अजमेर में पासपोर्ट कार्यालय को फिर मिली बम से उड़ाने की धमकी
अजमेर में जीपीओ ऑफिस स्थित पासपोर्ट कार्यालय को फिर बम से उड़ाने की धमकी मिली है। धमकी ई-मेल के माध्यम से भेजी गई, जिसमें स्पष्ट रूप से पासपोर्ट कार्यालय को निशाना बनाने की चेतावनी दी गई थी।

अजमेर में शुक्रवार को गांधी भवन स्थित मुख्य पोस्ट ऑफिस और परिसर में स्थित पासपोर्ट ऑफिस को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। धमकी ई-मेल के जरिए भेजी गई थी, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि अगर तमिलनाडु की राजनीतिक व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आया तो ‘तमिल मुक्ति संगठन’ चुनावी प्रक्रियाओं को छोड़कर हिंसक रास्ता अपनाएगा।
धमकी मिलने के बाद तुरंत की गई कार्रवाई
पोस्ट ऑफिस के अधिकारियों ने जैसे ही ई-मेल के बारे में जानकारी प्राप्त की, तुरंत कोतवाली थाना पुलिस को सूचना दी। कोतवाली थाना प्रभारी अनिल देव ने पुलिस जाप्ते के साथ मौके पर पहुंचकर परिसर को खाली करवाया। पुलिस ने डॉग स्क्वायड और मेटल डिटेक्टर टीम को बुलाकर तलाशी अभियान शुरू किया। परिसर के सभी कर्मचारियों और आम नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।
सीनियर पोस्टमास्टर केके मीना ने बताया कि धमकी वाली ई-मेल शुक्रवार दोपहर 1:09 बजे प्राप्त हुई। उन्होंने कहा, “ई-मेल में स्पष्ट रूप से धमकी दी गई थी कि दोपहर 2 बजे इस्लामिक प्रार्थना के दौरान कार्यालयों में धमाका किया जाएगा। हमारी प्राथमिकता कर्मचारियों और आम जनता की सुरक्षा थी, इसलिए तुरंत दोनों कार्यालय खाली करवा दिए गए।
धमकी का राजनीतिक और हिंसक संदेश
ई-मेल में लिखा गया था कि ‘बेंगलूरु मेडिकल कॉलेज में डॉ. अब्दुल मोहम्मद भाई का अपमान, तमिलनाडु के M.K. स्टालिन और DMK समर्थकों का अपमान है। इसलिए दोपहर 2 बजे इस्लामिक प्रार्थना के दौरान आपके पासपोर्ट/डाकघर में धमाका करने के लिए 10 जहरीले बम रखे गए हैं।’ ई-मेल में यह भी आरोप लगाया गया कि तमिलनाडु की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था विदेशी फंडिंग वाले ट्रस्टों और NGO के एजेंडों के प्रभाव में है।
धमकी में नामित ट्रस्टों में ‘मुरासोली ट्रस्ट’ और ‘DMK ट्रस्ट’ शामिल हैं। ई-मेल में आगे लिखा गया कि अगर DMK 2026 के चुनाव जीतती है तो उसके परिवार का कोई सदस्य नुकसान झेल सकता है।
इस धमकी के आधार पर पुलिस ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह स्पष्ट रूप से आतंकवादी संगठन की धमकी है और इसमें राजनीतिक हिंसा का इशारा भी शामिल है।
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता
कोतवाली थाना पुलिस ने धमकी मिलने के तुरंत बाद सभी सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया। पुलिस ने परिसर के आसपास सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है और ई-मेल ट्रेस करने के लिए साइबर सेल से भी संपर्क किया गया है। पुलिस के मुताबिक, इस तरह की धमकी पहले 10 मार्च को भी दी गई थी, लेकिन तब किसी वास्तविक घटना को अंजाम नहीं दिया गया।
पुलिस का मानना है कि इस बार धमकी भेजने वाले संगठन का उद्देश्य केवल डर पैदा करना नहीं बल्कि राजनीतिक हिंसा के लिए माहौल तैयार करना है। इसलिए सुरक्षा बढ़ा दी गई है और आसपास के सभी संवेदनशील सरकारी कार्यालयों में भी सतर्कता बढ़ाई गई है।
नागरिकों और कर्मचारियों में चिंता
धमकी के बाद कार्यालय परिसर खाली कराने के कारण नागरिक और कर्मचारियों में भय का माहौल बन गया। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों में न आएं और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा, “हम किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं कर रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉग स्क्वायड, मेटल डिटेक्टर और साइबर जांच टीम सक्रिय हैं। हम धमकी देने वालों को जल्दी ही पकड़ने के लिए हर कदम उठा रहे हैं।”
पिछली धमकियों का संदर्भ
अजमेर में यह धमकी इस साल की दूसरी गंभीर घटना है। 10 मार्च को भी पोस्ट ऑफिस और पासपोर्ट ऑफिस को इसी तरह की धमकी मिली थी। इससे पता चलता है कि धमकी देने वाला संगठन लगातार सक्रिय है और उसकी रणनीति में स्पष्ट रूप से हिंसक कार्रवाई को शामिल किया गया है।
पुलिस ने कहा कि मामले की जांच के लिए सभी उपलब्ध तकनीकी और मानव संसाधन तैनात किए जा रहे हैं। किसी भी तरह की असामाजिक गतिविधि को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ा दिया गया है।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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