AAP के 'चाणक्य' रहे संदीप पाठक पर BJP का दांव, केजरीवाल के 7 सांसदों में सिर्फ इन्हें नवीन की टीम में जगह क्यों?

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IIT दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर और कैम्ब्रिज से पीएचडी होल्डर संदीप पाठक को संगठन में यह बड़ी जिम्मेदारी मिलना महज कोई इनाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव की एक बहुत बड़ी और गहरी क्रैकिंग स्ट्रैटेजी है।

sandeep pathak BJP Punjab
संदीप पाठक का पार्टी छोड़ना और फिर भाजपा के थिंक टैंक में शामिल होना केजरीवाल की 'आप' के लिए एक बड़ा रणनीतिक घाटा है।

इस साल अप्रैल में आम आदमी पार्टी (AAP) के 7 राज्यसभा सांसदों का एक साथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होना अरविंद केजरीवाल के लिए सबसे बड़ा सियासी झटका माना गया था। लेकिन चार महीने बाद भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की 64 सदस्यों वाली कार्यकारिणी की लिस्ट आई, तो एक बात साफ हो गई- भाजपा ने दलबदलुओं की भीड़ में से असली 'रणनीतिकार' को पहचान लिया है।

पार्टी बदलकर भाजपा में आए सातों सांसदों- राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल आदि में से केवल संदीप पाठक को भाजपा का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है।

आईआईटी दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर और कैम्ब्रिज से पीएचडी होल्डर संदीप पाठक को संगठन में यह बड़ी जिम्मेदारी मिलना महज कोई इनाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव की एक बहुत बड़ी और गहरी क्रैकिंग स्ट्रैटेजी है।

कौन हैं संदीप पाठक?

संदीप पाठक भारतीय राजनीति का एक गैर-पारंपरिक चेहरा हैं। छत्तीसगढ़ के रहने वाले पाठक ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पीएचडी की, फिर ऑक्सफोर्ड और MIT में रिसर्च किया। इसके बाद वे IIT दिल्ली में प्रोफेसर रहे, जहां उनका काम सोलर टेक्नोलॉजी पर था।

केजरीवाल के संपर्क में आने के बाद उन्होंने राजनीति की दुनिया में कदम रखा। उन्हें जमीन पर भाषण देने से ज्यादा डेटा, बूथ-लेवल सर्वे और माइक्रो-मैनेजमेंट का उस्ताद माना जाता है।

कैसा था अरविंद केजरीवाल और संदीप पाठक का रिश्ता?

अरविंद केजरीवाल और संदीप पाठक के बीच रिश्ता कितना गहरा था इसका पता इसी से लग जाएगा कि केजरीवाल जब जेल में थे, तब उनसे मिलने की इजाजत पाने वाले सिर्फ तीन लोगों में से एक संदीप पाठक थे। बाकी दो में उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल और उनके पीएस बिभव कुमार थे।

अप्रैल 2026 में जब संदीप ने AAP छोड़कर BJP का दाम थामा, तो केजरीवाल को आखिरी समय तक भरोसा था कि वे पार्टी के साथ रहेंगे। क्योंकि ज्वाइनिंग के दिन सुबह तक केजरीवाल उन्हें फोन करते रहे, लेकिन संदीप ने फोन नहीं उठाया या गोलमोल जवाब दिए।

AAP में पाठक के लिए बनाया गया एक नया पद

संदीप पाठक का कद आम आदमी पार्टी के भीतर इतना बढ़ गया था कि उनके लिए अलग से एक पद बनाया गया। राष्ट्रीय महासचिव का पद सिर्फ उनके लिए बनाया गया था।

दिसंबर 2022 में AAP ने राष्ट्रीय महासचिव का पद सिर्फ संदीप पाठक के लिए बनाया। उन्हें राजनीतिक मामलों की समिति (PAC) का स्थायी आमंत्रित सदस्य भी बनाया गया- यह कोर टीम का हिस्सा था।

2027 पंजाब चुनाव: BJP को संदीप पाठक की जरूरत क्यों?

