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40 साल में पहली बार मिली चुनौती, कहां कमजोर पड़ गए कैप्टन; कांग्रेस ने क्यों बदला 'कप्तान'? समझें सबकुछ

सुहेल हामिद,नई दिल्लीPublished By: Shankar Pandit
Sun, 19 Sep 2021 06:20 AM
40 साल में पहली बार मिली चुनौती, कहां कमजोर पड़ गए कैप्टन; कांग्रेस ने क्यों बदला 'कप्तान'? समझें सबकुछ

चुनाव से पहले सत्ता विरोधी माहौल और पार्टी में वर्चस्व की लड़ाई में कमजोर पड़े कैप्टन अमरिंदर सिंह को आखिरकार जाना पड़ा। कांग्रेस उन्हें लगातार संभलने का वक्त दे रही थी, पर कैप्टन संकेतों को समझने में नाकाम रहे। पार्टी नेतृत्व को लगने लगा था कि कैप्टन शायद ही कांग्रेस को चुनाव में जीत दिला पाए। किसान आंदोलन को लेकर उनके बयानों और चुनावी वादों को पूरा करने में नाकामी ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। पार्टी को डर था कि आम आदमी पार्टी जिस आक्रामकता के साथ प्रचार कर रही है, कैप्टन के रहते उससे मुकाबला करना मुश्किल है। इसलिए, पार्टी ने आखिरी वक्त पर बैठक बुलाने का फैसला किया।

भविष्य की राजनीति के विकल्प खुले
पार्टी के इस निर्णय ने चुनाव में चुनौतियां भी बढ़ाई हैं। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के साथ कैप्टन ने साफ कर दिया है कि भविष्य की राजनीति के विकल्प खुले हैं। ऐसे में कैप्टन किसी दूसरे को मुख्यमंत्री पद सौंपकर आराम से नहीं बैठेंगे। पर, कैप्टन के 40 साल के राजनीतिक सफर में यह शायद पहला मौका है, जब उन्हें किसी ने चुनौती दी है।

चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रहे
पंजाब कांग्रेस की सियासत में कैप्टन का एकछत्र राज रहा है। उन्होंने 1998 में अपनी अकाली दल (पंथिक) पार्टी का कांग्रेस में विलय किया और चार साल बाद 2002 में मुख्यमंत्री बन गए। यह सही है कि 2017 में जीत का पूरा श्रेय कैप्टन को दिया गया, पर पिछले साढ़े चार में वह अपने चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रहे हैं।

कैप्टन अभी सही वक्त का इंतजार करेंगे
इसलिए कांग्रेस नेतृत्व को कई बार कैप्टन को तलब कर निर्देश भी देना पड़े। पर अब सवाल यह है कि कैप्टन के पास क्या विकल्प है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कैप्टन अभी सही वक्त का इंतजार करेंगे। वह यह देखेंगे कि उनके बाद पार्टी किसे मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपती है, इसके बाद वह कोई निर्णय लेंगे।

भविष्य की राजनीति के लिए ज्यादा विकल्प नहीं
कैप्टन के पास भविष्य की राजनीति के लिए ज्यादा विकल्प नहीं है। किसान आंदोलन की वजह से कैप्टन का भाजपा में शामिल होना मुश्किल है। वहीं, भाजपा कैप्टन सरकार की विफलताओं को अपने सिर पर नहीं लेना चाहेगी। इसके साथ उनकी उम्र भी ज्यादा है। आम आदमी पार्टी उनके खिलाफ इतना बोल चुकी है कि उसे साथ लेने में मुश्किल होगी। ऐसे में कैप्टन के पास नई पार्टी बनाने का विकल्प है।

अमरिंदर सिंह कांग्रेस छोड़ते हैं, तो उनके साथ कितने विधायक जाएंगे, यह कहना मुश्किल है। कैप्टन को लंबे वक्त से जानने वाले एक पार्टी नेता ने कहा कि उन्हें सिद्धू के मुकाबले ज्यादा विधायकों का समर्थन हासिल होता, तो वह कभी विधायक दल की बैठक से पहले इस्तीफा नहीं देते। इसलिए, वह पार्टी में रहते हुए सही वक्त का इंतजार करेंगे और इसके बाद भविष्य की रणनीति बनाएंगे।

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