
गलती से बॉर्डर पार करने वाला किसान पाकिस्तानी पुलिस के कब्जे में; पहले किया इनकार, फिर कबूला
होशियारपुर के पूर्व सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता अविनाश राय खन्ना ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखकर युवक को वापस लाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने अनुरोध किया है कि वे परिवार की इस मांग पर विचार करें।
पंजाब के फाजिल्का में भारत-पाकिस्तान सीमा पर तारबंदी के पार खेती करने गया गांव खैरेके उताड़ का एक युवा किसान पाकिस्तान में ही है। वह पाकिस्तान की पंजाब पुलिस की हिरासत में है। यह बात पाकिस्तानी रेंजर्स ने कबूल की है जबकि वह पहले इस से इनकार करते रहे थे कि भारत का कोई व्यक्ति बॉर्डर पार कर पाकिस्तान नहीं आया है। अमृतपाल सिंह 21 जून को तारबंदी के पार खेती करने गया था और गलती से पाकिस्तान की सीमा में चला गया था। उसके परिजन पहले दिन से ही कह रहे थे कि उनका बेटा पाकिस्तानी रेंजर्स के कब्जे में है लेकिन बीएसएफ के साथ हुई मीटिंग में पाकिस्तानी रेंजर्स इस बात को नकारते रहे। अब उनके पुष्टि करने के बाद बीएसएफ ने किसान के परिवार को इस बारे में जानकारी दी है।
इस मामले में बीएसएफ का पहले पाकिस्तान से तीन बार मीटिंग कर चुकी है। अब एक बार फिर पाकिस्तानी रेंजर्स से मीटिंग कर अमृतपाल सिंह की भारत वापसी के प्रयास किए जायेंगे। अमृतपाल सिंह विवाहित है। उसकी एक तीन महीने की मासूम बेटी भी है। उधर, होशियारपुर के पूर्व सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता अविनाश राय खन्ना ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखकर युवक को वापस लाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने अनुरोध किया है कि वे परिवार की इस मांग पर विचार करें कि वे युवक को भारत वापस लाने के लिए पाकिस्तानी अधिकारियों से संपर्क करें।
खेती करने दिन में गया था, शाम को नहीं लौटा
गांव खैरेके उताड़ के रहने वाले लापता किसान अमृतपाल सिंह के पिता जगराज सिंह ने बताया कि उनकी साढ़े आठ एकड़ जमीन तारबंदी के भीतर है। वे दो दशकों से भी ज्यादा समय से इस जमीन पर खेती कर रहे हैं। 21 जून को दोपहर 12 बजे उनका बेटा अमृतपाल सिंह खेत में काम करने गया था। फेंसिंग पार की खेती बीएसएफ की निगरानी में होती है। उस तरफ जाने से पहले बीएसएफ किसानों से पहचान पत्र जमा करवाती है और आने-जाने की प्रविष्टि भी रजिस्टर में दर्ज करती है। दिन में अमृतपाल सिंह अपना पहचान पत्र जमा करवा कर गेट नंबर-223 से खेतों में गया था लेकिन शाम को वहां से नहीं लौटा।
खेतों में मिले पाकिस्तान की तरफ जाने के निशान
परिजनों ने लापता अमृतपाल की खोज के लिए बीएसएफ से गुहार लगाई। बीएसएफ जवानों ने फेंसिंग पार खेतों में सर्च अभियान चलाया लेकिन उसका सुराग नहीं मिला। खेतों की मिट्टी में अमृतपाल के पैरों के निशान पाकिस्तान की ओर जाते दिखे। इससे साफ होता है कि वह उस तरफ गया है। 21 जून को बीएसएफ के कमांडेंट स्तर के अधिकारी पाकिस्तान रेंजर्स से संपर्क कर रहे थे, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। अगले दिन शाम 4 बजे भारत-पाक अधिकारियों के बीच फ्लैग मीटिंग हुई। उसके बाद बीएसएफ ने परिवार को सूचित किया कि अमृतपाल पाकिस्तान की तरफ गया है लेकिन पाक रेंजर्स के मुताबिक उन्हें ऐसा कोई शख्स नहीं मिला। लापता किसान के परिजनों का आरोप था कि उनके बेटे को पाकिस्तानी रेंजर्स उठाकर ले गए हैं और झूठ बोल रहे हैं। 21 जून को लापता होने के बाद से अब तक उसका कोई पता नहीं चल सका है।
जीरो लाइन पर खेती करने के लिए मिलती है स्पेशल परमिशन
जीरो लाइन बॉर्डर का वह हिस्सा होता है, जहां दोनों देशों की सीमाएं मिलती हैं। इस जगह पर किसानों को खेती करने के लिए स्पेशल परमिशन मिलती है। जब किसान फसल बोते या काटते हैं, तो बीएसएफ के जवान उनकी सुरक्षा के लिए साथ रहते हैं। इन्हें किसान गार्ड भी कहते हैं। किसानों को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे के बीच बीएसएफ की सख्त निगरानी में कंटीले तारों की बाड़ और अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के बीच की जमीन तक पहुंचने की अनुमति दी जाती है। फाजिल्का, फिरोजपुर, गुरदासपुर, पठानकोट, अमृतसर और तरनतारन सहित सीमावर्ती जिलों के कई किसानों की इस क्षेत्र में कृषि भूमि है, जिसे जीरो लाइन के तौर पर जाना जाता है।
रिपोर्ट: मोनी देवी

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