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3 जून, 2020|10:32|IST

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कोरोना: लॉकडाउन हुआ बेअसर, गोरखपुर में आधी रात तक भीड़, पैदल, बस, ट्रक जिसे जो मिला उससे चल पड़ा

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रविवार को आधी रात तक लोग सड़क पर बसों केे लिए भटकते रहे। सुबह से लोगों के आने का सिलसिला शुरू हुआ तो फिर रात तक सड़कों से ऐसी ही तस्‍वीरे आती रहीं। ये पता नहीं कि इनमें से कोई कोरोना का साइलेंट कैरियर है या नहीं। सोचिए परिणाम कितने घातक हो सकते हैं।

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लॉकडाउन के बीच गोरखपुर शहर को जैसे-जैसे दृश्‍य देखने पड़ रहे हैं वैसे दृश्‍य और वैसी बेबसी शहर ने पहले कभी नहीं देखी। दिल्‍ली, मुंबई, गुजरात, पुणे और देश के तमाम शहरों से लोगों का आना थम नहीं रहा है।

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परदेश में मुश्किल वक्‍त आया तो घर लौटने के सिवा कोई चारा न सूझा। घर जाने को उठ खड़े हुए तो सड़कों पर कोई साधन नहीं मिला। पैदल,बस, ट्रक जिसे जो मिला उसी से बढ़ चला। भूखे, प्‍यासे,तड़पते, बस बढ़ चले। इनके सामने हर राहत, हर कोशिश बौनी होती नज़र आई।

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लॉकडाउन तोड़कर कोरोना को पैर पसारने का मौका देती भीड़ की तस्‍वीरें मन खराब कर चुुुुकी हों तो जरा गोरखपुर शहर के इस योद्धा की पीठ के घाव भी देख लीजिए। सफाई कर्मी खालिक केे नाम से पहचाने जाने वाले इस योद्धा ने 30 किलो वजन लाद कर छह घंटे लगातार छिड़ाकाव किया। उसकी पीठ पर घाव हो गए। उसके मकसद को बेअसर करने का हक किसी को नहीं।

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प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने बस 21 दिन का साथ मांगा था। 21 दिन का सम्‍पूर्ण लॉकडाउन सफल कर हम उस कोरोना से जीत जंग जीत सकते हैं जिसके सामने अमरीका, इटली तक बेबस हैं। लेकिन क्‍या ऐसी नाकामियों, बेसब्र घटनाओं से हम अपने मकसद में कामयाब होंगे। यह मौका है अब भी सम्‍भल जाने का।

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