
बिक्रम मजीठिया की संपत्तियों पर अब ना मारें छापा, मोहाली कोर्ट ने सतर्कता विभाग पर लगाई रोक
पंजाब सतर्कता ब्यूरो ने पिछले महीने अकाली दल के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया को उनके खिलाफ दर्ज आय से अधिक संपत्ति मामले में अमृतसर स्थित उनके आवास पर छापेमारी के बाद गिरफ्तार कर लिया था। तब से वह जेल में बंद हैं।
पंजाब में मोहाली की एक अदालत ने मंगलवार को सतर्कता विभाग को पूर्व मंत्री एवं अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के आवासों पर छापेमारी करने से रोक लगा दी है और आदेश दिया है कि उन्हें मूल्यांकन के मकसद से परिसरों का दौरा करने से पहले मजीठिया के वकील एडवोकेट अर्शदीप सिंह कलेर को सूचित किया जाये।
एडवोकेट अर्शदीप सिंह कलेर ने अदालत परिसर के बाहर पत्रकारों को बताया कि अदालत ने मामले के जांच अधिकारी (आईओ) को मजीठिया के परिसरों का दौरा करने की अनुमति दी थी। सुबह न्यायालय ने जांच अधिकारी को परिसरों का दौरा करने की अनुमति दी थी, इसके बजाय वह खुद जाने के बजाय सतर्कता ब्यूरो की टीमों को दिल्ली, अमृतसर, मजीठा में तीन अलग-अलग जगहों पर भेजा और यह इस खबर को सनसनीखेज बनाने के लिए मीडिया के साथ साझा भी की। अकाली नेता ने कहा कि हमने तत्काल अदालत को अवैध छापों की जानकारी दी और अदालत ने इन छापों को तुरंत रोकने का आदेश दिया।
24 घंटे पहले सूचना देनी अनिवार्य
कलेर ने कहा कि अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि सतर्कता विभाग अब मजीठिया के परिसरों पर छापेमारी नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि सतर्कता केवल मूल्यांकन के मकसद से ही उनके परिसरों का दौरा कर सकती है और इसके लिए उन्हें मजीठिया के वकील अर्शदीप सिंह कलेर को 24 घंटे पहले सूचना देनी अनिवार्य होगी। उन्होंने कहा कि मूल्यांकन केवल फर्द जमा तलाशी में लिखित संपत्तियों की जब्ती का ही किया जा सकता है।
मजीठिया का ब्लड प्रेशर ठीक
एडवोकेट कलेर ने कहा कि मजीठिया झूठे एन.डी.पी.एस मामले में पटियाला जेल में पांच महीने से ज्यादा समय बिता चुके हैं और उन्होंने एक भी सुविधा की मांग नहीं की। उन्होंने कहा कि अब भी उन्होंने किसी भी सुविधा की मांग नहीं की है। उन्होंने कहा कि मजीठिया की कथित मांगों पर सत्ताधारी आम आदमी पार्टी उन्हें बदनाम करने के लिए ये सारी अफवाहें फैला रही है। उन्होंने कहा कि आप द्वारा उनका ब्लड प्रेशर ज्यादा हाने की बात भी फैलायी जा रही है, जबकि हकीकत यह है कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को ऐसी अफवाहें फैलाने के बजाय अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए। एडवोकेट कलेर ने बताया कि अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई के लिए निर्धारित कर दी है, एवं सतर्कता ब्यूरो को आज की गयी छापेमारी की पूरी वीडियोग्राफी के साक्ष्य पेश करने के निर्देश दिये हैं।

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