एग्जाम सेंटर के बाहर से ही सॉल्व होता था SSC पेपर! जैमर को भी चकमा, यूपी STF ने हाईटेक नकल का वांटेड दबोचा
नकल गिरोह का वांटेड यूपी एसटीएफ ने राजस्थान के अलवर से दबोचा है। आरोपी के घर से कई डिवाइस मिली हैं जिनका इस्तेमाल हाई टेक नकल करवाने में हो रहा था।

उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने राजस्थान के एक युवक को गिरफ्तार किया है जिसपर स्टाफ सेलेक्शन कमिशन (एसएससी) ऑनलाइन एग्जाम में हाईटेक तरीके से नकल करवाने का आरोप है। आरोपी का नाम लोकेश है। पुलिस ने लोकेश के घर पर छापेमारी की थी जहां से नकल करवाने में इस्तेमाल हुई कई अलग-अलग डिवाइस बरामद कीं हैं। एसटीएफ के मुताबिक यह मामला एसएससी द्वारा आयोजित सीएपीएफ, एसएसएफ कांस्टेबल और असम राइफल्स राइफलमैन भर्ती परीक्षा-2026 से जुड़ा है।
पुलिस ने आरोपी को राजस्थान के अलवर से 30 जुलाई को गिरफ्तार किया है। एसटीएफ के मुताबिक आरोपी उस नकल गिरोह का हिस्सा है जिसका भंडाफोड़ मई में किया गया था। गिरोह पर ऑनलाइन एग्जाम सिस्टम को हैक करने, प्रॉक्सी सर्वर और मोडिफाई टीएफटी स्क्रीन के जरिए उम्मीदवारों को नकल करवाने का आरोप है।
22 मई को हुआ था भंडाफोड़
गिरोह का भंडाफोड़ 22 मई को एसएससी भर्ती परीक्षा के दौरान हुआ था। एसटीएफ ने तब ग्रेटर नोएडा में स्थित एग्जाम सेंटर बालाजी डिजिटल जोन में छापेमारी की थी। इसके बाद गिरोह के 7 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था जिसमें एग्जाम सेंटर का मालिक और कथित मास्टरमाइंड प्रदीप चौहान भी शामिल था। इसके साथ ही एक हैकर अमित राणा भी दबोचा गया था। एसटीफए ने इसके साथ ही 50 लाख रुपये कैश, प्रॉक्सी सर्वर और अन्य सामान जब्त किया था जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर नकल करवाने में किया गया था। वहीं 6 जुलाई को गिरोह के आठवें सदस्य को भी धर दबोचा गया था।
आरोपियों ने लिया था लोकेश का नाम
पुलिस कस्टडी के दौरान आरोपियों ने लोकेश का नाम लिया था और बताया था कि उसी ने टीएफटी स्क्रीन सप्लाई कीं। हालांकि गिरोह का भंडाफोड़ होने के बाद से ही लोकेश फरार चल रहा था। लोकेश की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ ने अलवर में उसके घर पर छापेमारी की इस दौरान कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद कीं। घर से 92 टीएफटी स्क्रीन, रास्पबेरी पाई डिवाइस, वीजीए कार्ड, मेमोरी कार्ड, वाई-फाई डोंगल, कन्वर्टर, केबल, एक लैपटॉप और अन्य हार्डवेयर मिले।
टीएफटी स्क्रीन के जरिए लाइव स्ट्रीमिंग
बाहर से बिल्कुल सामान्य कंप्यूटर स्क्रीन जैसी दिखाई देने वाली टीएफटी स्क्रीन को असल में इस तरह से मोडिफाई किया गया था जिससे उम्मीदवार की स्क्रीन की लाइव स्ट्रीमिंग एग्जाम सेंटर के बाहर बैठे सॉल्वर को दिखाई देती थी। सॉल्वर रास्पबेरी पाई डिवाइस और वाई-फाई डोंगल के जरिए रियल टाइम में प्रश्न पत्र के उत्तर उम्मीदवार को भेजता था। जांचकर्ताओं के मुताबिक, गिरोह ऐसे एडवांस्ड राउटर और वाई-फाई का इस्तेमाल करता था जो कि एग्जाम सेंटर में लगे जैमर को भी चकमा दे देता था।
6 महीने का कोर्स किया था
लोकेश ने पूछताछ में बताया कि उसने साल 2013 में 6 महीने का कंप्यूटर हार्डवेयर और नेटवर्किंग का कोर्स किया था। और उसका कंप्यूटर हार्डवेयर का बिजनेस भी है। लोकेश ने पूछताछ में यह भी बताया कि एक टीफएटी स्क्रीन बनाने में करीब 40 रुपये का खर्च आता था। इसके अलावा वह हर टीएफटी स्क्रीन को बनाने के लिए 5 हजार रुपये मेहनताना अलग से चार्ज करता था। एसटीएफ का दावा है कि लोकेश इन मोडिफाई स्क्रीन को उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और महाराष्ट्र में एक्टिव नकल गिरोह को भी सप्लाई कर रहा था।


