अजमेर में प्रेस करने वाले को 598 करोड़ का नोटिस;जानिए इनकम टैक्स ने क्यों टिका दिया नोटिस

Apr 09, 2026 09:30 am ISTSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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सड़क किनारे कपड़ों पर प्रेस करने वाला एक आम आदमी… और उसके नाम पर 598 करोड़ रुपए का हीरे-जवाहरात का कारोबार! सुनने में फिल्मी लगता है, लेकिन अजमेर में सामने आया यह मामला अब जांच एजेंसियों के लिए भी पहेली बन चुका है।

अजमेर में प्रेस करने वाले को 598 करोड़ का नोटिस;जानिए इनकम टैक्स ने क्यों टिका दिया नोटिस

सड़क किनारे कपड़ों पर प्रेस करने वाला एक आम आदमी… और उसके नाम पर 598 करोड़ रुपए का हीरे-जवाहरात का कारोबार! सुनने में फिल्मी लगता है, लेकिन अजमेर में सामने आया यह मामला अब जांच एजेंसियों के लिए भी पहेली बन चुका है। इनकम टैक्स विभाग के एक नोटिस ने जैसे इस ‘साइलेंट स्कैम’ का पर्दाफाश कर दिया।

नोटिस आया और उड़ गए होश

रामनगर इलाके में ठेला लगाकर रोजी-रोटी कमाने वाले जितेंद्र कुमार की जिंदगी 1 अप्रैल 2026 को उस वक्त बदल गई, जब उसे इनकम टैक्स का नोटिस मिला। नोटिस में करोड़ों के डायमंड ट्रांजैक्शन का हिसाब मांगा गया था।

जितेंद्र के मुताबिक, “पहले तो लगा कोई मजाक है… फिर समझ आया कि मामला बहुत बड़ा है।”

‘मैं तो प्रेस वाला हूं, हीरे कहां से आए?’

जितेंद्र की हालत उस वक्त और खराब हो गई जब उसे बताया गया कि उसके नाम से हीरे-जवाहरात की खरीद-फरोख्त हुई है। एक ऐसा शख्स, जो दिनभर कपड़ों पर इस्त्री कर दो वक्त की रोटी जुटाता है, उसके नाम पर करोड़ों का कारोबार यह अपने आप में बड़ा सवाल है।

PAN बना ‘पासपोर्ट टू स्कैम’

जितेंद्र के वकील राकेश ठाड़ा ने जब दस्तावेज खंगाले तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जितेंद्र के PAN कार्ड के आधार पर एक बैंक अकाउंट खोला गया और उसी से 598 करोड़ 50 लाख रुपए का ट्रांजैक्शन किया गया।

सबसे बड़ा ट्विस्ट—जितेंद्र के पास खुद उसका PAN कार्ड मौजूद ही नहीं है। उसका दावा है कि करीब दो साल पहले उसका PAN कार्ड कहीं खो गया था।

पाली से जुड़ा ‘हीरा कनेक्शन’

जांच में शक की सुई पाली के एक डायमंड कारोबारी शत्रुघ्न सिंह पर जाकर टिक गई है। आरोप है कि उसने जितेंद्र के PAN का इस्तेमाल कर न सिर्फ बैंक अकाउंट खुलवाया, बल्कि GST नंबर तक जारी करवा लिया।

यहीं नहीं, सूरत में ‘मैसर्स मनन इंटरप्राइजेज’ नाम से फर्म खोलकर हीरे-जवाहरात का बड़ा कारोबार भी चलाया गया।

बैंक मैनेजर की भूमिका पर सवाल

मामला यहीं खत्म नहीं होता। जिस प्राइवेट बैंक में यह अकाउंट खुला, उसके मैनेजर को भी इनकम टैक्स विभाग ने नोटिस जारी किया है।

इतने बड़े ट्रांजैक्शन के बावजूद RBI गाइडलाइंस के तहत कोई अलर्ट क्यों नहीं हुआ? क्या यह सिर्फ लापरवाही थी या फिर अंदरखाने मिलीभगत? यह सवाल अब जांच का अहम हिस्सा बन गया है।

एफआईआर दर्ज, जांच तेज

पीड़ित जितेंद्र ने अजमेर के गंज थाने में आरोपी कारोबारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुट गई है।

थाना प्रभारी महावीर सिंह के मुताबिक, “PAN के दुरुपयोग से करोड़ों का लेन-देन हुआ है। जांच कर नियम अनुसार कार्रवाई की जाएगी।”

ठप हुआ रोजगार, डर में जी रहा पीड़ित

इस पूरे घटनाक्रम ने जितेंद्र की जिंदगी को उलट-पुलट कर दिया है। पिछले एक हफ्ते से उसका काम पूरी तरह बंद है।

अब उसकी रोजमर्रा की जिंदगी वकील और पुलिस थानों के चक्कर में उलझ गई है। डर इस बात का है कि कहीं वह इस ‘सफेदपोश खेल’ में फंस न जाए।

सबसे बड़ा सवाल कितने ‘जितेंद्र’ और?

यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की पहचान चोरी का नहीं, बल्कि सिस्टम में मौजूद बड़ी खामी का संकेत देता है।

अगर एक प्रेस वाले के नाम पर 598 करोड़ का कारोबार हो सकता है, तो सवाल उठता है क्या ऐसे और भी ‘फर्जी चेहरे’ इस नेटवर्क में शामिल हैं?

सस्पेंस अभी बाकी है…

जांच एजेंसियां अब इस ‘डायमंड ट्रेल’ को जोड़ने में लगी हैं। हर कड़ी एक नए खुलासे की ओर इशारा कर रही है।

अब देखना यह होगा कि यह मामला सिर्फ पहचान की चोरी तक सीमित रहता है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क छिपा है… जो आम लोगों के नाम पर करोड़ों का खेल खेल रहा है।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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