत के दौरान उसे व्हीलचेयर और एक सहायक की मदद लेने की अनुमति भी दी थी। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर जांच के लिए उसे जोधपुर एम्स ले जाने की अनुमति भी दी।
27 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान अस्थायी जमानत की अवधि आगे बढ़ाने के लिए आसाराम के वकील निशांत बोधा ने दलील दी कि आसाराम को 21 अगस्त को जोधपुर एम्स ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उनके स्वास्थ्य में गिरावट की सूचना दी थी। हालांकि, उच्च न्यायालय ने वकील के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और अहमदाबाद से आई मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर आसाराम की जमानत याचिका खारिज कर दी।