2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में जब आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीतकर इतिहास रचा था, तो उस 'आप लहर' को बैकग्राउंड में तैयार करने वाले मुख्य रणनीतिकार संदीप पाठक ही थे।

अब 2027 में पंजाब में फिर से चुनाव होने हैं और भाजपा इस बार अकाली दल की बैसाखी के बिना, सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का मन बना चुकी है।

भाजपा की पकड़ हमेशा से पंजाब के हिंदू बहुल और शहरी इलाकों में रही है। मालवा, माझा और दुआबा के ग्रामीण सिख इलाकों में पैठ बनाने के लिए पार्टी को जमीनी डेटा की जरूरत है।

संदीप पाठक जानते हैं कि आम आदमी पार्टी ने पंजाब में अपना जमीनी नेटवर्क कैसे खड़ा किया था। भाजपा उनके इसी अनुभव का इस्तेमाल 'आप' के गढ़ में सेंध लगाने के लिए करेगी।

राघव चड्ढा से अलग क्यों हैं पाठक?

राघव चड्ढा जहां टीवी डिबेट्स और मीडिया का बड़ा चेहरा हैं, वहीं संदीप पाठक संगठन को अंदर से खड़ा करने और चुनाव जिताने का 'मैकेनिक्स' जानते हैं। यही वजह है कि नबीन ने चड्ढा के बजाय पाठक को संगठन में जगह दी।

'AAP' के लिए कितना बड़ा झटका?

संदीप को AAP का "चाणक्य", "साइलेंट मास्टरमाइंड", और "बैकरूम बॉय" कहा जाता था। वह पर्दे के पीछे रहकर चुनावी रणनीति, संगठन, और प्रचार की जिम्मेदारी संभालते थे।

संदीप पाठक 2017 पंजाब चुनाव में AAP की हार के बाद केजरीवाल से मिले थे। उन्होंने पंजाब में 3 साल बिताकर बूथ लेवल तक संगठन बनाया।

2022 पंजाब विधानसभा चुनाव में AAP को 117 में 92 सीटें मिलीं और इसमें संदीप की रणनीति को बड़ा योगदान माना गया। केजरीवाल ने उन्हें खुद धन्यवाद देते हुए कहा था, "संदीप पाठक ने पंजाब में बूथ लेवल तक संगठन बनाया, जिससे जीत मिली।"

संदीप पाठक का पार्टी छोड़ना और फिर भाजपा के थिंक टैंक में शामिल होना केजरीवाल की 'आप' के लिए एक बड़ा रणनीतिक घाटा है। 2022 की पंजाब जीत के सबसे बड़े दोनों चेहरे- संदीप पाठक और राघव चड्ढा अब भाजपा के पाले में हैं।

नितिन नबीन की इस 64 सदस्यीय नई टीम में 51 नए चेहरों को जगह दी गई है। लेकिन इस पूरी सूची में संदीप पाठक की एंट्री सबसे खास मानी जा रही है। जो शख्स कभी भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल के लिए पंजाब का किला फतह करने का नक्शा बना रहा था, वही शख्स अब भाजपा के लिए उसी पंजाब के मोर्चे की घेराबंदी करेगा।

Shubham Sharma

लेखक के बारे में

Shubham Sharma
शुभम शर्मा साल 2017 से पत्रकारिता और मीडिया जगत में काम कर रहे हैं। टीवी में इनपुट असाइनमेंट से शुरुआत करते हुए डिजिटल मीडिया की दुनिया में कदम रखा। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक का अनुभव। TV9 भारतवर्ष और मनीकंट्रोल हिंदी (Network 18) जैसे बड़े संस्थानों के बाद अब लाइव हिंदुस्तान में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर खबरों को आप तक पहुंचाने के काम कर रहे हैं। और पढ़ें

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