पंजाब में दो पुराने साथी मिटा रहे दूरियां, गवर्नर की पदयात्रा में कदमताल करते नजर आए टॉप लीडरशिप
एक बार फिर से दोनों दलों के एक होने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। इस बात को मंगलवार को और बल तब मिला, जब फिरोजपुर में पंजाब के गवर्नर गुलाब चंद कटारिया ने नशामुक्ति को लेकर पदयात्रा की, जिसमें दोनों दलों की टॉप लीडरशिप एक साथ कदमताल करती नजर आई।

पंजाब में अगले साल यानी 2027 में विधानसभा चुनाव हैं। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी जहां सरकार दोबारा बनाने के लिए एडी चोटी का जोर लगा रही है, वहीं भाजपा अपना आधार बनाने की कोशिशों में जुटी है लेकिन भाजपा के लिए पंजाब की राह आसान नहीं है। ऐसे में पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (SAD) से बिगड़ी बात बनाने के अंदरखाते प्रयास भी हो रहे हैं। नए कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल और भाजपा का गठबंधन टूट गया था, जिसके बाद न तो किसी चुनाव में अकाली दल उभर पाया और न ही भाजपा। पिछले विधान सभा चुनाव और लोक सभा चुनाव में भी दोनों के बीच गठबंधन की चर्चाएं होती रहीं मगर बात नहीं बनी।
अब एक बार फिर से दोनों दलों के एक होने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। इस बात को मंगलवार को और बल तब मिला, जब फिरोजपुर में पंजाब के गवर्नर गुलाब चंद कटारिया ने नशामुक्ति को लेकर पदयात्रा की, जिसमें दोनों दलों की टॉप लीडरशिप एक साथ कदमताल करती नजर आई। पंजाब बीजेपी के कार्यकारी प्रधान अश्वनी शर्मा के साथ अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल भी इस पदयात्रा में शामिल हुए। 2020 में गठबंधन टूटने के बाद यह पहला मौका था, जब दोनों दलों की लीडरशिप ने सार्वजनिक कार्यक्रम में एक साथ हिस्सा लिया। ऐसे में अकाली दल और भाजपा के बीच गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
डेरा ब्यास के बाबा बनेंगे गठबंधन के सूत्रधार!
अकाली दल और भाजपा के बीच गठबंधन में डेरा ब्यास मुखी की भूमिका अहम मानी जा रही है। इस यात्रा में डेरा ब्यास के बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लो भी शामिल हुए थे। यात्रा के दौरान स्कूल के बंद कमरे में डेरा मुखी, गवर्नर और भाजपा नेताओं की मीटिंग हुई, जिसको लेकर पंजाब की राजनीति में हलचल मच गई। इसके बाद शाम को अकाली नेता बिक्रम मजीठिया भी डेरा मुखी से मिलने ब्यास पहुंचे। मजीठिया लगातार गठबंधन की पैरवी कर रहे हैं। 7 महीने से जेल में बंद अकाली नेता बिक्रम मजीठिया से सुबह उनकी मुलाकात हुई थी और दोपहर तक मजीठिया को जमानत मिल गई थी। साथ ही डेरा ब्यास मुखी बाबा गुरिंदर ढिल्लो ने मजीठिया पर दर्ज हुए केस को भी गलत बताया था।
नफा-नुकसान देख कर फैसला करेगा भाजपा हाईकमान
अकाली दल 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले किसी भी तरह भाजपा से गठबंधन करना चाहता है, क्योंकि यह गठबंधन पहले भी पंजाब में सरकार बना चुका है। इस बात पर पंजाब भाजपा के नेता भी दो धड़ों में बंटे हुए हैं। एक धड़ा गठबंधन चाहता है मगर दूसरा नहीं। भाजपा हाईकमान भी पंजाब में विरोधी दलों की तैयारियों और उनके मुकाबले भाजपा संगठन की धरातल पर स्थिति व भावी संभावनाओं की समीक्षा और आकलन कर रही है। भाजपा-अकाली गठबंधन के नफा और नुकसान इन दोनों पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। अंतिम फैसले में भले समय लग सकता है मगर राज्यपाल के साथ अकाली और भाजपा नेताओं की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि दोनों दलों के बीच सियासी कड़वाहट काफी हद तक कम जरूर हो गई है।
राजनीतिक खिचड़ी पर विरोधी दलों की नजरें
पंजाब के इस नए राजनीतिक तस्वीर पर विरोधियों की नजर टिकी हुई है। पंजाब कांग्रेस प्रधान राजा वड़िंग ने कहा कि गवर्नर एक यात्रा कर रहे हैं। उन्हें चाहिए कि देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से बात करें कि हमारे बॉर्डर को मजबूत करें। जिस प्रकार की यात्रा मुझे उनकी नजर आई। उससे ऐसा लगा कि समझौता एक्सप्रेस चल रही है। क्या पंजाब के गवर्नर अकाली दल और भाजपा का समझौता करवाने में अग्रणी रोल अदा कर रहे है? वहीं, आम आदमी पार्टी के नेता कुलदीप धालीवाल ने कहा कि गवर्नर के साथ आज सुखबीर बादल बैठे थे। पंजाब में नशे का छठवां दरिया अकाली-भाजपा की सरकार में ही आया था। आज पता नहीं वह किस मुंह से फिरोजपुर में गवर्नर के साथ बैठे थे, गवर्नर की यात्रा से पॉलिटिक्स की गंध आ रही थी।
भाजपा-अकाली दल ने क्या कहा
भाजपा नेता जगमोहन राजू ने कहा कि कोई सीक्रेट मीटिंग नहीं हुई। गवर्नर बैठते हैं तो मीटिंग बंद कमरे में होती है। आम आदमी पार्टी का जो हाल दिल्ली में हुआ, उससे बदतर हाल पंजाब में होगा। वहीं, अकाली दल के प्रवक्ता एडवोकेट अर्शदीप कलेर ने कहा कि शिष्टाचार मुलाकातें चलती रहती हैं। अगर फंक्शन ही नॉन पॉलिटिकल है तो उसके बाद मुलाकात शिष्टाचार ही है।
गौरतलब है कि अकाली दल और भाजपा का गठबंधन 2020 में केंद्र सरकार के कृषि सुधार कानूनों के मुद्दे पर टूटा था। अकाली दल कानून को पंजाब के किसानों के हितों के खिलाफ बताया था। किसानों ने आंदोलन शुरू कर दिया था और इसे देखते हुए भारी विरोध और दबाव के कारण अकाली दल ने एनडीए से बाहर होने का फैसला लिया था। बेशक केंद्र सरकार ने कृषि सुधार कानूनों को रद्द कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद दोनों दलों में कड़वाहट कम नहीं हुई और साल 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव दोनों ने अलग अलग लड़े थे। चुनाव में भाजपा सिर्फ 2 और अकाली दल महज 3 ही सीट जीत सका था।
रिपोर्ट: मोनी देवी
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
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