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25 जनवरी, 2020|7:39|IST

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Photo Gallery : आईए आपका है इंतजार, बरेली क्लब के मैदान आए हैं उत्तराखंड के कलाकार

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वैभवशाली संस्कृति और खूबसूरत तस्वीर के साथ उत्तराखंड का अद्भुत पहाड़ बरेली क्लब के मैदान पर उतर आया है। सोमवार को रंगयात्रा में मन को विभोर करने वाली झांकियों ने पूरे शहर को मुग्ध कर दिया। छौलिया नृत्य की कलाकारी और पहाड़ी संगीत के साथ थिरकती रंगयात्रा बरेली क्लब मैदान पहुंची तो उत्तरायणी जन कल्याण समिति के पदाधिकारी ने भव्य स्वागत किया।

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उत्तरायणी जन कल्याण समिति की तरफ से इस बार 26वें उत्तरायणी मेले का आयोजन किया जा रहा है। ठंड, गलन के साथ कोहरे ने माहौल पहले से उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों सरीखा बना दिया था। सुबह कोतवाली के सामने समिति के पदाधिकारी जुटे।

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मंच पर प्रस्तुति के बीच जब 76 बरस के नैननाथ रावल आए तो पब्लिक ने जोरदार तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। बुजुर्ग रावल ने गीत सुनाया तो लोग झूम उठे। पहाड़ी तासीर में घुले उनके गीत पर लोगों को उत्तराखंड के पहाड़ों की याद आ गई। लोकगीत की मिठास ने सभी को मुग्ध कर दिया। युवा कलाकार मनोज आर्या ने भी दर्शकों का दिल जीत लिया।

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उत्तरायणी जन कल्याण समिति की तरफ से इस बार 26वें उत्तरायणी मेले का आयोजन किया जा रहा है। ठंड, गलन के साथ कोहरे ने माहौल पहले से उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों सरीखा बना दिया था। सुबह कोतवाली के सामने समिति के पदाधिकारी जुटे।

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मैं अपनी रंगत में आया तो मेरे एक बुलावे पर उत्तराखंड के बड़े-बड़े लोग बरेली क्लब के मैदान पर खिंचे चले आए। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी, रमेश पोखरियाल निशंक, भगत सिंह कोश्यारी और मौजूदा मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत तमाम दिग्गज मेरा मान बढ़ा चुके हैं।

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पारंपरिक वाद्य यंत्र पर छौलिया नृत्य करते कलाकारों को देखने के लिए लोग बीच राह में रुक गए। समिति के पदाधिकारियों ने जगह-जगह फूल बरसाकर रंगयात्रा का स्वागत किया। नावेल्टी चौराहा से होते हुए रंगयात्रा अयूबखां चौराहा और चौकी चौराहा होते हुए बरेली क्लब मैदान पहुंची। वहां सबसे पहले भगवान श्रीगणेश की आराधना हुई।

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मंच पर देवी आराधना हुई और डीआईजी ने दीप जलाकर मेले का उद्घाटन किया। टिबरीनाथ सांग्वेद संस्कृत विद्यालय के छात्रों ने स्वाति वचन का पाठ किया। पहले दिन छौलिया नृत्य की प्रस्तुति के साथ कई स्कूलों के बच्चों ने नृत्य-संगीत पेश किया। शाम के सत्र का उद्घाटन एसएसपी शैलेश पांडेय ने दीप जलाकर किया।

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बागेश्पर में अपार भीड़ जुटने लगी तो उत्तरायणी मेला धीरे-धीरे उत्तराखंड के दूसरे इलाकों में भी होने लगा। हल्द्वानी, लालकुआं, गदरपुर, दिनेशपुर, रुद्रपुर, खटीमा, टनकपुर, चंपावत, देहरादून के साथ-साथ बरेली, लखनऊ, चड़ीगढ़ और दिल्ली में भी पहाड़ के लोग मेला कराने लगे हैं। कुछ साल पहले मेले की धमक मायानगरी तक भी पहुंच गई।

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