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Loksabha Election: चंडीगढ़ में खेला, अकाली दल के उम्मीदवार ने टिकट लौटाई; पार्टी भी छोड़ी

बुटेरला ने आरोप लगाया कि चुनाव लड़ने से पहले पार्टी के सामने मांग रखी कि इस बार अकाली दल चंडीगढ़ में अकेले चुनाव लड़ रहा है। ऐसे में यहां प्रचार और समर्थन के लिए सीनियर नेताओं की जरूरत पड़ेगी।

Loksabha Election: चंडीगढ़ में खेला, अकाली दल के उम्मीदवार ने टिकट लौटाई; पार्टी भी छोड़ी
Niteesh Kumarमोनी देवी, लाइव हिन्दुस्तान,चंडीगढ़Mon, 06 May 2024 07:51 PM
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चंडीगढ़ लोकसभा सीट से शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार हरदीप सिंह बुटेरला ने पार्टी छोड़ने की घोषणा करते हुए पार्टी प्रधान सुखबीर बादल को अपना टिकट लौटा दिया। बुटेरला ने आरोप लगाया कि चुनाव लड़ने से पहले पार्टी के सामने मांग रखी थी कि इस बार अकाली दल चंडीगढ़ में अकेले चुनाव लड़ रहा है। ऐसे में यहां प्रचार और समर्थन के लिए सीनियर नेताओं की जरूरत पड़ेगी। सुखबीर बादल 13 सीटों पर प्रचार कर रहे हैं लेकिन 14वीं चंडीगढ़ सीट को भूल गए हैं। पहले चंडीगढ़ में भाजपा और अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते थे। अकाली दल ने इस बात पर अलग होकर हरदीप सिंह बुटरेला को मैदान में उतारा था। वो कई दिन से प्रचार भी कर रहे थे। आज अचानक उन्होंने पूरी प्रदेश कार्यकारिणी के साथ इस्तीफा दे दिया। टिकट भी लौटा दी है। 

चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरदीप सिंह बुटेरला ने कहा कि पार्टी के सहयोग के बिना वह चुनाव नहीं लड़ सकते। वहीं, इस घटनाक्रम से अकाली दल की मु​श्किलें बढ़ गई हैं। बुटेरला ने कहा कि मुझे चुनाव लड़ने के लिए फंड की जरूरत थी लेकिन पार्टी ने फंड नहीं दिया। मैं एक किसान परिवार से हूं और अकेले चुनाव नहीं लड़ सकता। मैंने सुखबीर बादल को भी यह बात बताई लेकिन उन्होंने मेरी नहीं सुनी। बीजेपी में शामिल होने की अटकलों पर हरदीप बुटेरला ने कहा कि वह किसी पार्टी में शामिल नहीं होंगे। वह अकाली दल की नीतियों की वजह से परेशान होकर पार्टी छोड़ रहे हैं। माना जा रहा था कि हरदीप सिंह के चुनाव लड़ने की वजह से बीजेपी को वोटों का नुकसान होना था। हरदीप ने मेयर चुनाव में भी बीजेपी को वोट दिया था। बीजेपी से गठबंधन टूटने के बाद शिरोमणि अकाली दल ने चंडीगढ़ में पहली बार अपने लोकसभा उम्मीदवार की घोषणा की थी। हरदीप सिंह बुटेरला की बीजेपी के संजय टंडन और कांग्रेस की तरफ से मैदान में उतारे गए मनीष तिवारी से टक्कर थी। इस तरह से चंडीगढ़ लोकसभा चुनाव में मुकाबला त्रिकोणीय हो गया था।

तीन बार पार्षद रहे हैं हरदीप बुटेरला 
चंडीगढ़ नगर निगम में तीन बार पार्षद रहे 41 वर्षीय हरदीप की चंडीगढ़ के गांवों में अच्छी पकड़ मानी जाती है। साल 2006 और 2011 में हरदीप के पिता गुरनाम सिंह और भाई मल्कियत सिंह चंडीगढ़ नगर निगम के पार्षद चुने गए थे। 2015 में भाई की मृत्यु के बाद, 2016 और 2021 में हरदीप पार्षद बने। वह सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर भी बने। वहीं 2018 में, हरदीप को चंडीगढ़ के शिअद प्रमुख के रूप में चुना गया था। चंडीगढ़ नगर निगम में हरदीप हमेशा बीजेपी के साथ नजर आए।