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Hindi News पंजाबआम चुनाव से पहले पंजाब से भाजपा को मिलेगी खुशखबरी, अकाली संग गठजोड़ के आसार, सुखदेव ढींडसा बनेंगे सूत्रधार

आम चुनाव से पहले पंजाब से भाजपा को मिलेगी खुशखबरी, अकाली संग गठजोड़ के आसार, सुखदेव ढींडसा बनेंगे सूत्रधार

लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा को पंजाब से खुशखबरी मिल सकती है। प्रदेश में खुद को मजबूत करने के लिए भाजपा शिरोमणि अकाली दल (बादल) के साथ गठजोड़ कर सकती है।

आम चुनाव से पहले पंजाब से भाजपा को मिलेगी खुशखबरी, अकाली संग गठजोड़ के आसार, सुखदेव ढींडसा बनेंगे सूत्रधार
Gaurav Kalaलाइव हिन्दुस्तान,चंडीगढ़Thu, 04 Jan 2024 09:12 PM
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लोकसभा चुनाव 2024 से पहले भाजपा को पंजाब से खुशखबरी मिल सकती है। प्रदेश में खुद को मजबूत करने के लिए भाजपा शिरोमणि अकाली दल (बादल) के साथ गठजोड़ कर सकती है। अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल का श्री अकाल तख्त साहिब परिसर में बेअदबी मामलों में ‘पंथ’ से माफी मांगने से पंजाब के राजनीति समीकरण बदलने वाले हैं। सूत्रों के मुताबिक सुखदेव सिंह ढींडसा के नेतृत्व वाला शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) 14 जनवरी को श्री मुक्तसर साहिब के माघी मेले में शिरोमणि अकाली दल (बादल) में विलय का ऐलान कर सकता है। अगर इन दोनों दलों का विलय हुआ तो फिर शिरोमणि अकाली दल और भाजपा का गठबंधन होने की पूरी संभावना बन जाएगी क्योंकि सुखदेव सिंह ढींडसा का इस समय भाजपा के साथ गठबंधन है। विलय होने के बाद वही ​शिअद और भाजपा के गठबंधन के सूत्रधार बनेंगे।

साथ आ सकते हैं सुखबीर-ढींडसा
25 दिसम्बर को दिल्ली के वरिष्ठ अकाली नेता मनजीत सिंह जी.के. ने अपनी जागो पार्टी का अकाली दल (बादल) में विलय करने की घोषणा की थी। इसके अगले ही दिन 26 दिसम्बर को सुखदेव सिंह ढींडसा ने अकाली दल बादल के बारे में पार्टी वर्करों की राय जानने के लिए 5 सदस्यीय कमेटी गठित कर दी थी। इस कमेटी की एक बैठक हो चुकी है जबकि अब पूरे पंजाब में वर्करों से अकाली दल (बादल) के साथ जाने संबंधी उनकी सलाह मांगी जा रही है। कमेटी ने 10 जनवरी तक अपनी रिपोर्ट देनी है जबकि उसके 4 दिन बाद माघी मेले पर अकाली दल (बादल) की राजनीतिक कांफ्रैंस मुक्तसर में होनी है। इस मौके पर सुखदेव सिंह ढींडसा और सुखबीर बादल साथ आ सकते हैं।

पंजाब में हिंदू-सिख एकता को बढ़ावा
ढींडसा के नजदीकी एक अकाली नेता ने बताया कि पार्टी में ज्यादातर नेता चाहते हैं कि सूबे के मौजूदा राजनीतिक हालात देखते हुए सुखबीर की पार्टी के साथ चला जाए। सुखबीर द्वारा मांगी गई माफी के बाद पंथक एकता जरूरी है। हालांकि इक्का-दुक्का नेता फिलहाल विलय के खिलाफ हैं मगर ज्यादातर ने समर्थन किया है। यह विलय तय माना जा रहा है। भाजपा के साथ संभावित गठजोड़ पर उस नेता का कहना था कि पंजाबी एक शांतिप्रिय कौम है और भाजपा के साथ समझौते से इस सीमावर्ती सूबे में हिंदू-सिख एकता को बढ़ावा मिलेगा। उनका तर्क था कि अकाली दल जब मजबूत होगा तो भाजपा भी मजबूत अकाली दल के साथ ही खड़ी होगी।

भाजपा के साथ गठबंधन में हैं ढींडसा 
ढींडसा इस समय भाजपा के साथ गठबंधन में हैं। उन्होंने भाजपा के साथ मिलकर ही पिछला विधानसभा चुनाव लड़ा था, ऐसे में माना जा रहा है कि अकाली दल बादल और भाजपा के गठबंधन में उनकी भूमिका बहुत अहम रहेगी। वहीं इस गठबंधन के सूत्रधार बनेंगे। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच आई.एन.डी.आई.ए. के समझौते के तहत होने वाले संभावित गठबंधन या तालमेल को देखते हुए भी अकाली-भाजपा गठजोड़ को अकाली जरूरी मान रहे हैं।
 

रिपोर्ट: मोनी देवी

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