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पंजाब विधानसभा पर बीजेपी की नजर, रनवीत बिट्टू को मंत्री बना खेल दिया बड़ा दांव

लुधियाना से चुनाव हारने के बाद भी बीजेपी ने रवनीत सिंह बिट्टू को मंत्री बनाया है। कहा जा रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव के लिहाज से बीजेपी ने बड़ा दांव खेला है।

पंजाब विधानसभा पर बीजेपी की नजर, रनवीत बिट्टू को मंत्री बना खेल दिया बड़ा दांव
Ankit Ojhaहिन्दुस्तान टाइम्स,चंडीगढ़Tue, 11 Jun 2024 08:18 AM
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पंजाब में बीजेपी को भले ही एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई लेकिन यह निश्चित है कि भगवा पार्टी ने राज्य में कदम जमाने का फैसला कर लिया है। 13 में से एक भी सीट ना पाने वाली बीजेपी ने पंजाब से ऐसे शख्स को मंत्री बनाया है जो इस बार चुनाव हार गया। लुधियाना सीट से चुनाव हारने के बाद भी तीन बार के कांग्रेस सांसद रहे रवनीत सिंह बिट्टू को कैबिनेट में शामिल किया गया है। यही नहीं, उन्हें दो अहम मंत्रालयों का राज्य मंत्री बनाया गया है। रवनीत बिट्टू को रेलवे और खाद्य प्रसंस्करण विभाग का राज्य मंत्री बनाया गया है। 

बिट्टू पहले पंजाब के नेता, जिन्हें दी गई अहम जिम्मेदारी
मोदी सरकार में बिट्टू पहले पंजाब के नेता हैं जिन्हें अहम जिम्मेदारी दी गई है। बिट्टू काम करने की अपनी आक्रामक स्टाइल के लिए भी जाने जाते हैं। पंजाब में बीजेपी के पास और भी कई बड़े नेता थे लेकिन नरेंद्र मोदी ने बिट्टू का ही चयन किया। सूत्रों का कहना है कि पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत बादल, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के चांसलर और नामित राज्यसभा सदस्य सतनाम सिंह संधू, पूर्व मंत्री राणा गुरमीत सोढ़ी और पूर्व राजनयिक तरनजीत सिंह संधू को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता था। हालांकि आखिर में पार्टी नेतृत्व ने बिट्टू के नाम पर मुहर लगाई जो कि चुनाव से ठीक पहले ही कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए थे। 

बिट्टू के पास दादा की विरासत
बिट्टू खुद तीन बार सांसद रह चुके हैं। वहीं उन्हें राजनीति अपने दादा से विरासत में रूप में मिली थी। उनके दादा बेअंत सिंह पंजाब के मुख्यमंत्री थे और 1995 में उन्हें खालिस्तानी आतंकियों ने मार दिया था। उस वक्त वह पंजाब के मुख्यमंत्री पद पर थे। उन्हें पंजाब में कट्टरपंथियों के खिलाफ कड़ा ऐक्शन लेने के लिए जाना जाता है। 

पंजाब के एक सीनियर बीजेपी नेता ने कहा, सभी 13 सीटें हारने के बाद भी भगवा पार्टी राज्य में पकड़ बनाने की कोशिश में लगी है। राज्य में बीजेपी का वोट शेयर 18 फीसदी बढ़ गया है। ऐसे में अब 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी करनी है। जो लोग भी बिट्टू की आलोचना कर रहे हैं उन्हें समझना चाहिए कि बिट्टू तीन बार के सांसद रह चुके हैं। वहीं वह जिस पार्टी में थे उसपर सिखों के साथ ज्यादती करने का आरोप लगता रहा है। ऑपरेशन ब्लूस्टार हो या फिर 1984 के सिख विरोधी दंगे, कांग्रेस के खिलाफ आरोप लगते रहते हैं। ऐसे में बीजेपी को राज्य में एक युवा और आक्रामक चेहरे की जरूरत थी। बिट्टू एक जाट-सिख हैं और सिख वोटरों में उनकी पहुंच है। 

उन्होंने कहा कि बिट्टू पंजाब में बीजेपी का भविष्य का चेहरा हो सकते हैं। उनकी राष्ट्रवादी और खालिस्तान विरोधी छवि बीजेपी को फायदा पहुंचा सकती है। राजनीतिक जानकार प्रमोद कुमार ने कहा कि समय ही बताएगा कि बीजेपी का यह दांव काम करेगा या नहीं। उन्होंने कहा, बीजेपी बिटटू को बड़ा नेता मानकर अहमियत दे रही है। हालांकि पंजाब में कई चुनौतियां हैं। पंजाब की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को केंद्र से क्या मदद मिलेगी, किसानों के मुद्दों का क्या हल निकलेगा, इसपर भी यहां आगे की राजनीति निर्भर करती है।