CM से तब तक नहीं मिलेंगे, जब तक कि... सिख मंत्रियों ने खोला भगवंत मान के खिलाफ मोर्चा; IAS अफसरों से भी अपील

पीटीआई, चंडीगढ़
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पंजाब BJP चीफ का यह बयान राजनीतिक रूप से अहम है क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि मान से जुड़ा विवाद पंजाब सरकार और केंद्रीय कैबिनेट में शामिल प्रमुख सिख नेताओं के बीच बातचीत पर असर डाल सकता है।

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर लगे बेअदबी और पंथ विरोधी आरोपों और उन पर अकाल तख्त के हालिया आदेशों का असर अब पंजाब की राजनीति पर भी दिखने लगा है। पंजाब BJP का दावा है कि केंद्र सरकार में शामिल सिख मंत्रियों ने मुख्यमंत्री का बहिष्कार करने का फैसला किया है और कहा है कि उनसे तब तक नहीं मिलेंगे, जब तक वे अकाल तख्त के सामने माफी नहीं मांग लेते। पंजाब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को सलाह दी है कि वे श्री अकाल तख्त साहिब के फैसलों का सम्मान करें और टकराव का रास्ता न अपनायें। मौजूदा समय में मोदी सरकार में सिख समुदाय से दो मंत्री (हरदीप सिंह पुरी और रवनीत सिंह बिट्टू) हैं।

ढिल्लों ने कहा कि अकाल तख्त सिखों के लिए सर्वोच्च धार्मिक संस्था है और इसके निर्देशों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने मान से अपने पद से इस्तीफा देने और अकाल तख्त से माफी मांगने को कहा। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जिन्होंने भी अकाल तख्त साहिब से टकराव किया, उन्हें राजनीतिक और सामाजिक नुकसान उठाना पड़ा। चंडीगढ़ में मंगलवार को कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के कई नेताओं के भाजपा में शामिल होने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए श्री ढिल्लों ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को एक सच्चे सिख की तरह श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष उपस्थित होकर अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए और पंथ से क्षमा मांगनी चाहिए।

टकरावपूर्ण रवैया अपनाने से स्थिति और गंभीर हो सकती है

उन्होंने कहा कि अकाल तख्त साहिब के निर्णयों के खिलाफ बयानबाजी करने या टकरावपूर्ण रवैया अपनाने से स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसके साथ ही ढिल्लों ने पंजाब सरकार के नानक नाम लेवा मंत्रियों, भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों और अन्य सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों से भी अपील की है कि जब तक भगवंत मान को श्री अकाल तख्त साहिब से क्षमा नहीं मिल जाती, तब तक वे अकाल तख्त साहिब के निर्देशों का सम्मान करें और मुख्यमंत्री के साथ किसी भी प्रकार की बैठक, बातचीत या अन्य संपर्क से परहेज करें।

क्या कोई आरोपी कभी स्वीकार करता है

मुख्यमंत्री द्वारा संबंधित वीडियो को अपना न मानने संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ढिल्लों ने कहा, "क्या कोई आरोपी कभी स्वीकार करता है कि उसने कोई गैरकानूनी काम किया है?" उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रहे हैं। दूसरी तरफ, AAP का आरोप है कि BJP 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले इस मुद्दे को धार्मिक जवाबदेही और राजनीतिक आचरण पर एक बड़ी बहस में बदलना चाहती है। आप ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन खत्म करने के बाद से BJP राज्य में तेजी से अपनी पैठ बढ़ा रही है और यह विवाद उसकी रणनीति का हिस्सा है।

इस अवसर पर शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता एवं चार बार पार्षद रह चुके सुखविंदर पाल सिंह मिंटा तथा उनकी पत्नी हरप्रीत कौर भाजपा में शामिल हुए। मिंटा वर्तमान में अकाली दल की राज्य पीएसी के सदस्य हैं। इसके अलावा वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुरबिंदर सिंह अटवाल के पुत्र राजपाल अटवाल ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। ढिल्लों ने दावा किया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का भाजपा में शामिल होना पार्टी की बढ़ती स्वीकार्यता का संकेत है और आने वाले समय में यह सिलसिला जारी रहेगा।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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