अकाली वर्कर की गिरफ्तारी गैरकानूनी, तुरंत रिहा करो; हाई कोर्ट का पंजाब पुलिस को झटका
अकाली दल के वर्कर को गिरफ्तार करने वाले केस में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पुलिस को जोरदार झटका दिया है। कोर्ट ने कहा कि अकाली वर्कर की गिरफ्तारी पूरी तरह से गैरकानूनी है उसे तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। इसी वर्कर को छुड़ाने के चक्कर में विक्रम मजीठिया के ऊपर केस दर्ज हुआ है।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने शिरोमणि अकाली दल के वर्कर जोबनप्रीत की गिरफ्तारी को गैरकानूनी करार दिया है। हाई कोर्ट ने पंजाब पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए जोबनप्रीत को तुरंत रिहा करने के आदेश दिए हैं। जोबनप्रीत को मजीठा थाने से छुड़ाने के आरोप में ही मजीठिया पर केस दर्ज हुआ था। पंजाब पुलिस ने मजीठिया के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया था। मजीठिया की विधायक पत्नी गनीव कौर ने कहा कि सरकार उनके खिलाफ एलओसी जारी कर ड्रामा कर रही है। मजीठिया ने पहले ही दूसरे मामले में अपना पासपोर्ट सरेंडर किया हुआ है। ऐसे में विदेश जाने का तो कोई सवाल ही नहीं है। अकाली दल ने याचिका दायर कर जोबनप्रीत की गिरफ्तारी को चुनौती दी और मजीठिया की गिरफ्तारी पर तुरंत रोक लगाने की मांग की थी।
मजीठिया के वकीलों को एफआईआर की कॉपी उपलब्ध कराने के आदेश
वहीं, आज बुधवार को अमृतसर जिला कोर्ट ने अमृतसर ग्रामीण पुलिस को आदेश दिया है कि 24 घंटे के भीतर मजीठिया के वकीलों को एफआईआर की कॉपी उपलब्ध करवाई जाए, ताकि वे मामले में कानूनी कार्रवाई और पैरवी कर सकें। मजीठिया के वकीलों ने कोर्ट में याचिका दर्ज की थी। याचिका में कहा गया कि मजीठा थाना के एसएचओ एफआईआर की कॉपी उपलब्ध नहीं करवा रहे हैं।
अपने वर्कर को थाने से जबरन छुड़ाने के आरोप में मजीठिया पर दर्ज है केस
30 मई को मजीठा थाने में दर्ज एफआईआर नंबर 90 में नामजद आरोपी सोहियां कलां के जोबनप्रीत सिंह को गिरफ्तार किया था। 31 मई को सुबह लगभग 11:30 बजे बिक्रम मजीठिया अपने 50-60 समर्थकों के साथ मजीठा पुलिस स्टेशन पहुंचे थे।पुलिस का आरोप है कि मजीठिया और उनके समर्थकों ने जबरन थाने और पूछताछ कक्ष में घुसकर हंगामा किया, हथियार लहराए, केस फाइलें फाड़ीं। फिर आरोपी जोबनप्रीत को पुलिस हिरासत से जबरन छुड़ाने की कोशिश की। मजीठा थाने में 1 जून को बिक्रम सिंह मजीठिया पर केस दर्ज किया गया। गिरफ्तारी के लिए पुलिस की 12 टीमें लगा दी गईं। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया था।
हाईकोर्ट ने 1 जून को मामले पर पहली सुनवाई करते हुए पंजाब के डीजीपी और अमृतसर रूरल के एसएसपी को नोटिस जारी कर इस पूरी कार्रवाई पर जवाब तलब किया। 2 जून को मजीठिया की याचिका पर दोबारा सुनवाई हुई। अकाली दल ने पुलिस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध और मनगढ़ंत करार दिया। पंजाब सरकार की ओर से पेश वकीलों ने मजीठिया के वकीलों की दलीलों का लिखित और विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से और समय मांगा। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार की इस मांग को स्वीकार करते हुए 3 जून तक का समय दिया था।
रिपोर्ट: मोनी देवी
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Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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